सोमवार, 2 अप्रैल 2018

ऐसी परीक्षा का क्या औचित्य?

केन्द्रीय माध्यमिक  शिक्षा बोर्ड (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन-सीबीएसई) की परीक्षा से पहले बाहरवीं और दसवीं के पेपर लीक हो जाने पर देश  भर में हंगामा मचा हुआ है। इससे सीबीएसई की साख को गहरा धक्का लगा है। सीबीएसई दसवीं और बाहरवीं की परीक्षाओं के अलावा  प्रतियोगी मेडिकल और जेईई-आईआईटी प्ररीक्षाओं का भी संचालन करती है। ताजा  प्रकरण से अभिभावकों और परीक्षार्थियों का सीबीएसई पर भरोसा उठना स्वभाविक है। इस बार परीक्षा से पहले 26 मार्च  को बारहवीं का अर्थशास्त्र और 28 मार्च को दसवीं का मैथ्स का प्रश्न  पत्र लीक हुआ है। पुलिस अब तक 18 छात्रों और 5 कोचिंग सेंटर्स  संचालकों समेत 40 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। झारखंड के चतरा में 6 छात्रों और कोचिंग संचालकों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने 10 वॉटसऐप गु्रप की पहचान भी की है। पुलिस जांच में पता चला है कि पेपर्स  लीक होने से पहले किसी व्यक्ति ने सीबीएसई की चेयरमैन को आगाह कर दिया गया था।  वॉटसऐप पर पेपर्स की फोटो तक भेजी गई थी। जांच पर यह भी पता चला कि सीबीएसई को पेपर लीक को लेकर  तीन बार आगाह किया गया था मगर परीक्षा को रोका नहीं गया। गलती सीबीएसई ने की है मगर अब सजा छात्रों को मिल रही है। दोनों पेपर दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। इससे क्षुब्ध छात्र देश  भर में प्रदर्शन  कर रहे हैं। सीबीएसई में  प्रश्न पत्रों  को तैयार करने से लेकर परीक्षा केन्द्र में परीक्षार्थियों को बांटने तक की प्रकिया बेहद सटीक और गोपनीय है। पेपर्स  सेटिंग के बाद इन्हें परीक्षा केन्द्र के समीप बैंक में रखा जाता है और जिस दिन जिस विषय का पेपर होता है, उसी दिन प्रातः सीबीएसई, स्कूल और बैक के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पेपर  बैंक लाकर्स  से निकाला जाता है और कडी सुरक्षा में परीक्षा केन्द्र तक पहुंचाया जाता है। परीक्षा शुरु होने से आध घंटा पहले बोर्ड के हैड एग्जामिनर, स्कूल प्रिसिंपल और परीक्षा केन्द्र निरीक्षकों की मौजूदगी में पेपर को खोला जाता है। इतनी कडी प्रकिया से पहले पेपर का लीक होना वाकई ही  आश्चर्यजनक  है। जाहिर है पेपर परीक्षा केन्द्र पहुंचने से पहले ही चुरा लिए गए थे। वैसे भारत में हर चीज बिकती है और धन के दमखम पर कुछ भी खरीदा जा सकता है।  दलालों को भारी-भरकम फीस देकर  नीट और जेईई-आईआईटी की परीक्षाओं में रेंक मिल जाता है। पैसे से मेडिकल कॉलेज मे दाखिला लिया जा सकता है। पहले केपिटेशन फीस हुआ करती थी और अब पेड सीट। और यह सब बाकायदा  सरकार की छत्रछाया में हो रहा है। इससे दुनिया में भारत की शिक्षा   और परीक्षा  व्यवस्था की साख बेहद कमजोर हो चुकी है। ताजा प्रकरण से यह और गिर सकती है। ऐसी  शिक्षा  और परीक्षा व्यवस्था का क्या औचित्य है जो परीक्षार्थियों को नकल करने के लिए प्रेरित करे। यही कारण है कि इस बार उत्तर प्रदेश  में नकल पर नकेल कसे जाने के कारण  डेढ लाख से ज्यादा परीक्षार्थी पेपर देने ही नहीं आए।  परीक्षा का मूल मकसद परीक्षार्थी की योग्यता और प्रतिभा को आंकना होता है। नकल और धोखे से दी गई परीक्षा से यह मकसद पूरा नहीं होता। इसके विपरीत इस तरह की घटनाओं से होनहार छात्र निराश  और हतोत्साहित हो जाते हैं। देश  में वैसे भी परीक्षा पद्धति काफी भारी मानी जाती है। बाहरवीं की परीक्षा के बाद छात्रों को तुरंत प्रतियोगी परीक्षा देनी पडती है। इससे उन पर भारी स्ट्रेस पड रहा है। देश  की  शिक्षा-परीक्षा व्यवस्था में अविलंब आमूल-चूल बदलाव लाने की जरुरत है।