दिल्ली में सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, भारत और फ्रांस के बीच दोस्ती का ग्राफ बराबर ऊंचा उठता रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मै्रकों के मौजूदा भारतीय दौरे के दौरान यह बात सामने आई है। मैक्रों 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार भारत की यात्रा पर आए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राश्ट्रपति मैक्रों ने भी माना है कि भारत और फ्रांस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध हमेषा मजबूत होते रहे हैं। दोनों देषों के बीच संबंध कितने अहम है, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर पूरी दुनिया में दो विपरीत धु्रवों में स्थित दो देश कंधे से कंधे मिलाकर चल सकते हैं, तो वह भारत और फ्रांस हैं। जमीन से आसमान तक ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जिसमें भारत और फ्रांस मिलकर काम नहीं कर रहे हों। फ्रांस, भारत में सबसे ज्यादा निवेष करने वाला नौवां देष है। पिछले 17 सालो में फ्रांस ने भारत में 16 अरब डॉलर का निवेश किया है। मार्च 2016 से अप्रैल 2017 के बीच ही फ्रंास ने 11 अरब डॉलर का निवेष किया है। पश्चिम के देश भारत को दुनिया की तेजी से उभरती शक्ति मानते हैं और उसके साथ हर क्षेत्र में सहयोग के लिए लालायित रहते हैं। भारत के रक्षा कवच को सुढृढ करने में एक जमाने में रुस की जो अहम भूमिका होती थी, अब फ्रांस वही रोल निभा रहा है। भारत अब फ्रांस को सबसे विष्वस्त रक्षा साझेदार मानता है। भारत को रक्षा उपकरणों और उनके उत्पादन में फ्रांस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राश्ट्रपति इमैनुएल मै्रकों की यात्रा के दौरान दोनों देषों के बीच 14 समझौते हुए हैं और इनमें फ्रांस और भारतीय सेना के बीच लॉजिस्ट्क सहयोग सबसे अहम है। प्रशांत महासागर (इंडो पैसेफिक) में चीन की बढती सक्रियता से चिंतित भारत को ऐसे शक्तिशाली दोस्त के सहयोग की दरकार थी जिसकी इस क्षेत्र में बडी उपस्थिति हो। भारतीय नौसेना की प्रशांत महासागर में न के बराबर उपस्थिति है जबकि फ्रांस अभी भी इस क्षेत्र में बहुत बडी शक्ति है हालांकि उसकी नौसेना उत्तरोतर कमजोर होती जा रही है। इस क्षेत्र का बहुत बडा इलाका फ्रांस के पास है और अगर वह अपनी नौसेना की ताकत को भारत के साथ साझा करता है, तो इसमें उसका भी फायदा है और भारत का भी। इस समय प्रशांत महासागर में अमेरिका की सैन्य शक्ति में पहले जैसा दम-खम नहीं रहा है। इन हालात में भारत और फ्रंास के पास एक दूसरे के साथ सहयोग करने के सिवा कोई चारा नही है। भारत ने अमेरिका के साथ भी सैन्य लॉजिस्टिक (लमोआ- लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) साझा करने का समझौता कर रखा है। इसके तहत भारत और अमेरिका एक-दूसरे के साथ सैन्य लॉजिस्टिक को साझा कर सकते हैं। और अब फ्रांस के साथ लॉजिस्टिक समझौता होने से भारत प्रषांत महासागर में सुखद स्थिति में आ गया है। फ्रांस ने अपने सैनिक अड्डे भारतीय सेना के लिए खोल दिए हैं। रक्षा क्षेत्र के अलावा पर्यावरण पर भी भारत और फ्रांस के बीच सहयोग बढा है। जलवायु परिवर्तन पर अमेरिका द्वारा अपनी प्रतिबद्धता से हाथ खींच लेने के बाद इस क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस की भूमिका बढी है। दोनों देषों ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को साझा करते हुए इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढाने के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई है। फ्रांस के पास पर्यावरण को लेकर उन्नत तकनीक है और इसके सहयोग से भारत पर्यावरण और जलवायु से जुडी समस्याओं का निदान कर सकता है। फ्रांस सोलर उर्जा में भी भारत को तकनीकी मदद दे सकता है। भारत में दुनिया के सबसे विषाल न्युक्लियर पॉवर संयत्र को स्थापित करने में भी फ्रांस सहयोग करेगा। 2016 में फ्रांस के तत्कालीन राश्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांदे ने इस संयत्र को लगाने में सहयोग का ऐलान किया था। यह सहयोग भारत और फ्रांस के बीच पक्की दोस्ती की मिसाल है।
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