शनिवार, 1 सितंबर 2018

नारे, लफ्फाजी से अच्छे दिन नहीं आते !

अगर “लफ्फाजी“  और नारे लगाने से  सुशासन और “अच्छे दिन लाए जा सकते, तो भारतीय जनता पार्टी कबका ऐसा कर चुकी होती। याद करें एक जमाने में “ चाल, चरित्र और् चेहरा“ भाजपा का खालिस देसी स्लोगन हुआ करता था और भाजपाई इस पर खूब इतराते थे।  कांग्रेस के दागी नेताओं पर हमला करने के लिए इसका खुलकर उपयोग किया जाता था। सत्ता में आते ही  यह काफूर हो गया। पिछले लोकसभा चुनाव में “ अच्छे दिन आएंगें“ से भाजपा ने लोगों को लुभाया और चुनाव भी जीत लिया। केन्द्र में सत्तारूढ होने पर मोदी सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास“ का सहारा लिया और अब इससे मन भर गया है तो  2019 लोकसभा चुनाव के लिए     “साफ नीयत, सही विकास“ नारा बुलंद किया गया है। हर चुनाव के लिए नए, नए नारे गढने में भाजपा को महारत हासिल है। पर सच्चाई यह है कि नारे लगाकर जनता को बेवकूफ तो बनाया जा सकता है मगर “अच्छे दिन“ नहीं लाए जा सकते। संप्रग सरकार के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह को “निक्कमा“ साबित करने में भाजपा ने कोई कसर नहीं छोडी। लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री विकास की जरुरतों और अर्थव्यवस्था के फंडामेंटलस को  बखूबी समझते थे। इसलिए घोटालों के बावजूद संप्रग सरकार के पहले कार्यकाल में औसतन जीडीपी  ग्रोथ दर 8.3 फीसदी और संप्रग-दो में 7.68 फीसदी रही है। मोदी सरकार के में यह औसतन 7.33 फीसदी रही है। निसंदेह, अगर नोटबंदी नहीं होती तो भारत की ग्रोथ दर मोदी सरकार के कार्यकाल में भी आठ फीसदी से ज्यादा रहती। इस साल जून तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी की ग्रोथ दर 8.2 फीसदी रही है। विभिन्न अध्ययनों का  निष्कर्ष  है कि मोदी सरकार में विकास की दर और तेज हो सकती थी अगर देश  का समय ऊल-जलूल मुद्दो पर बर्बाद नहीं होता। देश  के समक्ष आज कुछ ऐसी जटिल समस्याएं मुंह फाडे खडी हैं जिनका अविलंब निदान जरुरी है। संप्रग सरकार और मोदी सरकार की कार्यशैली में कोई बहुत बडा फर्क नही है। घोटालों ने अगर संप्रग सरकार को जकड कर रखा तो, असहिष्णुता  और नफरत के माहौल ने मोदी सरकार को पगु बनाकर रखा है। कोई भी देश  ऐसे माहौल में तरक्की नहीं कर सकता।  भ्रष्टाचार   और लालफीताशाही को खत्म करना मोदी सरकार की उच्च प्राथमिकता थी। न तो लालफीताशाही कम हुई और न ही भ्रष्टाचार घटा। सुप्रीम कोर्ट  ने शुक्रवार को केन्द्रीय कर्मचारियों की भर्ती (एसएससी-2017) पर रोक लगाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि पूरी व्यवस्था ही  भ्रष्ट है ।