पैसे का लालच सगे-से-सगे रिष्ते में भी दरार डाल देता है। पैसे क¢ लिए भाई-भाई एक-दूसरे क¢ खून क¢ प्यासे ह¨ जाते हैं, इसक¢ सामने द¨स्ती क्या चीज है? अ©र अब इसी पैसे क¨ लेकर भारत अ©र अमेरिका में साल¨ं पुराने संबंध¨ं में दरार पड गई है। अमेरिकी राश्ट्रपति ड¨नाल्ड ट्रंप द्वारा इस्पात अ©र एल्यूमिनियम पर टैरिफ बढाने से क्षुब्ध भारत ने पलटकर बादाम, अखर¨ट अ©र दाल¨ं समेत 29 अमेरिकी उत्पाद¨ं पर सीमा षुल्क (कस्टम ड्यूटी) बढा दी है। इससे अमेरिका क¨ 23.5 कर¨ड डालर का नुकसान ह¨गा। अमेरिका द्वारा इस्पात अ©र एल्यूमिनियम पर टैरिफ बढाने से भारत क¨ 29. 24 कर¨ड डाॅलर का अतिरिक्त ब¨झ उठाना पडेगा। पिछले कुछ साल¨ं में भारत अ©र अमेरिका क¢ बीच कार¨बार निरंतर बढता जा रहा है। 2014 में भारत अ©र अमेरिका क¢ बीच 104 अरब डाॅलर का व्यापार हुआ था। 2016 में यह बढ्कर 114 अरब डाॅलर पहुंच गया था। प्रधान मंत्री की अमेरिका यात्रा क¢ समय इस कार¨बार क¨ 500 अरब डाॅलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। ्इस साल जनवरी-अप्रैल क¢ द©रान भारत ने अमेरिका क¨ 309.18 मिलियन डाॅलर क¢ इस्पात अ©र इसक¢ उत्पाद निर्यात किए थे। अमेरिका क¢ कुल इस्पात आयात में भारत का मात्र द¨ फीसदी हिस्सा है। एभ्ल्यूमिनियम का निर्यात त¨ इससे भी कम है। म¨दी सरकार ने पिछले माह अमेरिका से भारत से निर्यात किए जाने वाले इस्पात, एल्यूमिनियम क¨ टैरिफ बढ¨तरी से बाहर रखने का आग्रह किया था, मगर ट्रंप नहीं माने। नतीजतन, भारत क¨ भी पलटवार करना पडा। टैरिफ बढने से हालाकि न त¨ अमेरिका अ©र न ही भारत क¨ बहुत ज्यादा असर पडेगा, मगर ट्रंप क¢ इस कदम से रिष्त¨ं में जरुर खटास आई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने हाल ही में मजबूती क¢ संक¢त दिए हैं। इससे राश्ट्रपति ट्रंप का गरुर सातवें आसमान पर है। अमेरिका में अमेरिकिय¨ं क¢ लिए अ©र ज्यादा र¨जगार क¢ अवसर जुटाने क¢ लिए ट्रंप अंतरराश्ट्रीय कंपनिय¨ं क¨ अमेरिका में फ¢क्टरी उत्पादन क¢ लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। इसीलिए, वे कभी चीन से उलझ जाते है, कभी यूर¨पियन यूनियन त¨ कभी कनाडा अ©र मैक्सिक¨, रुस या भ्ंाारत से। अमेरिका क¨ महान बनाने क¢ बहाने ट्रंप पेरिस जलवायु संधि क¨ मानने से मुकर गए, नाफ्टा व्यापार समझ¨ते क¨ निरस्त करने पर आमादा हैं अ©र जी-20 से लेकर जी-7 की बैठ्क¨ं में अपनी “दादागिरी“ दिखाते फिरते हैं। नाफ्टा व्यापार समझ©ता दुनिया की सबसे बडी कार¨बारी डील है। अमेरिका-कनाडा सीमा से हर र¨ज द¨ अरब डाॅलर से अधिक कार¨बार की आवाजाही ह¨ती है। इस कार¨बार से अमेरिका अ©र कनाडा द¨न¨ं क¨ फायदा ह¨ रहा है मगर राश्ट्रपति ट्रंप क¨ लगता है इससे कनाडा ज्यादा कमा रहा है। इसी बात क¢ दृश्टिगत अमेरिकी राश्ट्रपति नाफ्टा में जबरदस्त म¨ल-त¨ल कर रहे हें। ट्रंप मूलतः कार¨बारी है अ©र कार¨बारी स©दे कैसे अपने पक्ष में किहीए जाते हैं, वे इस कला में माहिर है। ट्रंप यह बात बखूबी जानते हैं कि देर-सबेर कनाडा क¨ उनकी डील माननी ही पडेगी। यही व्यापारिक नीति वे भारत क¢ साथ भी अपना रहे हैं। भारत, अमेरिका क¨ 46 अरब डाॅलर का निर्यात करता है अ©र अमेरिका से 21.7 अरब डाॅलर का आयात करता है। विषुद्ध कार¨बारी ट्रंप क¨ यह स©दा भी हजम नहीं ह¨ रहा है अ©र वे इस व्यापार घाटे क¨ पाटना चाहते हंै। विष्व व्यापार संगठन की षतर्¨ं क¢ तहत अमेरिका इस तरह से टैरिफ नहीं बढा सकता है। मुक्त व्यापार क¢ लिए एक सीमा से ज्यादा टैरिफ अवर¨धक खडे नहीं किए जा सकते। इसी वजह भारत अमेरिका क¨ विष्व व्यापार क¢ पंचाट में खींच ले गया है। इससे पहले भी बराक अ¨बामा क¢ राश्ट्रपति काल में भी भारत स¨लर पैनल मैन्युफ¢क्चरर क¨ सब्सिडी देने क¢ मामले में विष्व व्यापार संगठन क¢ पंचाट ले गया था। बहरहाल, ट्रंप की संरक्षणवादी नीतिय¨ं ने वैष्विक अर्थव्यवस्था क¨ संकट में डाल दिया है अ©र द¨स्ती दुष्मनी में बदलती जा रही है।
मंगलवार, 26 जून 2018
Friend Turned Foe
Posted on 7:14 pm by mnfaindia.blogspot.com/
पैसे का लालच सगे-से-सगे रिष्ते में भी दरार डाल देता है। पैसे क¢ लिए भाई-भाई एक-दूसरे क¢ खून क¢ प्यासे ह¨ जाते हैं, इसक¢ सामने द¨स्ती क्या चीज है? अ©र अब इसी पैसे क¨ लेकर भारत अ©र अमेरिका में साल¨ं पुराने संबंध¨ं में दरार पड गई है। अमेरिकी राश्ट्रपति ड¨नाल्ड ट्रंप द्वारा इस्पात अ©र एल्यूमिनियम पर टैरिफ बढाने से क्षुब्ध भारत ने पलटकर बादाम, अखर¨ट अ©र दाल¨ं समेत 29 अमेरिकी उत्पाद¨ं पर सीमा षुल्क (कस्टम ड्यूटी) बढा दी है। इससे अमेरिका क¨ 23.5 कर¨ड डालर का नुकसान ह¨गा। अमेरिका द्वारा इस्पात अ©र एल्यूमिनियम पर टैरिफ बढाने से भारत क¨ 29. 24 कर¨ड डाॅलर का अतिरिक्त ब¨झ उठाना पडेगा। पिछले कुछ साल¨ं में भारत अ©र अमेरिका क¢ बीच कार¨बार निरंतर बढता जा रहा है। 2014 में भारत अ©र अमेरिका क¢ बीच 104 अरब डाॅलर का व्यापार हुआ था। 2016 में यह बढ्कर 114 अरब डाॅलर पहुंच गया था। प्रधान मंत्री की अमेरिका यात्रा क¢ समय इस कार¨बार क¨ 500 अरब डाॅलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। ्इस साल जनवरी-अप्रैल क¢ द©रान भारत ने अमेरिका क¨ 309.18 मिलियन डाॅलर क¢ इस्पात अ©र इसक¢ उत्पाद निर्यात किए थे। अमेरिका क¢ कुल इस्पात आयात में भारत का मात्र द¨ फीसदी हिस्सा है। एभ्ल्यूमिनियम