बुधवार, 6 जून 2018

“मोदीकेयर से मोदीवेल्फेयर“

लोकसभा चुनाव के लिए  करीब एक साल का समय पडा है मगर केन्द्र और 21 राज्यों में सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी ने अभी से कमर कस ली है। भाजपा राष्ट्रीय  अध्यक्ष देश  की प्रभावशाली हस्तियों से मिलकर मोदी सरकार की परर्फोमेंस का  फीडबैक ले रहे हैं तो सभी मंत्रियों-पार्टी सांसदों को जन-जन से संपर्क  करने को कहा गया है। उधर, सरकार ने कामगारों, वृद्धों, महिलाओ और उपेक्षित तबकों के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का मसौदा तैयार किया  है। 2019 के लोकसभा चुनाव तक समाज के हर तबके को पटाना भाजपा का लक्ष्य है। इस साल के बजट में सरकार ने नेशनल हैल्थ प्रोटेक्शन  स्कीम (एनएचपीएस) लागू करने की घोषणा की थी। दुनिया की सबसे बडी स्वास्थ्य योजना माने जाने वाली एनएचपीएस के तहत आर्थिक तौर पर कमजोर 50 करोड लोगों के लिए प्रति परिवार 5 लाख का बीमा कराया जाएगा । इस साल अक्टूबर से इस योजना को लागू  किया जा रहा है। इस योजना के तहत पात्र लोगों को बीमारी की स्थिति में सरकारी अथवा निजी अस्पतालों में उपचार का खर्चा बीमा राशि  से अदा  किया जाएगा । योजना पर हर साल लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड रु का खर्चा  आएगा। केन्द्र 60 फीसदी और 40 फीसदी का खर्चा  राज्यों को वहन करना पडेगा। और अब मोदी सरकार एक और वेल्फेयर योजना  शुरु करने जा रही है। इस योजना के तहत वृद्धावस्था पेंशन , स्वास्थ्य बीमा और प्रसूति लाभ देने का प्रस्ताव है। इस योजना का लक्ष्य भी 50 करोड लोगों को लाभान्वित करना है। सरकार इस बात को भी मानती है कि देश के 11 करोड वृद्धों के लिए सामाजिक सुरक्षा की जरुरत है। इन मेंसे मात्र 35 फीसदी को पेंशन मिल रही है  है। बाकी 65 फीसदी परिवार पर आश्रित हैं। बेहतर स्वास्थय सुविधाओं के कारण देश  में जीवन प्रत्याशा  (लाइफ  एक्सपेक्टेंसी ) भी बढी है मगर इस अनुपात में सामाजिक सुरक्षा का दायरा नहीं बढा है। राज्यों की सरकार ने वृद्धाओं को पेंशन तो दी है मगर, यह इतनी कम है कि इससे दो दिन  तक भी गुजर-बसर नही हो सकती।  अगर देश  के सांसदों और विधायकों को केवल एक टर्म  पूरी करने पर भी पेंशन मिल सकती है, तो उस आम आदमी को क्यों नहीं जिसका प्रतिनिधि बनकर सांसद अथवा विधायक सामाजिक सुरक्षा का हकदार बन जाता है।  भारत में अभी भी सामाजिक सुरक्षा पर जीडीपी का 2 फीसदी से भी कम खर्च  किया जाता है। अमेरिका अपने बजट का 24 फीसदी ओर चीन लगभग 12 फीसदी बजट सामाजिक सुरक्षा पर खर्च करता है। बहरहाल, चुनावी मकसद से ही सही, मोदी सरकार का कमजोर और असहाय तबकों के लिए सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने का प्रस्ताव स्वागत योग्य है। निसंदेह, यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। सरकार को इस बात का अहसास होना चाहिए कि जन प्रतिनिधियों से कहीं ज्यादा आर्थिक रुप से कमजोर तबकों को  सामाजिक सुरक्षा की जरुरत है। मोदी सरकार की स्वास्थय बीमा योजना के साथ-साथ अगर लोगों को और व्यापक सामाजिक सुरक्षा मिलती है, इसमें आम आदमी की ही भलाई है। जनता बडी सयानी है और सब जानती है।