भारत में उन्मादी भीड द्वारा किसी की जान लेने की घटना की आग अभी ठंडी भी नहीं हो पाती है कि दूसरी घटना के सामने आने से फिर माहौल गरमा जाता है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को राजस्थान के अलवर जिले में उन्मादी भीड ने गो रक्षा के नाम पर एक व्यक्ति को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। पीडित अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित था। पुलिस ने उसे अस्पताल ले जाने में भारी कोताही बरती और जब तीन घंटे बाद उसे अस्पताल पहुंचा गया, तब तक उसने दम तोड दिया था। इससे पहल नंवबर 2017 में भी अलवर जिले में ही उन्मादी भीड ने पशु तस्करी केे संदेह में दो व्यक्तियों पर फायरिंग करके एक को मारा डाला और दूसरे की गंभीर रुप से घायल कर दिया था। बुधवार को उत्तर प्रदेश के हाथरस में उन्मादी भीड ने मृत भैंस को ले जा रहे चार व्यक्तियों पर हमला बोल दिया। आरोप था कि आरोपियों ने भैंस को जहर देकर मार डाला। आरोपियों में दो हिंदू और दो मुसलमान थे। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उन्मादी भीड से चारों को बचा लिया। उत्तर प्रदेश श में भी भाजपा की सरकार है और राजस्थान में भी। लिंचिंग की ज्यादातर घटनाएं भाजपा षासित राज्यों में हो रही है। 2015 में हिमाचल प्रदेश की एक लिचिंग घटना को छोडकर बाकी सभी लिंचिंग भाजपा शासित राज्यों में हुई है। 2015 में हिमाचल में कांग्रेस सरकार थी। 2014 में मोदी सरकार के केन्द्र में सत्तारूढ होने के बाद से मॉब लिंचिंग के 63 हमले हो चुके हैं और सबसे ज्यादा 11 हमले 2017 में किए गए। अकेले भाजपा शासित झारखंड में 12 मई से 18 मई के बीच चार हमलों में उन्मादी भीड ने 9 लोगों को मार डाला। लिंचिंग की इन घटनाओं में मुस्लिम समुदाय के अलावा हिंदु दलितों को भी निशाना बनाया गया है। जुलाई, 2016 में गुजरात के उना तालुका में छह गो रक्षकों ने चार दलितों को कार में बांध कर नंगा किया और उनकी बुरी तरह से पीटा था। विदेशी मीडिया लिंचिंग की इन घटनाओं को खूब उछाल रहा है। एक अखबार ने तो यहां तक लिखा है कि उत्तर भारत में गो-रक्षक गाय को बचाने के लिए अक्सर सडकों पर घूमते रहते हैं और उन्होंने खबरियों का नेटवर्क भी बना रखा है। दिल्ली में ही 200 से ज्यादा गो-रक्षक समूह काम कर रहे हैं। अमेरिका का मशहूर समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्स भाजपा को लिंचिंग की बढती घटनाओं के लिए दोषी मानता है। विदेशी मीडिया का यह भी आरोप है कि गो-रक्षक गोमाता को बचाने के नाम पर चांदी कूट रहे है और तस्करों से मोटा पैसा ऐंठ रहे हैं। एक अंग्रेजी समाचार पत्र की खोजी खबर में बताया गया था कि पंजाब में गो-रक्षक तस्करों से प्रति पशु 200 रु लेकर उन्हें जाने देते है। विद्धानों का मत है कि गो-रक्षा भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे का एक अहम हिस्सा है। इसी वजह प्रधानमंत्री लिंचिंग की तो भर्त्सना करते हैं मगर मुस्लिम समुदाय के प्रति संवेदनाओं का एक शब्द भी नहीं बोलते हैं। इतना ही नहीं भाजपा के नेताओं में लिंचिग के अभियुक्तों को सम्मानित करने की होड लगी हुई हैं। यही कारण है कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट की कडी भर्त्सना और निर्देशों के बावजूद लिंचिंग की घटनाएं कम नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट की सलाह के बाद केन्द्र ने इसी सप्ताह लिंचिंग पर अलग कानून बनाने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी और मंत्रिमंडलीय उप- समिति गठित की है। मगर सबसे बडा सवाल यह है कि क्या कानून उन्मादी भीड को रोक पाएगा ? विद्धानों का मत है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) का विशुद्ध हिंदुत्व सोसायटी का दर्शन भी गो-रक्षकों को बल प्रदान करता है। इस दर्शन में समाज को सरकार से सुप्रीम माना गया है और सामाजिक मसलों को सामाजिक स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए। बहरहाल, सभ्य और सुसंस्कृति समाज में कानून सबसे बडा होता है।
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