गुरुवार, 2 अगस्त 2018

बंद हो चरित्र हनन की राजनीति

दोहरा चरित्र, आचरण और चरित्र हनन देश  के समकालीन सितासतदानों की सबसे बडी पूंजी है। अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए वे किसी को भी  बलि  का बकरा बनाने में जरा भी नहीं संकोच नहीं करते हैं।  उधोगपतियों और व्यापारियों से चुपके.चुपके मिलेंगे, उनसे पार्टी और चुनाव के लिए फंड लेंगेए पर सार्वजनिक जीवन में उनसे दूरी बनाने का आडंबर करेंगे।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सियासी नेताओं के इस दोहरे आचरण और चरित्र हनन की सियासत को आडे हाथ लिया। उत्तर प्रदेश  की राजधानी लखनऊ में निवेशकों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने उधोगपतियों से अपने संबंधों पर कहा कि  कुछ नेताओं की तरह परदे के पीछे मिलने की बजाए वे उनसे खुलेआम मिलना पसंद करते हैं।  प्रधानमंत्री इस सच्चाई के लिए काबिलेतारीफ भी हैं।  निसंदेह, अगर नीयत साफ हो, तो किसी से मिलने में संकोच कैसा? आखिर उधोगपति भी देश  के ही नागरिक हैं और प्रगति और खुशाहली का अहम हिस्सा हैं। जिस तरह किसान और् कामगार की मेहनत देश  का निर्माण करती है, उसी तरह उधोगपति भी विकास में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। उधोग स्थापित करके लोगों को रोजगार मुहैया कराते हैं, संबंधित क्षेत्र को खुशाहल बनाते हैं और  अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री ने  महात्मा गांधी और तत्कालीन अग्रणी उधोगपति जीडी बिरला के आत्मीय संबंधों का जिक्र भी किया। अगर नीयत साफ हो और इरादे नेक हों, तो किसी के साथ खडे होने में कोई संकोच नहीं होता है।  महात्मा गांधी की नीयत साफ थी और उनके इरादे इतने पवित्र थे कि उन्हें बिडला परिवार के साथ रहने और खडे होने में कभी कोई संकोच नहीं हुआ। विपक्षी दलों ने तो प्रधानमंत्री के इन शब्दों का भी और ही मतलब निकाल लिया है और अब कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी स्वंय की महात्मा गांधी से तुलना कर रहे हैं। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे श्जालसाजश् कारोबारियों की तुलना बिरला जैसे षीर्श  उधोगपति से नहीं की जा सकती। नीरव मोदी और मेहुल चीकसी जैसे विवादित कारोबारियों से संबंधों को लेकर विपक्ष प्रधानमंत्री पर हमला बोलता रहा है और कांग्रेस  इसमें सबसे आगे है। इस साल जनवरी में आयोजित दावोस आर्थिक सम्मेलन में पीएनबी स्कैम के आरोपी नीरव मोदी की उपस्थिति की तस्वीर वायरल हुई थी। इसी तरह एक वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी  मेहुल चौकसी को श्मेहुल भाईश् संबोधित करते हुए दिखाए गए थे। इस पर विपक्षी दलों को प्रधानमंत्री पर हमला करने का मौका मिल गया। तो क्या किसी दागी व्यक्ति के साथ खडा होने से देष का प्रधानमंत्री भी दागी मान लिया जाएगाघ् सियासी दलों की यह मानसिकता ईमानदार और राश्ट्रवादी उधोगपतियों को भी श् चोर.लुटेरोंश् की श्रेणी में खडा कर रही है। भला यह भी कोई बात हुई कि दो.एक कारोबारी अगर बैंकों के साथ धोखाधडी करेंए तो पूरे उधोग और व्यापार जगत को श्चोर.लुटेराश् करार दे दिया जाए। तो क्या दो.एक नेताओं के सजायाफ्ता होने से सभी सियासतदान दागी मान ली जाएं़घ् इस तरह के  मानदंड से देष में न तो सियासतदान और न ही उधोगपति.कारोबारी चरित्र हनन से बच पाएंगे। बगैर साक्ष्य और सबूत के किसी का भी चरित्र हनन नहीं किया जा सकता। और अगर कोई ऐसा करता हैए तो उसका हश्र भी आप मुखिया अरविंद केजरीवाल जैसा हो सकता है। बगैर सबूतों के आरोप लगाने पर केजरीवाल को वित्त मंत्री अरुण जेटली और पंजाब के अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से कोर्ट  में माफी मांगनी पडी है। काग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी जब.तब विवादित वक्तव्य देते रहे हैं। अविष्वास प्रस्ताव पर चर्चा  के दौरान उन्होंने राफेल सौदे पर फ्रांस के राश्ट्रपति तक को उदृत किया था मगर फ्रांस ने तत्काल इसका खंडन कर दिया।  सियासी दलो के लिए भी सार्वजनिक वक्तव्यों के लिए आचार संहिता होनी चाहिए। चरित्रहनन का यह अंतहीन सिलसिला बंद होना चाहिए। राजनीति ठोस मुद्दों और जन समस्याओं पर केन्द्रित रहे इसी में देष की भलाई है।