दक्षिण हिमालय में 3,880 मीटर (12,756 फुट) ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ पवित्र गुफा की तीर्थ यात्रा बुधवार को शुरु हो गई। लगभग तीन हजार ( 2,995) तीर्थयात्रियों का पहला जत्था बुधवार की अलसुबह साठ दिन की यात्रा लिए रवाना हो गया। पहले जत्थे में 520 महिलाएं और 21 बच्चे भी शामिल हैं । अमरनाथ गुफा पहुंचने के दो रास्ते हैं। पहलगाम का परंपरागत रास्ता 36 किलोमीटर लंबा तो है मगर ज्यादा चढाई वाला नहीं है। बाल्टल वाला 12 किल¨मीटर रास्ता छोटा जरुर है मगर इसमें खडी चढाई है। अपनी सुविधानुसार तीर्थयात्री दोनों रास्तों से गुफा जाते हैं। इस बार पहले जत्थे के 1,904 तीर्थयात्रियों ने पहलगाम वाला रास्ता चुना है और 1,091 बाल्टल होकर अपनी तीर्थयात्रा पूरी करेंगे। इसके अलावा हेलीकाॅप्टर से भी गुफा की यात्रा की जा सकती है। 26 अगस्त रक्षाबंधन के दिन यात्रा का समापन होगा। देश भर से तीर्थयात्री अमरनाथा की यात्रा पर जाते हैं । जम्मू-कश्मीर सरकार के लिए यह तीर्थयात्रा प्रतिष्ठा का प्रश्न है। पिछले साल 2.60 लाख तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ गुफा के दर्शन किए थे। राज्यपाल इस यात्रा के प्रमुख संरक्षक है और इस बार क्योंकि जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन है, लिहाजा राज्यपाल एनएन वोहरा इस तीर्थयात्रा को चाक-चौबंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। नब्बे के दशक से हिन्दुओं की इस तीर्थ यात्रा पर भी आतंक का साया मंडराता रहा है। पिछले साल आतंकियों ने तीर्थयात्रियों से भरी बस पर हमला करके सात यात्रियों की हत्या कर दी थी। 2016 में आंतकी हमले की आशंका के कारण अमरनाथ यात्रा को स्थगित करना पडा था। आतंकी संगठनों की धमकियों की के दृष्टिगत 1991 से 1995 तक अमरनाथ यात्रा को रद्द करा दिया गया था। आतंकी संगठनों द्वारा तीर्थयात्रा के समय हिंसा नहीं फैलाने के आश्वासन पर 1996 में यात्रा शुरू तो हुई मगर मौसम ने ऐसी तबाही मचाई कि 242 तीर्थ यात्रियों की मौत हो गई। 2000 में आतंकियों ने पहलगाम के बेस कैंप पर हमला करके 32 की हत्या कर दी। इनमें 7 मुसलमान नागरिक और तीन सुरक्षाकर्मी थे। 2001 में आतंकियों ने तीर्थयात्रियों के बेस कैंप पर ग्रैनेड फेंककर 13 को ¨ मार डाला। इनमें 3 महिलाएं थी। 2002 में लश्कर के आतंकियों ने दो कैंप¨ पर हमला करके 11 तीर्थयात्रियों की हत्या कर दी थी। बार-बार आतंकी हमलों के बावजूद तीर्थयात्रियों की आस्था जरा भी डगमगाई नहीं है और अमरनाथ गुफा के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या उतरोत्तर बढती जा रही है। 1989 में जहां 12,000 तीर्थयात्री अमरनाथ की पवित्र यात्रा पर गए थे वहीं 2007 में यह संख्या 4 लाख क¨ भी पार कर गई थी। 2012 में रिकार्ड 6 लाख 22 हजार तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ गुफा के दर्शन किए थे। इस बार सरकार ने भारी सुरक्षा बंद¨बस्त किए हैंे। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए चालीस हजार सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं और रास्तों की कडी चौकसी के लिए सौ से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हिन्दुओं में अमरनाथ की पवित्र गुफा के प्रति प्रगाढ आस्था है। भृगु ऋषि ने सबसे पहले अमरनाथ गुफा के शिवलिंग को खो ज निकाला था। कश्मीरी विद्धान कल्हण के ग्रंथ राजतरंगिणी के अनुसार मुगल शासक औरगंजेब ने जब हिन्दुओं लोग को ¨ मुस्लमान बनाने के लिए तरह-तरह के जुल्म ढाए थे, तब लोग अमरनाथ गुफा की शरण में आए थे और भगवान ने श्रद्धालुओं को रास्ता दिखाया था। और भी कई मान्यताएं हैं मगर सच्ची आस्था के लिए किसी भी मान्यता अथवा विवरण की जरुरत नहीं होती है। हिजबुल के स्थानीय कमांडर का मंगलवार का बयान काबिलेगौर है कि उनका संगठन अमरनाथ तीर्थयात्रियों के ¨ निशाना नहीं बना रहा है। इससे चरमपंथी हिजबुल के नरम पडने की उम्मीद की जा सकती है। मगर सबसे बडी समस्या यह है कि कश्मीर में आज कितने आतंकी संगठन है, खुद आतंकी नही जानते हैं। इस स्थिति में दो -एक संगठन की आवाज कोई मायने नहीं रखती।
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