सोशल मीडिया के दुरुपयोग से किस तरह अरबों-खरबों रुपए (डॉलर) कमाए जा सकते हैं, पूरी दुनिया इस सच्चाई को जानती हैं। ताजा मामला राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका का सामने आया है। इस कंपनी पर फेसबुक के पांच करोड यूजर का डेटा चोरी करके अरबों की कमाई करने का आरोप है। कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए फेसबुक से डेटा चोरी किया था। ब्रिटेन के एक चैनल ने वीडियो में कैम्ब्रिज एनालिटिका के अधिकारी को यह कहते हुए दिखाया है कि कंपनी घूस देकर नेताओं को बदनाम करने का काम भी करती है। अमेरिका में सोशल मीडिया के जरिए 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के आरोपों की जांच की जा रही है। रुस पर ट्रंप के पक्ष में चुनाव प्रभावित करने के पहले ही आरोप लग चुके हैं। दो दिन पहले तक भारत में कैम्ब्रिज एनालिटिका को कोई नहीं जानता था मगर अब पूरे देश में इसकी चर्चा हो रही है। भारत में कैम्ब्रिज एनालिटिका का काम एससीएल नाम की कंपनी देख रही है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार यह एससीएल और ओवलेनो बिजनेस इंटेलिजेंस (ओबीआई) का साझा उपक्रम है। भारत में इस कंपनी का काम अमरीश त्यागी देख रहे हैं। अमरीश जनता दल (यू) केसी त्यागी के पुत्र हैं। अमरीश त्यागी पहले ही इस बात का खुलासा कर चुके हैं कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी क्या भूमिका रही है। कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुडा डेटा चोरी का मामला सामने आते ही ओवलेनो बिजनेस इंटेलिजेंस की वेवसाइट को फौरन बंद कर दिया गया है। एससीएल और ओवलेनो बिजनेस इंटेलिजेंस भारत में कई तरह की सेवाएं देती है और “राजनीतिक प्रबंध“ इनमेंसे एक है। इसके तहत कंपनी सोशल मीडिया के लिए रणनीति तय करती है और मोबाइल कैपेन भी मैनेज करती है। कंपनी सोशल मीडिया पर ब्लॉगर, मार्केटिंग और छवि निर्माण (इमेज बिल्डिंग) का काम भी करती है। और जाहिर है कंपनी की रणनीति में विरोधियों को:बदनाम“ करने का काम भी शामिल है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कैम्ब्रिज एनालिटिका ने मतदाताओं को ऐसी सूचनाएं दी जिनसे मतदान कम रहा और इसका ट्रंप को फायदा मिला। भारत में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस कंपनी की सेवाएं ली है हालांकि दोनों ही इस बात से इंकार कर रही हैं। कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर इस कंपनी से संबंध होने के आरोप लगा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों ही इस मामले में झूठ बोल रहे हैं। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि ओबीआई ने भाजपा के चार चुनाव अभियानों का काम देखा है और इनमें 2014 का लोकसभा चुनाव भी शामिल है। बिहार के 2010 के चुनाव का प्रबंधन भी इसी कंपनी के पास था और तब जनता दल (यू) और भाजपा ने मिलकर चुनाव लडा था। बहरहाल, चुनाव अभियान और प्रचार के लिए राजनीतिक दलों द्वारा परामर्श कंपनियों और एक्सपर्ट्स को हायर करना नई बात नहीं है और इसमे कोई बुराई भी नहीं है। इस सच्चाई को भीं नकारा नहीं जा सकता कि लोगों के मोबाइल नंबर और ई-मेल का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है और संबंधित कंपनिया इन्हें बेचकर दोनों हाथों से पैसा कमा रही है। डेटा चोरी और इसकेे दुरुपयोग को रोकने के लिए देश में अभी सख्त कानून नहीं है। सूचना प्रोद्योगिकी कानून, 2000 के तहत पासवर्ड, वित्तीय और बायोमैट्रिक जानकारी संवेदनशील डेटा माना गया़ है और डेटा लीक पर सजा और मुआवजे का प्रावधान भी है। मगर भारत में न्याय प्रकिया इतनी जटिल, समय खपाऊ और महंगी है कि लडते-लडते आम आदमी की हिम्मत जवाब दे जाती है। चेक बाउंस मामले ही ले लीजिए। इन मामलों में पीडित को न्याय मिलते-मिलते लंबा समय लग जाता है और तब उसका इतना नुकसान हो जाता है कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। सोशल मीडिया डेटा के दुरुपयोग रोकने के लिए कडे कानून बनाए जाने चाहिए।
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