कहते हैं सपनों को हकीकत में बदले के लिए भी सपने देखने पडते हैं।़ चंडीगढ के बंसल बंधुओं ने दुनिया को यही कर दिखाया है। 2005 में दिल्ली आईआईटी में मुलाकात हुई और दोनों पक्के दोस्त बन गए। दोनों ने यहीं एक स्टार्ट अप शुरु करने का सपना देखा और 2007 में एक अन्य साथी के साथ मिलकर बंगलुरु से फ्लिपकार्ट खोल कर इसे साकार किया। इसे विडबना ही कहा जाएगा कि जिस अमेज़ॉन कंपनी ने एक दिन सचिन बंसल को कमतर आंका था, वही बहुराष्ट्रीय कंपनी कालांतर में फ्लिपकार्ट को खरीदने पर आतुर उन्हें मनाने के लिए हाथ-पांव मार रही थी। सचिन बंसल की सर्च इंजन आप्टिमाइजेशन महारत की बदौलत फ्लिपकार्ट जल्द ही लोकप्रिय ऑनलाइन साइट बन गई। कंपनी को विज्ञापन मिलने से अच्छी-खासी कमाई होने लग पडी और फ्लिपकार्ट जल्द ही अपने पांव पर खडी हो गई। 2009 आते आते कंपनी ने 10 लाख डॉलर का कर्जा लिया और इसका बेहतर इस्तेमाल करके फ्लिपकार्ट ने नौ साल में ही करीब 6 अरब डालर बटोर लिए। 2014 में जब अमेज़ॉन ने भारत में अपना कारोबार जमाया, तब माना जा रहा था कि यह दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट को खा जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ और फ्लिपकार्ट मुकाबला करती रही। चार साल बाद वॉलमार्ट ने इसे खरीदकर फ्लिपकार्ट का लोहा माना है। अपने अस्तित्व के मात्र 11 साल में फ्लिपकार्ट दुनिया की एक मात्र ऐसी कंपनी है जिसने इतने कम समय में एक लाख सात हजार डालर के शेयर्स बेचे हैं। इससे पहले 2016 में रुस की कंपनी रोसनेफ्त ने एस्सार ऑयल को 12.9 अरब डालर में खरीद कर भारत का सबसे बडा अधिग्रहण सौदा किया था। फ्लिपकार्ट में माइक्रोसॉफ्ट, सॉफ्ट बैंक, टेनसेंट की भी हिस्सेदारी है और इन कंपनियों ने अभी अपने शेयर्स नही बेचे हैं। सॉफ्ट बैंक के सबसे ज्यादा 20 फीसदी शेयर्स हैं। 32.4 लाख करोड रु से वॉलमार्ट ऑनलाइन कारोबार करने वाली दुनिया की सबसे बडी कंपनी है। 9 लाख करोड रु के ऑनलाइन कारोबार करनी वाली अमेज़ॉन, वॉलमार्ट सेे काफी पीछे है। अलीबाबा का कारोबार डेढ लाख करोड रु के करीब है। 11 साल में भारत की फ्लिपकार्ट 20 हजार करोड रु का कारोबार कर रही है। फ्लिपकार्ट डील से वालमार्ट की स्थिति भारत में और मजबूत होगी। अमेरिका में कॉपोर्रेट टैक्स में कटौती के बाद वॉलमार्ट के पास अच्छा-खासा कैश है और कंपनी इसका सही इस्तेमाल करने के लिए आतुर थी। अमेरिका की यह दिग्गज कंपनी भारत में ठोस जमीन तलाश रही थी। भारत दुनिया का सबसे बडा बाजार है और ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार तेजी से बढ रहा हे। 2017 में भारत में ऑनलाइन कारोबार 2100 करोड डालर पहुंच चुका था। 2026 तक भारत में ऑनलाइन शॉपिंग 200 अरब डालर को पार कर जाएगा। इतने विशा ल बाजार को देखकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुंह में पानी आना स्वभाविक है। चार साल पहले भारती एयरटेल के साथ वॉलमार्ट ने भारत में प्रवेश किया था मगर तब विदेशी निवेश पर लगी पाबंदियों के चलते इसका कारोबार “कैश और कैरी“ के थोक व्यापार तक ही सीमित था। भारत में अभी भी वॉलमार्ट के 21 स्टोर हैं। बहरहाल, वॉलमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण से छोटे कारोबारियों का चिंतित होना स्वभाविक है। बडी मछली हर हाल में छोटे को निगल जाती है। वॉलमार्ट का इतिहास रहा है कि वह कम दामों पर अपना सामान बेचकर छोटे कारोबारियों को रास्ते से हटा देती है। वॉलमार्ट के पास न तो कैश की कमी होती है और न ही संसाधनों की। दुनिया भर से सस्ता माल खरीदकर कंपनी इसे डंप कर देती है और फिर समय आने पर सस्ते में बेच देती है। आरएसएस से सम्बद्ध स्वदेशी जागरण मंच ने इस डील का मुखर विरोध किया है। ऑन लाइन वेंडर्स भी इस डील का मुखर विरोध कर रहे हैं। सच यही है कि स्वदेशी मंच पर विदेशी "पंच" राष्ट्रहित में नहीं हो सकता है। इतिहास स्वंय को दोहरा रहा है।
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