रविवार, 5 अगस्त 2018

इमरान खान की क्रिकेट डिप्लोमेसी

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने जा रहे क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान द्वारा भारतीय क्रिकेट खिलाडियों को शपथ समारोह में आमंत्रित करना कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा है। इस न्योते से उन्हें इस कद्र मिर्ची लगी हुई है कि शपथ समारोह में  शामिल होने की संभावना मात्र से उन्हें  “ देशद्रोही और गद्दार“ तक कहा जा रहा है। इमरान खान ने भारत में क्रिकेटर से सियासी नेता बने पंजाब के स्थानीय निकाय एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री नवजोत सिह सिद्धू, सुनील गावस्कर और कपिल देव के अलावा बालीवुड अभिनेता आमिर खान को भी  शपथ समारोह में आमंत्रित किया है। इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ ने पहले कहा था कि  शपथ समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी न्योता भेजा जाएगा मगर बाद में पार्टी पलट गई। 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री शपथ समारोह में पाकिस्तान के तत्काल  प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत सभी सार्क हेड्स  को आंमत्रित किया गया था। बतौर  क्रिकेटर इमरान खान भारत में काफी लोकप्रिय रहे हैं। अस्सी और नब्बे के दशक में इमरान खान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ  हरफनमौला खिलाडियों में  शुमार थे।  महान क्रिकेटर रिचर्ड  हैडली ने इमरान खान, कपिल देव और इयान बोथम (इंग्लैंड) को क्रिकेट जगत का  सर्वश्रेष्ठ  आल-राउंडर बताया है। ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय  ख्यातिप्राप्त ऑक्सफोर्ड  यूनिवर्सिटी मे पढे इमरान खान को उदारवादी नेता माना जाता है।  अपनी बेबाक राय के लिए भी जाने जाते हैं। कहते हैं खेल भावना बडे-से-बडे प्रतिद्धद्धियों को भी गले मिलने के लिए प्रेरित करती है। अक्सर  जब साधारण कूटनीति काम न करे, क्रिकेट डिप्लोमेसी कारगर सिद्ध हो जाती  है। नवजोत सिद्धू, कपिल देव और सुनील गावस्कर इमरान खान के अंतंरंग मित्रमंडली में  शुमार है। उन्हें शपथ समारोह में आमंत्रित करके पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री ने कूतनीति में खेल भावनाका मिश्रण किया है । सियासी नेताओ में वैचारिक मतभेद होते हैं और वे हर कदम का राजनीतिक चश्मे  से आकलन करते हैं मगर बैट-बॉल से कमाल करने वाले क्रिकेटरों में सरहद, ऊंच-नीच और रंग-भेद की कोई दीवार नहीं होती। दरअसल, विभाजन के बाद से विगत सात दशकों में भारत और पाकिस्तान के सियासी नेताओं के बीच अविश्वास की  इतनी बडी दीवार खडी हो चुकी है कि लाख चाहने पर इसे सरलता से तोडा नहीं जा सकता है। 1996 में राजनीति में आने के बाद लंदन के नाइट क्लबों के चेहते इमरान खान मे खासा बदलाव आया है। वे उदारवादी से कटटरपंथी और चरमपंथियों के हिमायती बन गए। पाकिस्तान के सियासत की यही सबसे बडी समस्या है।  तालिबान के प्रति उनका साफ्ट कॉर्नर और सेना और आईएसआई का उनको खुला समर्थन भारत में  उनकी उदार छवि को खंडित कर रहा है। इमरान खान ने 2002 में सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वे तालिबान की न्याय व्यवस्था से बेहद प्रभावित हैं और अगर कभी सत्ता में आए तो इसे लागू करने का हरसंभव प्रयास करेंगे। इमरान खान तहरीके तालिबान से संवाद के पक्षधर हैं और इस आतंकी संगठन को पाकिस्तान में कार्यालय खोलने की पैरवी भी करते रहे हैं। भारत के साथ संबंधों को लेकर हालांकि उनका स्टैंड पहले से अलग नहीं है मगर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ  भी मानते हैं कि उनके कार्यकाल में सुखद  शुरुआत हो सकती है। भारत और पाकिस्तान के बीच रिष्ते सुधारने के लिए इमरान खान व्यापारिक संबंध बढाने के पक्ष में है। अपने पहले साक्षात्कार में इमरान ने कहा था “ हमारे बीच जितना ज्यादा व्यापार होगा, दोनों देशों  को उतना ही फायदा होगा“। केन्द्र सरकार की अनुमति के बगैर तीनों क्रिकेटर्स और अभिनेता आमिर खान का शपथ समारोह में  शामिल होना मुमकिन नहीं है। भारत के इन प्रतिनिधियों के शपथ समारोह में खुशी -खुशी  शामिल होने से  रिश्तों  में गर्माहट आ सकती है। पडोसियों में तनावपूर्ण  संबंध किसी के हित में नहीं होते हैं। संबंधों पर लंबे समय से पडी बर्फ  को पिघलाने का यह अच्छा अवसर है।