का निर्यात त¨ इससे भी कम है। म¨दी सरकार ने पिछले माह अमेरिका से भारत से निर्यात किए जाने वाले इस्पात, एल्यूमिनियम क¨ टैरिफ बढ¨तरी से बाहर रखने का आग्रह किया था, मगर ट्रंप नहीं माने। नतीजतन, भारत क¨ भी पलटवार करना पडा। टैरिफ बढने से हालाकि न त¨ अमेरिका अ©र न ही भारत क¨ बहुत ज्यादा असर पडेगा, मगर ट्रंप क¢ इस कदम से रिष्त¨ं में जरुर खटास आई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने हाल ही में मजबूती क¢ संक¢त दिए हैं। इससे राश्ट्रपति ट्रंप का गरुर सातवें आसमान पर है। अमेरिका में अमेरिकिय¨ं क¢ लिए अ©र ज्यादा र¨जगार क¢ अवसर जुटाने क¢ लिए ट्रंप अंतरराश्ट्रीय कंपनिय¨ं क¨ अमेरिका में फ¢क्टरी उत्पादन क¢ लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। इसीलिए, वे कभी चीन से उलझ जाते है, कभी यूर¨पियन यूनियन त¨ कभी कनाडा अ©र मैक्सिक¨, रुस या भ्ंाारत से। अमेरिका क¨ महान बनाने क¢ बहाने ट्रंप पेरिस जलवायु संधि क¨ मानने से मुकर गए, नाफ्टा व्यापार समझ¨ते क¨ निरस्त करने पर आमादा हैं अ©र जी-20 से लेकर जी-7 की बैठ्क¨ं में अपनी “दादागिरी“ दिखाते फिरते हैं। नाफ्टा व्यापार समझ©ता दुनिया की सबसे बडी कार¨बारी डील है। अमेरिका-कनाडा सीमा से हर र¨ज द¨ अरब डाॅलर से अधिक कार¨बार की आवाजाही ह¨ती है। इस कार¨बार से अमेरिका अ©र कनाडा द¨न¨ं क¨ फायदा ह¨ रहा है मगर राश्ट्रपति ट्रंप क¨ लगता है इससे कनाडा ज्यादा कमा रहा है। इसी बात क¢ दृश्टिगत अमेरिकी राश्ट्रपति नाफ्टा में जबरदस्त म¨ल-त¨ल कर रहे हें। ट्रंप मूलतः कार¨बारी है अ©र कार¨बारी स©दे कैसे अपने पक्ष में किहीए जाते हैं, वे इस कला में माहिर है। ट्रंप यह बात बखूबी जानते हैं कि देर-सबेर कनाडा क¨ उनकी डील माननी ही पडेगी। यही व्यापारिक नीति वे भारत क¢ साथ भी अपना रहे हैं। भारत, अमेरिका क¨ 46 अरब डाॅलर का निर्यात करता है अ©र अमेरिका से 21.7 अरब डाॅलर का आयात करता है। विषुद्ध कार¨बारी ट्रंप क¨ यह स©दा भी हजम नहीं ह¨ रहा है अ©र वे इस व्यापार घाटे क¨ पाटना चाहते हंै। विष्व व्यापार संगठन की षतर्¨ं क¢ तहत अमेरिका इस तरह से टैरिफ नहीं बढा सकता है। मुक्त व्यापार क¢ लिए एक सीमा से ज्यादा टैरिफ अवर¨धक खडे नहीं किए जा सकते। इसी वजह भारत अमेरिका क¨ विष्व व्यापार क¢ पंचाट में खींच ले गया है। इससे पहले भी बराक अ¨बामा क¢ राश्ट्रपति काल में भी भारत स¨लर पैनल मैन्युफ¢क्चरर क¨ सब्सिडी देने क¢ मामले में विष्व व्यापार संगठन क¢ पंचाट ले गया था। बहरहाल, ट्रंप की संरक्षणवादी नीतिय¨ं ने वैष्विक अर्थव्यवस्था क¨ संकट में डाल दिया है अ©र द¨स्ती दुष्मनी में बदलती जा रही है।






