गुरुवार, 15 मार्च 2018

महान विज्ञानी स्टीफन हाकिंग

21 साल  की  बाली उमर में अगर कोई  एक दिन अचानक लडखडा जाए और उसे पता चले कि वह दो-तीन साल से ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाएगी, ऐसे व्यक्ति की तो दुनिया ही उजड जाएगी। यह जाने-माने भौतिकविद  स्टीफन हॉकिंग की कहानी है जिन्हे्  अल्बर्ट  आइइंस्टीन  के बाद दुनिया का  दूसरा विलक्षणतम विज्ञानी माना जाता है।  स्टीफन हॉकिंग के देहांत से विज्ञान जगत में वही  शून्य भर आया है जो 1955 में आाइस्टीन के निधन से उत्पन्न हुआ था। 21 वर्ष   की आयु में  स्टीफन हॉकिंग को बताया गया कि वे मोटर न्यूरॉन रोग (एमएनडी) से पीडित हैं और दो-तीन साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे। एमएनडी एक ऐसी अससाधारण स्थिति है जिसमें दिमाग और तांत्रिक प्रकिया धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं। शरीर कमजोर होने लगता है और समय के साथ बीमारी बढती जाती है।  एमएनडी का  शुरु में पता नहीं चलता और इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। यह जानलेवा बीमारी उमर को छोटा कर देती है और इससे पीडित व्यक्ति लंबी आयु तक नहीं जी सकता। मगर स्टीफन हॉकिंग भाग्यशाली रहे।  इस जानलेवा बीमारी से उनका शरीर लकवाग्रस्त हो गया और उन्हें व्हीलचेयर से बंधे रहने के लिए विवश  कर दिया। इसी कारण हॉकिंग को उन्नत उपकरणों और कंप्यूटर के जरिए संवाद करना पडता था। इस संघर्षपूर्ण   जीवन के बावजूद  हॉकिंग ने 76 साल की आयु का सफर तय किया । बुधवार  प्रातकाल उनका निधन हो गया। समकालीन दौर के सबसे चर्चित विज्ञानी, हॉकिंग का भौतिक विज्ञान में बहुत बडा योगदान है। भौतिक विज्ञान में स्नातक डिग्री हासिल करने के बाद  हॉकिंग ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ख्यातिप्राप्त कोस्मोलॉजिस्ट डेनिस स्काइमा के निर्देश
न में पीएचडी की। इस दौरान हॉकिंग को पता चला कि मोटर न्यूरॉन रोग ने उन्हें जकड लिया है। हॉकिंग ने हिम्मत नहीं हारी। यह वह जमाना था जब वैज्ञानिक ब्लैक होल और जेनरल रिलेटिविटी (सामान्य सापेक्षता) मे गहरी दिलचस्पी दिखा रहे थे। ब्लैक होल ने हॉकिंग का ध्यान भी खींचा और उन्होंने इस पर अपनी रिसर्च  आरंभ  कर दी। इससे उनकी असाधारण प्रतिभा का भी पता चला।   स्काइमा के निर्देशन में हॉकिंग ने बिग बैंग थ्योरी पर काम करना  शुरू र कर दिया। हॉकिग ने प्रतिपादित किया कि ब्लैक होल का उलटा पतन ही बिग बैंग है। 1970 में हॉकिंग एमएनडी के कारण  शैयाग्ग्रस्त हो गए  और उनका चलना-फिरना भी  मुश्किल  हो गया थ। इसके बावजूद हॉकिग  जिंदगी  से लड़ते रहे । उन्होंने  ख्यातिप्राप्त भौतिक विज्ञानी रोजर पेनरोस के साथ मिलकर गहराई से रिसर्च की।  1970 में अपने षोधपत्र में हॉकिंग ने सिद्ध किया कि सामान्य सापेक्षता के  स्पष्ट  मायने है कि ब्रह्मांड ब्ळैक होल के केन्द्र से ही षुरु होता है और इसका आकार कभी घटता नहीं है। यह हमेषा बढता रहता है। ब्लैक होल के निकट जाने वाली कोई भी वस्तु बच नहीं सकती और इसमें समा जाती है। इससे ब्लैक होल का वजन बढता रहता है। हॉकिंग ने यह भी बताया कि ब्लैक होल को छोटे ब्लैक होल्स में  विभाजित नहीं किया जा सकता।  भौतिक विज्ञान के अलग-अलग  विषयों - क्ंवाटम थ्योरी, जेनरल रिलेटिविटी,  ब्रह्माड विज्ञान, सूचना सिद्धांत और थ्रमोडायनामिक्स  को भी हॉकिंग एक साथ ले आए । अब तक कोई भी वैज्ञानिक ऐसा नहीं कर पाया था। क्ंवाटम थ्योरी में परमाणु जैसी सुक्ष्म से सुक्ष्म चीजों का विवरण दिया जाता है। सामान्य सापेक्षता ( जनरल रिलेटिविटी“ ) के सिद्धांत तारों और आकाशगंगाओं आधारित ब्रह्माडीय  विषयों  का सार है।  शारीरिक तौर पर पंगु होते हुए भी स्टीफन हॉकिंग उन विलक्षण वैज्ञानियों मं शुमार है जिन्होंने दुनिया को बहुत कुछ दिया है। इस महान भौतिकविद को नोबेल सम्मान से महरुम रखना इस अवार्ड  का ही अपमान है।