दुनिया में सबसे तेज ग्रो कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को डिजिटाइजेशन और तीव्र रफ्तार दे सकता है। डेटा प्रोसेसिंग, स्टोरेज एवं ट्रांसमिशन इस अत्याधुनिक प्रकिया के महत्वपूर्ण आयाम हैं। इसी मकसद को सामने रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पदभार संभालते ही डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और स्किल इंडिया को लांच करके देश को डिजिटाइजेशन की ओर अग्रसर किया है। विभिन्न अध्ययन इस बात के गवाह हैं कि डिजिटल इंडिया से न केवल आर्थिक सशक्तिकरण तेज हुआ है, अलबत्ता इससे रोजगार के नए अवसरों के द्धार भी खुले हैं। शनिवार को जीएसटी काउंसिल ने रूपे कार्ड, भीम ऐप और यूएसएसडी (अनस्ट्रक्चरड सप्लीमेंट्री डेटा) से भुगतान पर टैक्स में 20 फीसदी छूट (अधिकतम कैशबैक 100 रु) देने का फैसला लेकर डिजिटल इंडिया का मार्ग प्रशस्त किया है। यह छूट कब से लागू होगी, इस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है मगर इतना तय है कि इस पायलट योजना को लागू करने में कुछ समय लग सकता है। इसे लागू करने के लिए साफ्टवेयर तैयार करना पडेगा। नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन और जीएसटी नेटवर्क इस साफ्टवेयर को तैयार करेगा। इस योजना को केवल उन राज्यों में शुरू किया जाएगा, जो इसे स्वेच्छा से लागू करना चाहते हैं। लागू होने पर इस योजना से सरकार को 1000 करोड रु के राजस्व से हाथ धोना पडेगा। पंजाब, दिल्ली, केरल और पश्चिम बंगाल ने क्योंकि इस योजना का विरोध किया है, लिहाजा इन राज्यों में इस योजना के लागू होने की संभावना नहीं है। इन चारों राज्यों में गैर-भाजपा सरकार है। स्पष्ट है डिजिटल इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजना को भी राजनीति के तराजू मे तोला जा रहा है। डिजिटल इंडिया के तहत पिछले चार साल में डिजिटल पेमेंट को खासा प्रोत्साहन मिला है। जन-धन योजना ,आधार और जीएसटी के लागू होने से भारत डिजिटाइजेशन की ओर तेजी से बढा है। मोदी सरकार के चार साल में 2,74,246 किमी लंबी ऑप्टिक फाइबर बिछाकर 1.15 लाख पंचायतों को भारतनेट से जोडा गया है। संप्रग सरकार में मात्र 358 किमी लंबी ऑप्टिक फाइबर बिछाई जा सकी थी। देश की 120 करोड आबादी को आधार से जोडा जा चुका है। 121 करोड लोग मोबाइल से जुडे हैं और 30 करोड लोग जन-धन के तहत लाए जा चुके है़। इन सब प्रयासों ने डिजिटल इंडिया को खासा आगे बढाया है। 49 करोड लोग रूपे कार्ड और 2.26 करोड भीम ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी देश में डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों की संख्या 50 करोड को पार कर गई है। एक साल पहले कार्डधारकों की संख्या 19.5 करोड थी। भीम ऐप के तहत जहां 2017 में 5,325 करोड का लेनदेन होता था, 2018 में यह बढकर 24,172 करोड हो गया है। रूपे कार्ड का लेनदेन 2016-17 के मुकाबले 2017-2018 में 135 फीसदी बढा है। डिजिटाइजेशन से न केवल लोगों को लेन-देन में सुविधा होती है, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार मिलता है। देश के कोने-कोने में वित्तीय पहुंच सुनिशिचित होती है। त्वरित डाटा मुहैया होने से लेनदेन सुगम होता है। गोलमाल और अनियमितताएं की संभावना क्षीण हो जाती हैं। लोगों को आसानी से कर्ज मुहैया हो सकता है। रोजगार के अवसर सृजित होते हैं और मांग बढ जाती है। क्रेडिट डिलीवर और तेज और समयबद्ध हो जाती है। सबसे ज्यादा फायदा लघु और मझौले उधोगों को होता है। अब तक का अनुभव बताता है कि डाटा के अभाव में इन उधोगों को पर्याप्त और समय पर कर्जा नहीं मिलता है जिससे इनकी ग्रोथ रुक जाती है। डिजिटाइजेश न से ऐसा नहीं होगा और वित्तीय संस्थाओं को विश्वसनीय जानकारी मिलने से लघु और मझौले उधोगों जरुरत पडने पर कर्ज मिल जाएगा। ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। डिजिटाइजेशन से तो देश को फायदे ही फायदे हैं। फिर इसका विरोध क्यों?
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