राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का “अमेरिका फॉर अमेरिकन“ प्रेम वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी पडता जा रहा है। अमेरिका को अमेरिकियों के लिए सुरक्षित करने के चक्कर में ट्रंप ऐसे फेसले ले रहे हैं, जिनसे उसके मित्र देश भी प्रेशर में आ गए हैं। ट्रम्प ने स्वदेशी कंपनियों को बढावा देने के लिए इस्पात और एल्यूमिलियम के आयात पर टैरिफ बढा दिया है। इन दोनों धातुओं से सुई से लेकर विमान- अंतरिक्ष यान तक हजारों उत्पाद बनते हैं। अमेरिका इस्पात आयात करने वाला दुनिया का सबसे बडा मुल्क है। 2017 में अमेरिका ने 34.6 मिलियन मीट्रिक टन इस्पात का आयात किया था। 2016 मे दुनिया में कुल आयातित इस्पात का आठ फीसदी अमेरिका के हिस्से में था। 2014 में अमेरिका ने रिकार्ड 40.3 मीलियन मीट्रिक टन इस्पात का आयात किया था। अमेरिका चीन और भारत समेत 85 मुल्कों से इस्पात का आयात करता है। सबसे ज्यादा आयात कनाडा, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया से किया जाता है। 2009 ंसेडी 2017 के दौरान अमेरिका के इस्पात आयात में 134 फीसदी का इजाफा हुआ और इस्पात ट्रेड घाटा बढकर 327 फीसदी पहुंच गया था। इसी तरह 2017 में अमेरिका ने 130 मुल्कों से 23.4 अरब डॉलर मूल्य का एल्यूमिलियम आयात किया था। 2013 की तुलना में यहं 49.3ः फीसदी ज्यादा था। अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा विकसित और आर्थिक रुप से सपन्न देश है। अमेरिका को अगर छींक भी आती है तो पूरी दुनिया को जुकाम हो जाता है। अमेरिका को महान बनाने का सपना दिखाने वाले ट्रंप को यह बात गवारा नही ंहै कि उनका देश इस्पात और एल्यूमिलियम जैसी महत्वपूर्ण धातुमुल्कों ओं के लिए दूसरे मुल्कों पर निर्भर रहे। अमेरिका में इस्पात और एल्यूमिलियम के उत्पादन को बढाने के मकसद ट्रंप ने इनके आयात पर टैरिफ लगाया है। ट्रंप चाहते हैं कि विदेशी इस्पात निर्माता अमेरिका में उधोग लगाएं और स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराए। शुक्रवार को ट्रंप ने चीन से आयात किए जा रहे 1100 उत्पादों पर भी 50 अरब डॉलर का टैरिफ थोप दिया । चीन ने भी बदले में अमेरिकी तेल और ऑटोमोबाइल पर टैरिफ लगा दिया है। चीन और अमेरिका दुनिया में इलेक्ट्रिक और पेट्रोल-डीजल चालित कार खरीदने वाले सबसे बडे मुल्क हैं। अमेरिका की कई बडी कंपनियां चीन अमित में इलेक्ट्रिक कारों की फैक्ट्रियां स्थापित कर चुकी हें। ताजा टैरिफ से इन कंपनियों को नुकसान उठाना पड सकता है। बहरहाल,ट्रंप के ताजा फैसले से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। इस्पात और एल्यूमिलियम पर टैरिफ बढने से सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका के मित्र मुल्कों को उठाना पड सकता है। अमेरिका का ज्यादातर इस्पात और एल्यूमिलियम का व्यापार कनाडा, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, जर्मन, फ्रांस जैसे मित्र देशों से है। ट्रंप के फेसले से भारत समेत लगभग दो सौ मुल्क प्रभावित हो रहे हें। भारत ने भी 30 अमेरिकी आयातित उत्पादों पर टैरिफ लगा दिया है। भारत हर साल अमेरिका को 1.2 अरब डॉलर का इस्पात और एल्यूमिलियम का निर्यात करता है। कनाडा और मेक्सिको भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगाने की तैयारी में है। इस्पात और एल्यूमिलियम पर टैरिफ लागू होते ही दुनिया भर की बंदरगाहों और एयर टर्मनलों पर कमर्शियल गतिविधियां में अप्रत्याशित गिरावट आई है। जर्मन से मेक्सिको , दक्षिण कोरिया-जापान तक आर्डर कैंसिल किए जा रहे हैं। फैक्टरी उत्पादन घटने से कामगारों पर छंटनी का खतरा मंडरा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था हाल ही में मंदी से उभर कर पटरी पर लौट रही थी मगर ट्रंप महाशय ने ऐसा झटका दिया है कि बडे से बडे मुल्क भी सकते में है। दुनिया अभी उत्तर कोरिया-अमेरिका तनाव से उभर नहीं पाई थी कि वैश्विक ट्रेड वार का खतरा मंडराने लग पडा है। अभी तक ट्रेड वार चीन और अमेरिका तक ही सीमित था, अब पृूरी दुनिया इसकी चपेट में आ गई है। अमेरिका को भी इसके भयंकर परिणाम भुगतने पड सकते हैं।
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