अगर लफ्फाजी से अंतरराष्ट्रीय मसले सुलझ सकते तो मंगलवार को ही अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच रिश्तों पर छाया घना कोहरा छंट गया होता । मगर शब्दों का जाल बुनकर कूटनीति के नौसिखिए को बेवकूफ बनाया जा सकता है, दुनिया को नहीं। पूरी दुनिया की पैनी नजर मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर को¨रिया के तानाशाह किम.जाॅग उन की सिंगापुर शिखर वार्ता के परिणाम पर टिकी थी । मंगलवार को ¨ शिखर वार्ता की पहली कडी में ट्रंप और किम ने गर्मजोशी से एक.दूसरे से हाथ मिलाए, मुस्कारते हुए तस्वीरें खिंचवाई , 45 मिनट 'दुभाषिए ¨ के अलावा एकांत में बगैर सहायकों के गुफ्तगू की और पत्रकारों को संबोधित किया और अंत मैं एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया। एक महत्वांकाक्षी दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर भी किए गए। ट्रंप ने इस दस्तावेज के पत्रकारों को दर्शन जरूर करवाए मगर मसौदा जारी नहीं किया। पहली बार की मुलाकात के लिए यह पर्याप्त था। इतिहास की रचना हो चुकी थी। परमाणु निरस्त्रीकरण पर अभी कुछ ठोस तो नहीं कहा गया है मगर इसके प्रति प्रतिबद्धता जताई गई है। तीन महीने पहले तक एक.दूसरे को बर्बाद करने की धमकिया देने और वजन से वजनदारी अपशब्द कहने वाले दो मिसाइल पाॅवर सपन्न राष्ट्राध्यक्ष अगर गले मिलते हैं तो यह न केवल ऐतिहासिक घटना है, अलबत्ता दो ¨ शत्रु देशों के बीच द्धिपक्षीय संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत भी है। इस शिखर वार्ता से चीन का आशंकित होना भी स्वभाविक है। कोरियाई प्रायद्धीप में अगर शांन्ति कायम हो जाए तो देर.सबेर चीन और अमेरिका जैसे बडे मुल्कों की दादागिरी खराष्ट्रपति त्म हो जाएगी। अमेरिका , चीन ऐसा हरगिज नहीं होने देंगे। छोटे अगर लडना. झगडना छोड़ दें तो दादागिरी करने वाले कहां जाएंगे? किम से मुलाकात के बाद अमेरिकी ट्रंप को अहसास हुआ है कि उत्तर कोरिया के तानाशाह ¨ अति प्रतिभाशाली हैं और अपने देश से बहुत प्यार करते हैं "। किम को पागल बताने वाले ट्रंप से इतनी तारीफ सुनने के बाद उत्तर को रिया के तानाशाह जरुर अभिभूत हुए होंगे । अभी तक इस मुलाकात पर जो कुछ भी कहा गया हैए वह सब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ही कहा है। ट्रप ने यह भी दावा किया है कि उतर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण का वायदा किया है मगर उत्तर कोरिया की तरफ से अभी कुछ नहीं कहा गया है। अमेरिका उत्तर कोरिया पर मानवाधिकार्रों के घोर उाल्लंघन के गंभीर आरोप लगाता रहा है। अमेनेस्टी इंटरनेशनल जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी इस तरह के आरोप लगा चुकी हैं। सिंगापुर वार्ता में इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया है और न ही अमेरिका ने इसे शिद्दत से उठाया है। किम पर अपने परिजन समेत आलोचकों और प्रतिद्धद्धियों को रास्ते से हटाने के आरोप हैं। उन्होंने अपने सगे चाचा तक को मरवा डाला । शिखर वार्ता से एक दिन पहले सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने परमाणु निरस्त्रीकरण की स्थिति में उत्तर कोरिया को व्यापक परमाणु सुरक्षा कचच मुहेया कराने की पेशकश की है। अमेरिका से संबंध सुधरने पर उत्तर कोरिया का ज्यादा फायदा है। कोई भी देश कितना भी ताकतवर क्यों न हो, वह अकेला रहकर तरक्की नहीं कर सकता। सिंगापुर वार्ता के बाद उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंध हट सकते हैं। इससे उत्तर कोरिया में विदेशी निवेश के द्धार खुल सकते हैं। कोरियाई प्रायद्धीप में तनाव कम होने पर उत्तर कोरिया के तानाशाह किम अपना पूरा ध्यान अर्थव्यवस्था को सुधारने पर लगा सकते हैं। पडोसी दक्षिण, उत्तर कोरिया से ज्यादा विकसित और तकनीक सपन्न है। उत्तर कोरिया की अवाम अपेक्षाकृत उतनी संपन्न नहीं है, जितने दक्षिंण के ¨लोग हैं। किम की परमाणु सशस्त्रीकरण की जिद ने पूरी दुनिया को युद्ध की जद में ले लिया था। सिंगापुर वार्ता इस तनाव को कम कर सकती है।
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