गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

नगदी का संकट क्यों?

घर पर बेटी को ब्याहने बारात लेकर दुल्हा आ चुका है मगर घरवालों के पास बारातियों के स्वागत के लिए  नगदी नहीं है। परिवार के कुछ सदस्य नगदी निकालने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। यह परिदृश्य  पंजाब समेत देश  के कई राज्यों में व्याप्त नगदी के संकट के कारण देखा जा सकता है। नगदी के मौजूदा संकट ने नोटबंदी “युग“ की याद ताजा कर दी है। पिछले कुछ दिनों से  पंजाब, मध्य प्रदेश , तेलंगाना, बिहार, कर्नाटक, असम, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र  और आंध्र प्रदेश  में नगदी का भारी संकट व्याप्त है। नवंबर, 2016 में मोदी सरकार द्वारा अचानक 500 और 1000 रुपए के नोट बंद किए जाने से पूरे देश  में महीनों नगदी के लिए मारा-मारी मची रही और कतारों में खडे-खडे 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। नगदी का ताजा संकट काला धन के जमा होने की ओर इशारा कर रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी माना है कि पिछले कुछ दिनों के दौरान अचानक नगदी की मांग बढी है। इसे  बैशाखी, बिहू और अन्य त्योहारों एवं रबी फसल कटाई और मंडीकरण से जोडकर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार फसल कटाई के बाद  हर साल मंडी  में लाई जाती है। इससे पहले तो कभी भी नगदी का संकट खडा नहीं हुआ़़। फिर इस बार क्यों़? नगदी संकट का एक और कारण आरबीआई का प्रतिबंध भी हो सकता है। लगभग एक माह पहले आरबीआई ने बैंकों पर एक सर्कल से दूसरे में नगदी ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।  वित्त मंत्रालय के आंकडों अनुसार इस माह के पहले 13 दिनों के दौरान करंसी सप्लाई में 45,000 करोड रु का इजाफा हुआ है। आरबीआई हर रोज सिस्टम में 20,000 करोड की नगदी  डालता है। नगदी क संकट को देखते हुए आरबीआई ने अब हर रोज  70,000 से 75,000 नगदी डालने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार जिस अनुपात में 2000 रु के नोट सिस्टम में सर्कुलेट हो रहे हैं, उस अनुपात में वापस नहीं आ रहे हैं। देश  में 2000 रु के 6.7 लाख करोड रु के नोट सर्कुलेशन में है, मगर इनमेंसे 60 से 70 फीसदी ही सिस्टम में वापस आ रहे हैं।  इससे साफ जाहिर है कि 2000 रु की जमाखोरी की जा रही है और इसे काले धन के रुप में छिपाया जा रहा है। अगर ऐसा है तो काले धन को बाहर निकालने के प्रयासो पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इससे इस बात  का भी पता चलता है कि काले धन को नोटबंदी से खत्म करना कारगर उपाय नहीं हे। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, नोबेल विजेता नामचीन अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन और कई अन्य अब तक यह कर रहे हैं और नोटबंदी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बता चुके हैं। यह बात तो साफ है कि सिस्टम से 2000 रु के नोटों की जमाखोरी की जा रही है। मार्च के अंत तक देश  में 18.29 लाख करोड की नगदी थी जबकि नोटबंदी के समय सिस्टम में  17.89 लाख करोड रु की नगदी थी। इसके बावजूद अगर नगदी का संकट हो, तो माना जाना चाहिए कि कहीं न कहीं भारी गडबड है। कर्नाटक विधानसभा से पहले राज्य में नगदी का संकट भारतीय जनता पार्टी को भारी पड सकता है। इस साल के अंत में मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ और राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।  नगदी संकट के लिए  सरकार ने इशारों-इशारों में साजिश  की आशंका जताई है। अफवाहों ने नगदी संकट से उत्पन्न स्थिति को और विकट बना दिया है। नगदी का संकट जल्द समाप्त होने वाला नहीं है।  सरकार ने भी माना है कि नगदी का संकट अभी कम-से-कम एक सप्ताह जारी रह सकता है।