मंगलवार, 4 सितंबर 2018

एशियाई गेम्सः अभी भी वहीं खडे हैं

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में रविवार को संपन्न हुई एशियाई खेलों में भारत का 1951 के बाद अब तक सर्वश्रेष्ठ  प्रदर्शन  रहा है। जकार्ता  में भारत ने 15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 29 ब्राँज  समेत कुल मिलाकर  69 पदक जीते हैं। इससे पहले  2010 में चीन के ग्वांगझु में  65 पदक जीत कर भारत ने  उम्दा  प्रदर्शन  किया था।  67 पहले 1951 में दिल्ली में आयोजित पहले एशियाई खेलों में भी भारत ने 15 गोल्ड मेडल जीते थे। तब भारत  कुल मिलाकर 41 मेडल जीतकर दूसरे स्थान पर रहा था। जापान 24 गोल्ड समेत 60 मेडल जीतकर पहले स्थान पर था। पहले एशियाई  खेलों  मेँ  11 देशों    के 189 खिलाडियों ने हिस्सा लिया था। चीन ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था। पाकिस्तान ने भी कश्मीर  विवाद की आड लेकर पहली एशियाई  खेलों में हिस्सा नहीं लिया था।  67 साल में बहुत कुछ बदल चुका है। भारत आज दुनिया में चीन से भी तेजी से आगे बढती अर्थव्यवस्था है मगर खेलों में अभी भी भारत की रफ्तार बहुत धीमी है। जकार्ता में आयोजित 18वीं एशियाई  खेलों  में 45  देशों  के 10 हजार से भी ज्यादा खिलाडियों ने हिस्सा लिया। 15 दिन तक चली गेम्स में 40 खेलों के 465 इवेंट हुए  और कुल मिलाकर 465 गोल्ड समेत 1,552 मेडल दांव पर थे। 132 गोल्ड समेत 289 मेडल जीतकर चीन पहले स्थान पर रहा है हालांकि पिछले 16 साल का  यह इसका सबसे खराब  प्रदर्शन  है।  75 गोल्ड के साथ 205 मेडल लेकर जापान दूसरे और 49 गोल्ड समेत 177 मेडल लेकर दक्षिण कोरिया तीसरे स्थान पर है। भारत आठवें स्थान पर रहा है। मेजबान इंडोनेशिया, उजेबकिस्तान और  ईरान भी भारत से आगे है। एशिया में भारत, चीन और  जापान के बाद तीसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था है और आबादी के लिहाज से  भारत जापान से कहीॅ विशाल है। हर मामले में भारत की बराबरी चीन अथवा जापान से होती है़। फिर भारत खेलों में चीन और जापान तो क्या दक्षिण कोरिया से भी  पिछडा हुआ है़? जकार्ता एशियाई  खेलों में भारत ने कुल गोल्ड मेडल्स का 3.22 फीसदी मेडल जीतकर कौनसा किला फतेह कर लिया ? भारत का इससे कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन  1951 की एशियाई खेलों में रहा था। उस समय भारत ने कुल 57 गोल्ड मेडल मेंसे 15 (26.31 फीसदी) सोने के तमगे जीते थे। इस बार कबड्डी तक में भी भारत गोल्ड मेडल नहीं जीत पाया। इसके अलावा हाकी, तीरंदाजी (अर्चरी) और स्क्वैश  में भी भारत को गोल्ड मेडल से वंचित रहना पडा हालांकि 2014 में दक्षिण कोरिया के इंचियोन में हुई एशियाई खेलों में भारत ने इन खेलों में गोल्ड मेडल जीते थे। लगता है हाकी की तरह अब भारत को आगे भी कबड्डी में ईरान से कडी चुनौती मिलने जा रही है। मेडल के लिहाज से भारत  इंचियोन में आठवें स्थान पर था और जकार्ता में भी। यानी भारत वहीं खडा है और पहली एशियाई  खेलों के मुकाबले भारत का ग्राफ नीचे गिरा है। खेलों में बाकी देश  जब आगे बढ रहे हों, भारत जैसे विशाल देश  का ग्राफ गिरना निराशाजनक है। सवा सौ करोड से भी ज्यादा का आबादी वाला भारत खेलों में अगर अपने से कहीं छोट-छोटे देशों  से पिछड जाए, यह बात शर्मनाक लगती है। बार-बार यह सवाल सामने आता है कि भारत खेलों में भी उसी तरह का बेहतर  प्रदर्शन  क्यों नहीं कर पा रहा है जैसे देश का जलवा अंतरिक्ष विज्ञान में है? किसान, औधोगिक श्रमिक, व्यवसायी, कारोबारी, जवान सब मिलकर देश  की अर्थव्यवस्था को बुलंदियों पर पहुंचा रहे हैं, तो भारतीय खिलाडी ऐसा क्यों नहीं कर सकते़? निसंदेह, वे इससे भी बेहतर कर सकते हैं अगर देश  के सियासी नेता खेल संगठनों और चयन प्रकिया में दखल देना छोड दें। जब तक देश  के खेल संगठन सियासी दखल से मुक्त नहीं होंगे, भारत में खिलाडियों का जलव कायम नहीं हो पाएगा।