शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018

बेहद निराशाजनक

देश  में कुछ हालिया घटनाएं बेहद निराशाजनक है। सबरीमाला में महिलाओ के प्रवेश  को लेकर जो कुछ हो रहा है, उससे पूरी दुनिया में भारत की खिल्ली उडाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश  के बावजूद कटटरपंथी महिलाओं को  सबरीमाला मंदिर में प्रवेश  नहीं  होने  दे रहे हैं।  शुक्रवार को  मुख्य पुजारी द्वारा महिलाओं के प्रवेश  की स्थिति मे मंदिर को बंद करने की धमकी के बाद एक पत्रकार समेत दो महिलाओं को भारी सुरक्षा के बावजूद मंदिर में प्रवेश  किए बगैर लौटना पडा। इतना ही नहीं मंदिर में प्रवेश  करने का साहस जुटाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता  रेहना फातिमा के कोच्चि स्थित घर पर हमले भी किए गए। इस मामले में कांग्रेस और भाजपा महिलाओं को मंदिर प्रवेश  नहीं देने पर साथ-साथ हैं। भगवान अयप्पा के इस मंदिर में सदियों से महिलाओं का प्रवेश  इस बिला पर वर्जित है क्योंकि  अयप्पा  ब्रह्मचारी थे। श्रद्धालु लुंगी पहनकर अयप्पा के  दर्शन  करने सबरीमाला मंदिर आते हैं और कई दिन तक  ब्रह्मचर्य  का पालन करते हैं।  लेकिन बहुत कम लोगों को मालुम है कि सबरीमाला आने से साठ किलोमीटर पहले एक छोटे से कस्बा है जहां वावर नाम की एक मस्जिद है और सबरीमाला आने वाले तीर्थयात्री इस मस्जिद में परिक्रमा करते हैं। पिछले पांच सौ सालों से यह यह परंपरा जारी है। इस बात के  दृष्टिगत यह बात अजीब लगती है कि सबरीमाला मंदिर में आज भी महिलाओ के प्रवेश  को लेकर कांग्रेस समेत सभी कटटरपंथी  संवेदनशील   हैं।  जिस तरह से राजनीतिक दल इस मामले में कूद पडे हैं, उससे साफ है कि यह मामला भी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तरह  धर्मिक कम राजनीतिक ज्यादा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस मामले को हवा देकर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। इस मामले ने महिलाओं को सशक्त करने के राजनीतिक आडंबर की कलई भी खोल दी है। न्यायपालिका का  सम्मान करने से कहीं ज्यादा राजनीतिक दलों को अपने वोट बैंक की परवाह रहती है।

भाजपा के  राष्ट्रीय  प्रवक्ता संविद पात्रा का यह बयान बेहद हास्यास्पद है कि उनकी पार्टी को बदनाम करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पाकिस्तान के साथ साजिश  कर रहे हैं। सरकार भारत की जनता चुनती है, पाकिस्तानी अवाम की इसमें कोई रोल नहीं है। इस तरह के ऊल-जलूल  बयान देकर भाजपा अपनी कमजोरियां ही उजागर करती है। कांग्रेस को पाकिस्तान के साथ जोडकर भाजपा जनता को अब और मूर्ख नहीं बना सकती।

हिमाचल में जयराम ठाकुर सरकार ने पार्टी नेताओं को भारी घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों में लाभ के पद देकर कर्ज  में आकंठ डूबे प्रदेश  का  बड़ा  अहित किया है। इस समय प्रदेश  की जो माली हालात है, उसका ख्याल करते हुए घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों पर अतिरिक्त बोझ डालने की बजाए, उन्हें स्वाबलंबी बनाया जाना चाहिए। नब्बे के बाद से राज्य में हर सरकार उधारी लेकर काम चला रही है। जयराम ठाकुर सरकार के सत्ता में आए लगभग एक साल होने जा रहा है मगर राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने की दिशा  में कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं। सिर्फ  घोषणाएं की जा रही है। मौजूदा सरकार की भी लगभग वही कार्यशैली है, जो वीरभद्र सिंह सरकार की थी।