गुरुवार, 29 मार्च 2018

शीत युद्ध की वापसी ?

 रुस के पूर्व जासूस  सर्गेई स्क्रिपल जहर  प्रकरण से रुस और पश्चिम  देशोँ  के बीच तनाव दिन-ब-दिन बढता ही जा रहा है। शीत युद्ध जैसे हालात पैदा होते दिख रहे हैं।  रुस पर ब्रिटेन के सैलस्बरी में सपरिवार रह रहे पूर्व  जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया को जहर देकर हत्या के लिए रासनायिक हथियार (तंत्रिका एजेंट)  के इस्तेमाल के आरोप हैं।  सर्गेई स्क्रिपल  मार्च के पहले सप्ताह सैलस्बरी के एक शॉपिंग  माल में बेंच पर बेहोश  पडा मिला था। डॉक्टरी  मुआयने से पता चला था कि उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया गया।  स्क्रिपल रुस का पूर्व  जासूस होने के साथ-साथ ब्रिटेन की मिल्ट्री इंटेलीजेंस एमआई 16 का डबल एजेंट भी रह चुका था।  स्क्रिपल की हत्या प्रयास का संदेह रुस पर  जाना स्वभाविक था। सर्गेई स्क्रिपल मूलतः रुसी सेना का जासूस था मगर डबल क्रास  करने के लिए उसे देशद्रोह में जेल की सजा हुई थी। 2010 में “जासूसों (स्पाई) की अदला-बदली के तहत  स्क्रिपल ब्रिटेन लाया गया और उसके बाद वह  सैलस्बरी में सैटल हो गया।  जहर प्रकरण से क्षुब्ध ब्रिटेन के साथ-साथ अमेरिका, कनाड समेत पश्चिम  के बीस से ज्यादा देश अब तक 140 से ज्यादा रुसी राजनयिकों को निष्कासित  कर चुके हैं। राजनयिकों को निष्कासित करने वाले मुल्कों में रुस के साथ वॉरसा पेक्ट में  शामिल रहे  पोलेंड और हंगरी भी  शामिल है। नाटो ने भी रुस के सात राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। इन सब पर जासूसी करने का संदेह है। इतने बडे पैमाने पर राजनयिकों के निष्कासन  का यह अपने आप में रिकॉर्ड  है। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने इन राजनयिकों को अब तक का सबसे बडा सामूहिक निष्कासन  बताया है। पश्चिम देशों  के बीच इस एकता से रुस को झटका लगा है और वह अलग-थलग पड गया है। साठ के दशक में तत्कालीन सोवियत संघ और पश्चिम देशों के बीच जब तनाव चरम पर था, उस दौरान इतने बडे पैमाने पर राजनयिकों को निष्कासित  किया गया था। द्धितीय युद्ध के बाद से 1990 तक की अवधि को षीत युद्ध का दौर माना जाता है। इस दौरान पूरी दुनिया दो धु्रवों में बंटी हुई थी। एक का नेतृत्व अमेरिका और दूसरे का तत्कालीन सोवियत संघ कर रहा था। उस दौर में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनावपूर्ण  संबंधों को षीत युद्ध कहा जाता था। ताजा प्रकरण में रुस ने अमेरिका पर सहयोगी देशों  पर  राजनयिकों को निष्कासित  करने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। मगर सच्चाई यह है कि यूरोप के देशों  ने स्क्रिपल प्रकरण पर जबरदस्त एकता दिखाई है। तथापि अभी भी  ऐसे सवाल   हैं जो जवाब मांग रहे हैं। सबसे अहम और बडा  प्रश्न   यह है कि  राष्ट्रपति  चुनाव से एक सप्ताह पहले रुस पूर्व  जासूस की हत्या का प्रयास क्योंकर करेगा और वह भी 8 साल का लंबा समय गुजर जाने के बाद? स्क्रिपल कई सालों से ब्रिटेन के सैलस्बरी में रिटायरमेंट की जिंदगी जी रहा था। इस स्थिति में रुस को ऐसे व्यक्ति को मार कर क्या मिलता, जो पूरी तरह से निष्क्रिय  था।  और  अगर रुस को तंत्रिका एजेंट का इस्तेमाल करके हत्या करनी ही थी, तो यह काम पहले भी किया जा सकता था?  यह सवाल भी उठ रहा है कि  रुस का पूर्व  जासूस सैलस्बरी में क्यों रह रहा था और क्या वह अब भी ब्रिटेन के लिए जासूसी कर रहा था? ब्रिटेन पर नोविचोक (तांत्रिक) एजेंट को जमा करना का भी आरोप है। सोवियत संघ-रुस  ने 1971 और 1993 के दरम्यान  नोविचोक एजेंट को विकसित किया था और इसे घातकतम तंत्रिका एजेंट माना जाता है।  बहरहाल, इन सब प्रश्नो  के जवाब पाने के लिए उच्च स्तरीय जांच की जरुरत है। परमाणु युद्ध और प्रर्यावरण संकट के कगार पर खडे  विश्व  को अमन और चैन की दरकार है।