शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

बोफोर्स से रफाल तक

देष की सुरक्षा और अखंडता से जुडे राश्ट्रीय सरोकारों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए मगर सियासी दल इस राश्ट्रहित की इस अपरिहार्यता को भी मानने को तैयार नहीं है। देष की सुरक्षा के मुद्दों की ज्वाला भडका कर उसकी तपन में राजनीतिक रोटियां सेंकना तो जैसे भारतीय राजनीति का अंतरंग हिस्सा बन चुका है। बोफोर्स  तोप सौदा , कारगिल ताबूत खरीद , राजग सरकार के समय 24,000 करोड रु का रक्षा सौदा, अगस्ता वेस्टलैंड सौदा और अब रफाल लडाकू विमान सौदा, इन सब में विपक्ष (कांग्रेस हो या भाजपा)  को “घोटाले की बू“ आती है। कांग्रेस जब सत्ता में थी, तब भाजपा को बोफोर्स  और अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में भारी घोटाला नजर आता था। कांग्रेस को पहले कारगिल ताबूत सौदे पर और अब रफाल सौदे में घौटाले की “बू“ आ रही है।  बोफोर्स घोटाले का “भूत“  कांग्रेस का आज भी पीछा कर रहा है। सीबीआई ने 12 साल बाद पिछले सप्ताह ही सुप्रीम कोर्ट में 2005 के दिल्ली हाई कोर्ट  के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है। दिल्ली हाई कोर्ट  ने बोफोर्स सौदे में सीबीआई द्वारा  एफआईआर को निरस्त कर दिया था। इससे कांग्रेस को भारी राहत मिली थी।  इस मामले का रोचक पहलू यह है कि सरकार के अटार्नी जनरल ने सीबीआई को इतने लंबे समय बाद याचिका दायर करने के औचित्य पर सवाल उठाया था। जाहिर है सीबीआई ने वही किया जो उसे करने के लिए कहा गया। कारगिल ताबूत और 24,000 करोड के रक्षा सौदे में सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में राजग सरकार को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। इन मामलों में 2004 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। 3700 करोड रु के अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद मामले में संप्रग सरकार के किसी नेता का नाम तो सामने नहीं आया मगर पूर्व वायु सेनाध्यक्ष एसपी त्यागी और उनके चचेरे भाई को संजीव त्यागी को प्रमुख आरोपी  मानते हुए  सीबीआई ने दोनों को ं जुलाई, 2017 में गिरफ्तार भी किया था। सीबीआई की जांच का आकलन है कि इस सौदे में 450 करोड रु की घूस दी गई थी।  रफाल विमान खरीद प्रकिया संप्रग सरकार ने 2010 में षुरु की थी। तब एक रफाल विमान की कीमत  526 करोड रु थी और अब यह बढकर 1570 करोड रु तक पहुंच गई है। 2012 से 2015 तक भारत और फ्रांस के बीच इस सोदे को लेकर बातचीत चलती रही।  मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद 2016 में  फ्रांस से 36 रफाल खरीदने के लिए 59,000 करोड रु का करार किया गया। कांग्रेस को इस बात पर ऐतराज है कि सरकार इस सौदे की पूरी जानकारी नहीं देकर बहुत कुछ छिपा रही है। मगर सच यह भी है कि काग्रेस ने भी सत्ता में रहते हुए किसी भी सौदे की जानकारी षेयर नहीं की है। बहरहाल, रफाल दुनिया का सबसे तेज और आक्रामक लडाकू विमान है। इसकी रफ्तार 2020 प्रति घंटा है। यानी यह विमान एक घंटे में दिल्ली से पाकिस्तान के क्वेटा और वापस दिल्ली का सफर तय कर सकता है। मूलतः रफाल मिराज 2000 का एडवांस वर्जन है। भारतीय आयु सेना के बेडे में इस समय 52 मिराज 2009 विमान हैं। इस विमान में हवा में भी तेल भरा जा सकता है। रफाल की सबसे बडी खासियत इस विमान की परमाणु मिसाइल डिलिवरी और अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल की क्षमता है जो इस विमान को औरों से विलक्षण बनाती है। इस विमान के मिलने से भारतीय वायु सेना की मारक (कंबेट) क्षमता और ज्यादा बढ जाएगी। इस विमान की इन खासियतों के कारण ही कांग्रेस नीत संप्रग ने रफाल खरीद प्रकिया षुरु की थी। सरकार पर नकेल डाले रखना  विपक्ष का काम है मगर इसकी भी सीमा और मर्यादा होती है। सुरक्षा से जुडे मामलों को इन सब बातों से ऊपर रखा जाना चाहिए और इस तरह के सौदे की पारदर्षिता सुनिष्चित करने के लिए विषेशज्ञों की समिति गठित की जानी चााहिए।