शनिवार को इंडियन पोस्ट पेमेंटस् बैंक (आईपीपीबी) के लांच होते ही गांव-गांव, घर-घर बैंकिंग सुविधाएं सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस बैंक के खुलने से देश श त प्रतिशत वित्तीय समावेशन (फाइनेशियल इन्क्लुजन) का लक्ष्य हासिल कर सकता है। देश के हर व्यक्ति, खासकर कमजोर तबकों को त्वरित वित्तीय सुविधाएं मुहैया कराना ही वित्तीय समावेशन कहलाता है। आईपीपीबी देश के उन क्षेत्रों को तवज्जो देगा, जहां अभी बैंक की शाखाएं नहीं हैं। 30 जनवरी, 2017 को पोस्ट पेमेंटस् बैंक बतौर पायलट प्रोजेक्ट लांच किया गया था। शुरु में झारखंड की राजधानी रांची और छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर में आईपीपीबी की दो शाखाएं खोली गईं थी। इस साल 31 दिसंबर तक 650 शाखाओं और 3250 एक्सेस प्वाइंट के माध्यम से पोस्ट पेमेंटस बैंक सभी 1.55 लाख डाक घरों से जुड जाएगा और सभी 17 करोड डाक बचत खाते आईपीपीबी से जोड लिए जाएंगे। इस बैंक में साल में एक लाख से ज्यादा की राशि जमा नहीं की जा सकेगी। बचत पर चार फीसदी ब्याज मिलेगा। बैंक के खाताधारकों को मनी ट्रांसफर, बिल पेमेंट, खरीदारी की पेमेंट, बच्चों की फीस जैसी बचत और चालू खाते की सारी सुविधाएं मिलेंगी। पोस्टल विभाग के तीन लाख डाकिए और डाक सेवक मोबाइल और बायोमीट्रिक उपकरण की मदद से लोगों को घर द्वार बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराएंगें। आईपीपीबी खुद तो कर्ज देने के लिए अधिकृत नहीं है मगर यह अन्य वित्तीय संस्थाओं के उत्पाद और वित्तीय सेवाएं मुहैया करा सकता है। कर्ज देने के लिए आईपीपीबी पंजाब नेशनल बैंक के एजेंट बतौर काम करेगा। बैंकिंग सेवाओं को तेजी से विस्तार होने के बावजूद दूर-दराज क्षेत्रों में अभी भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं है। देष की 19 फीसदी आबादी अभी भी बैंकिंग सुविधाओं से महरुम है। आरबीआई के दिषा निर्देषों के अनुसार 25 फीसदी नई बैंक शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में खोली जानी चाहिए। फाइनेशियल इन्क्लूजन का लक्ष्य हासिल करने के लिए इसे अनिवार्य माना गया है। मगर ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकतर शाखाएं घाटे में रहने के कारण बैंक आगे नहीं आ रहे हैं। हरियाणा की मिसाल ली जाए। सितंबर, 2017 की बैंकर्स समिति रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 194 छोटी (ब्रिक एंड मोर्टार) शाखाएं खोलना का लक्ष्य रखा था मगर मात्र 44 ही खुल पाईं। सरकारी पंजाब नेशनल बैंक को 5000 से ज्यादा आबादी वाले देहातों में 47 शाखाएं खोलनी थी मगर सितंबर, 2017 तक मात्र 9 ही खुल पाईं। इस मामले में अन्य बैंकों की स्थिति और भी खराब है। कई सरकारी बैंक तो एक भी शाखा नहीं खोल पाए। वैसे दुनिया में सबसे ज्यादा बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार भी भारत में हुआ है। अतरराश्ट्रीय मुद्रा कोश (आईएमएफ) की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में भारत में सबसे ज्यादा 1.2 लाख बैंक की शाखाएं थीं। चीन में 95, 680 और कोलंबिया में 94, 074 शाखाएं थीं। भारत के 34 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की शाखाएं है। यह संख्या श हरी क्षेत्रों की 38 फीसदी से कुछ ही कम है। बाकी 28 फीसदी षाखाएं अर्ध-षहरी क्षेत्रों अथवा कस्बों में है। मगर आबादी के लिहाज से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिग एसेसिबिलिटी काफी कम है। भारत में प्रति लाख वयस्क के लिए करीब 13.54 बैंक शाखाएं है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो और भी कम प्रति लाख वयस्क मात्र सात बैंक षाखाएं है। भारत से ज्यादा तो श्रीलंका में 18.58 प्रति लाख वयस्क (एडल्ट) बैंक षाखाएं हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा कोलंबिया में प्रति लाख वयस्क (एडल्ट) 257.69 षाखाएं हैं। इस मामले चीन और पाकिस्तान भारत से पीछे है। मोदी सरकार ने जमीनी हकीकत को भांपते हुए ही इंडियन पोस्ट पेमेंटस् बैंक की षुरुआत की है। इस बैंक का संचालन और प्रबंधन सरकार के अधीन है, इसलिए इस प्रकल्प में नफे-नुकसान का सवाल ही नहीं है। देष को अगर ग्रोथ को और तेज करना है, तो हर दूर-दराज गांव को वित्तीय सुविधाएं मुहैया करानी होगी। पोस्ट पेमेंटस् बैंक इस लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है।
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