प्रधानमंत्री और कांग्रेस एप डेटा लीक को लेकर भारतीय जनता पार्टी और ग्रांड ओल्ड पार्टी में घमासान चल रहा है। साइबर सुरक्षा मामलों पर खोज करने वाले फ्रांस के इलियट एल्डरसन ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अधिकृत एप से लोगों की निजी गोपनीय जानकारी अमेरिका स्थित थर्ल्ड पार्टी के साथ साझा की जा रही है। शनिवार को इलियट एल्डरसन के छदम नाम से प्रधानमंत्री के एप बारे कई टवीट पोस्ट किए गए। इनमें बताया गया कि जैसे ही कोई यूजर प्रधानमंत्री के सरकारी एप पर प्रोफाइल डालता है, तमाम जानकारियां (ओएस, नेटवर्क, कैरियऱ) तथा नाम, फोटो, लिंग और ईमेल जैसी व्यक्तिगत जानकारिया स्वतः इन.डब्ल्यूजेडाारकेटी नाम के डोमेन पर लोड हो जाती है। यह डोमेन अमेरिका में “क्लेवर टेप“ नाम की कंपनी द्वारा संचालित की जाती है। कंपनी ने अपने प्रोफाइल में खुद को नेक्सट जेनेरेशन एप इंगेजमेंट प्लेटफार्म बताया है। कंपनी विपणन संस्थाओं को डेटा मुहैया कराती है। भाजपा ने भी माना है कि प्रधानमंत्री के ऐप की जानकारी “स्थिति विशेष संदर्भ“ में विश्लेषण के लिए शेयर की जाती है। यानी लोगों का व्यक्तिगत डेटा प्रधानमंत्री के ऐप से शेयर किया जाता है। इस खुलासे के सार्वजनिक होते ही कांग्रेस “बल्लियां उछल पडी“ और प्रधानमंत्री पर ताबड तोड प्रहार करने शुरु कर दिए। मगर कांग्रेस की यह उछल-कूद थोडी देर में काफूर हो गई। इससे पहले कि पार्टी कार्यकर्ता अध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर प्रधानमंत्री के एप को हटाते, कांग्रेस को अपना ही “विद आईएनसी“ एप को हटाना पडा। दरअसल, प्रधानमंत्री एप से संबंधित खुलासे के साथ-साथ एल्डरसन सोमवार को यह खुलासा भी किया कि कांग्रेस पार्टी के एप का डेटा सिंगापुर से संचालित होता है। कांग्रेस की सदस्यता का डेटा जिस लिंक (मेंबरशिप आईएनसी .इन) पर जाता है, वह सिगापुर स्थित सर्वर में फीड और सेव किया जाता है। इसकी एनकोडिंग जिस बेस (64) से की जाती है, वह एन्क्रिप्टेड नहीं है और इसे डिकोड करना आसान है। जाहिर है इस डेटा को कोई भी डाउनलोड कर सकता है। कांग्रेस अपने ही बिछाए जाल में फंस गई। एल्डरसन के खुलासे के बाद कांग्रेस को तुरंत अपना एप डिलीट करना पडा और ऑनलाइन मेंबरषिप साइट भी बंद करनी पडी। भाजपा ने तो यहां तक कह दिया को कांग्रेस का डेटा नक्सलियों, पत्थरबाजों, अलगाववादियों, चीनी दूतावास और कैंब्रिज एनालिटिका को दिया जा रहा है। बहरहाल, सियासी दलों को ऊल-जलूल के मुद्दे ऊछालने की बुरी लत है। देश के समक्ष गंभीर चुनौतियां मुहं फैलाए खडी हैं मगर देश के दो प्रमुख दल बेकार की बातों में समय बर्बाद कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश का तेजी से डिजिटाइजेशन हो रहा है। मगर यह भी सच है की लोगों की निजता से जुडे डेटा के दुरुपयोग को लेकर हाल ही में भारत ही नहीं, अमेरिका और इग्लैंड में भी बवाल मचा हुआ है । पिछले सप्ताह कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की गर्ज से फेसबुक से डेटा चोरी करने का मामला सामने आया था। भारत में भी इस कंपनी का उपक्रम है। यह कंपनी भाजपा और जनत दल (यू) के चुनाव अभियान से जुडी रही है। इसलिए, इस सूचना से देश के राजनीतिक हलकों में खासी हलचल हुई है। आधार डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर भी देश में तरह-तरह की बातों हो रही है। देश को तेजी से आगे बढना है, तो डेटा की जरुरत तो पडेगी ही मगर इनकी पुख्ता सुरक्षा के लिए राजनीतिक दलों को मिलकर समाधान निकालना चाहिए।
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