जीएसटी (गुडस और सर्विसिस) काउंसिल ने एक बार फिर आम लोगों को बडी राहत दी है। शनिवार को कांउसिल की बैठक में 88 वस्तुओं पर जीएसटी कम कर दिया गया या हटा दिया। अब तक तीन बार जीएसटी रेट घटाए जा चुके हैं। 10 नवंबर, 2017 को 211 वस्तुओं पर से जीएसटी कम किया था और इन मेंसे 177 वस्तुओं को 28 फीसदी से 18 फीसदी टैक्स स्लैब में लाया गया था। इस साल 18 जनवरी को 29 वस्तुओं पर जीएसटी कम कर दिया गया था। ताजा राहत से अब तक 328 वस्तुओं और सेवाओं पर से जीएसटी कम किया जा चुका है। शनिवार को सैनिटरी पैड और राखी को जीएसटी से पूरी तरह से मुक्त कर दिया गया है। सैनिटरी पैड पर अभी 12 फीसदी जीएसटी लगाया जाता है। महिलाएं इसका मुखर विरोध कर रही थी। सैनिटरी पैड पर जीएसटी के विरोध में जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की एक छात्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि अगर काजल, बिंदी, सिंदूर और कंडोम जैसी चीजों को जीएसटी से मुक्त रखा ज सकता है, तो सैनिटरी पैड को क्यों नहीं? इस याचिका पर पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 31 सदस्यीय जीएसटी काउंसिल में एक भी महिला के नहीं होने पर हैरानी जताई थी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड जैसी जरुरी वस्तु पर जीएसटी लगाने का कोई औचित्य नहीं है। सैनिटरी पैड पर जीएसटी को लेकर बंबई हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। केन्द्र सरकार की अपील पर मामला दिल्ली हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया था और कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया था। महिलाओं से जुडे संगठनों का तर्क है कि सैनिटरी पैड महिलाओं के लिए जीवनरक्षक दवा की तरह है। शहरों में 78 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 48.5 फीसदी महिलाओं सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं.। बहरहाल, भारत में चार दरों के कारण जीएसटी आम आदमी के पल्ले नहीं पड रहा है। एक हजार से भी ज्यादा वस्तुएं और सेवाएं हैं और किस वस्तु पर कितना जीएसटी है, इसे याद रखना आम तो क्या खास के बूते की बात नहीं है। चार-चार दरों की स्थिति में ंउपभोक्ताओं को आसानी से चूना लगाया जा सकता है। प्रॉफिट मार्जिन और प्राइस लिस्ट डिसप्ले का मामला ही लिया जाए। नियमानुसार, किस वस्तु अथवा सेवा पर कितना अधिक्तम प्रॉफिट लिया जान चाहिए, इसकी बाकायदा सीमा तय है। मगर व्यापारी इस नियम के बावजूद मनमाना प्रॉफिट वसूलते हैं। परचून और फल-सब्जियों की दुकानों पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य है मगर इसका भी संजीदगी से पालन नहीं किया जाता। खरीदारी के अधिकतर मामलों में बिल लिया या दिया ही नहीं जाता। इस स्थिति में कितना जीएसटी वसूला जा रहा है, इसका अनुमान लगाना भी मुमकिन नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी सिंगापुर की ही तरह जीएसटी की एक दर के पक्ष में है मगर सरकार यह कहकर इस मांग को खारिज करती रही है कि भारत की स्थिति सिंगापुर जैसी नहीं है जहां लोगों की पेइंग क्षमता में ज्यादा अंतर नहीं है मगर भारत में बहुत बडा अंतर है। सरकार के अपने ही स्टैंड में अकसर विरोधाभास होता है। सैनिटरी पैड को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने पर सरकार का तर्क था कि इससे छोटी कंपनियों पर बुरा असर पडेगा और बाजाार चीनी उत्पादों से भर जाएगा। बहरहाल, आए दिन जीएसटी रेट घटाने से अच्छा है कि एक या दो दरें लगाईं जाएं और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
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