रविवार, 4 मार्च 2018

चीन से आगे निकलता भारत

घोटाला-दर-घोटाले से त्रस्त देष के लिए यह अच्छी खबर है कि भारत फिर से  तेज रफ्तार से ग्रो करने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है और देष ने चीन को फिर पीछे छोड दिया है। बुधवार को केन्द्रीय सांख्यिकी संस्था (सीएसओ) द्वारा जारी आंकडों के अनुसार 2017-18 की अक्टूबर-दिसबर तिमाही के दौरान भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.2 फीसदी की रफ्तार से बढा है। इस दौरान चीन के सकल घरेलू उत्पाद की तिमाही ग्रोथ 6.8 फीसदी रही है। यानी भारत से दषमलव 4 फीसदी कम।  जुलाई-सितंबर की तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.6 फीसदी थी। जीडीपी में एक तिमाही  (अक्टूबर-दिसबर) में दषमलव 6 फीसदी की वृद्धि के स्पश्ट मायने है कि नवंबर 2016 की नोटबंदी और तदुपंरात हडबडी में लागू जीएसटी से उत्पन्न जटिलताएं जाती रही है और  अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड ली है। अक्टूबर-दिसबर तिमाही की जीडीपी ग्रोथ ने विषेशज्ञों के आकलन को भी धराषायी कर दिया है। अंतरराश्ट्रीय एजेंसी रायटर ने वित्तीय साल 2017-18 की तीसरी तिमाही की जीडीपी ग्रोथ को 6.9 के आसपास आंका था, मॉर्गन स्टेनली ने 7 फीसदी। तिमाही ग्रोथ इन आकलनों से अधिक रही है।  ताजा आंकडों  के दृश्टिगत सीएसओ का आकलन है इस साल जीडीपी ग्रोथ दर 6.6 फीसदी हो सकती है। जनवरी में सीएसओ का आकलन था कि इस साल वार्शिक जीडीपी ग्रोथ  6.5 फीसदी रहेगी।  इस साल की जीडीपी की  वार्शिक ग्रोथ 2017 की तुलना में कम है। मार्च  2017 को समाप्त हुए वित्तीय साल में जीडीपी की वार्शिक ग्रोथ 7.1 फीसदी रही थी। इससे यह संकेत मिलते हैं कि मार्च 2018 को समाप्त हो रहे वित्तीय साल में जीडीपी ग्रोथ पिछले साल से कम रह सकती है।  जनवरी-मार्च तिमाही में 7.2 या इससे कुछ अधिक की ग्रोथ भी 2018 में वार्शिक ग्रोथ (6.6) 2017 की 7 फीसदी ग्रोथ को पार नहीं कर सकती। इस स्थिति में यह प्रष्न उठना स्वभाविक है कि वित्तीय साल 2018 में ऐसा क्या हो गया है कि जीडीपी की वार्शिक ग्रोथ साल 2017 से आगे नहीं बढ पा रही है। जाहिर है आनन-फानन में लागू जीएसटी ने जीडीपी ग्रोथ को प्रभावित किया है। सरकार ने खुद माना है कि अक्टूबर, नवंबर में जीएसटी राजस्व में गिरावट आई थी हालांकि दिसंबर में इसमें कुछ इजाफा हुआ है मगर जनवरी में इसमें फिर गिरावट आई है। साफ है जीएसटी की जटिलताएं अभी भी उत्पादकों, कारोबारियों  का पीछा नहीं छोड रही है। मगर सच यह भी है कि हर क्रांतिकारी कदम में षुरुआती अडचनें आती हैं। जीएसटी के अलवा मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ अभी भी चिंता का विशय है। फरवरी में इस सेक्टर की ग्रोथ चार माह में सबसे कम रही है। मगर इंफरास्ट्रक्चर सेक्टर में 6.7 फीसदी ग्रोथ कुछ राहत प्रदान करती है।  जीडीपी ग्रोथ की तेज रफतार में अभी भी कई अवरोधक हैं और जब तक इन्हें पूरी तरह से हटाया नहीं जाता, ग्रोथ में  भारत का चीन को पछाडने का सपना पूरी तरह से साकार नहीं हो सकता। चीन कई मामलों में हमसे कहीं आगे है। प्रदूशण से बचने के लिए पेट्रोल-डीजल का विकल्प तैयार करना इस समय दुनिया के समक्ष सबसे बडी चुनौती है। न केवल प्रदूशण से बचने के लिए, अलबत्ता विदेषी मुद्रा बचाने के लिए भी। फ्यूल खपत के मामले में भारत दुनिया का चौथा सबसे बडा देष है और चीन दूसरा। चीन की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति पेट्रोल-डीजल खपत काफी कम है मगर चीन तेजी से पॉवर से चलने वाली (इलेक्ट्रिक) कार की ओर बढ रहा है। चीन ने  इलेक्ट्रिक कार को प्रोत्साहित करने के लिए 2020 तक पूरे देष में 1,20,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेषन स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। भारत इस मामले में काफी पीछे है। अक्टूबर-दिसंबर की ग्रोथ मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर है मगर अभी काफी कुछ करना बाकी है। अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार को और गति देने के लिए क्रांतिकारी  नीतिगत फैसले लेने की जरुरत है।