दो सीजन तक इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से बाहर रहने के बाद महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में चैन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) ने आते ही इस बार खिताब जीत लिया। रविवार को फाइनल भिडंत में सीएसके ने सनराइजर्स हैदराबाद को आठ विकेटो से हरा कर तीसरी बार चैंपियनशिप जीती है और मुंबई इंडियन की बराबरी कर ली है। सीएसके के आस्ट्रेलियाई हरफनमौला बल्लेबाज और गेंदबाज शेन वॉटसन की शतकीय पारी हैदराबाद पर भारी पडी। सीएसके ने सात साल बाद आईपीएल चैंपपिनशिप जीती है। इससे पहले 2010 और 2011 में लगातार दो बार सीएसके आईपीएल का बादशाह रहा है। आईपीएल में सबसे उम्रदराज माने जाने वाली चैन्नई सुपरकिंग्स अपेक्षाकृत प्रतिद्धद्धी युवा टीमों से ज्यादा स्मार्ट और फिट निकली। सीएसके में धोनी समेत नौ खिलाडी 30 की उमर से ज्यादा थे मगर सभी का फिटनेस लेवल युवाओं से कम नहीं था। महेन्द्र सिंह धोनी के बारे क्रिकेट जगत में यह धारणा है कि जिस भी टीम के वे कप्तान होते हैं, उसकी जीत तो झक मारकर भी आ जाती है। 2007 के टी20 वर्ल्ड कप कप को ही ले लीजिए। वेस्ट इंदीज में 13 मार्च से 28 अप्रैल के दौरान हुए इस वर्ल्ड कप में बुरी तरह से हार का मुंह देख कर लौटी भारतीय टीम निराशा के दौर से गुजर रही थी। हार से क्षुब्ध क्रिकेट प्रेमी सचिन, सौरभ गांगुली राहुल द्रविड और वीरेन्द्र सहवाग के पोस्टर तक ला रहे थे। सितंबर 2007 में ही दक्षिण अफ्रीका में पहला टी20 वर्ल्ड कप भी होना था। बीसीसीआई क्रिकेट के इस फॉरमेट के सख्त खिलाफ थी। सीनियर खिलाडी भी इस प्रतियोगिता में खेलने से आनाकानी कर रहे थे। तब बीसीसीआई ने भारतीय टीम की कप्तानी महेन्द्र सिंह धोनी को सौंपी और इसके आगे की कहानी पूरी दुनिया जानती है। धोनी की कप्तानी ने न केवल 2007 का पहला टी20 वर्ल्ड कप जीता, अलबत्ता 2011 में 50 ओवर्स वाला वर्ल्ड कप भी जीता। धोनी ने न केवल भारतीय खिलाडियों को निराशा के दौर से बाहर निकाला, बल्कि दुनिया को दिखा दिया है कि सटीक रणनीति से कैसे मैच जीते जाते हैं। कठिन से कठिनतम परिस्थिति में भी संयत रहना और हर स्थिति का सामना करना उनकी सबसे बडी खूबी है। अपनी टीम की भरपूर क्षमता पर भरोसा करना उनकी विशेषता है। इसी के चलते धोनी ने इस बार उम्रदराज हरभजन सिंह भज्जी को चैन्नई सुपरकिंग्स टीम में षमिल कर बडा दांव खेला। दक्षिण अफ्रीका के युवा गेंदबाज एंगिडी पर भी दॉव खेला और यह भी सफल रहा। पूरी दुनिया इस बात की भी गवाह है कि 2007 के वर्ल्ड कप फाइनल में अंतिम ओवर अनुभवहीन जोगिन्द्र सिंह से कराने का साहस भी धोनी जैसा कप्तान ही दिखा सकता है। और भारत ने यह मैच जीता भी। आईपीएल में धोनी ने दीपक चाहर और शार्दुल ठाकुर को आगे करके बडा रिस्क लिया और दोनों ने जरुरत अनुसार विकेट चटाकर धोनी को निराश नहीं किया। उनकी पारखी नजर हर खिलाडी की क्षमता को भांप लेती है। कहते हैं“ साहसी और सटीक रणनीतिकार ही जंग जीतता है और धोनी इसी के पर्याय है्। बहरहाल, चमक-धमक से लबालब आईपीएल ने इस बार भी लगभग दो महीने तक देश -विदेश में क्रिकेट प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया। विडंबना देखिए, टी20 फॉरमेट का घुर विरोध करने वाली बीसीसीआई आज उसकी बदौलत इंडियन प्रीमियर लीग से दोनों हाथों से इतना पैसा बटोर रहा है कि दुनिया का हर क्रिकेट बोर्ड उससे ईर्ष्या करता है। टी20 फारमेट ने ही इंडियन प्रीमियर लीग को बुलंदियों तक पहुंचाया है और भारत की इस कमाऊ चैंपियनशिप की दुनिया में कोई सानी नहीं है। इसकी चमक-धमक ने धुरधंर से धुरंधर विदेशी खिलाडी को आकर्षित किया है। शेन वॉटसन इसकी मिसाल हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर होने के बावजूद वॉटसन आईपीएल खेल रहे हैं उन जैसे और भी कई खिलाडी है। यही तो आईपीएल का जलवा है।
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