सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

अमेरिका में शट डाउन के मायने

दुनिया की सबसे बडी अर्थव्यवस्था और ताकतवर मुल्क अमेरिका में पिछले  शुक्रवार को थोडे समय के लिए  फिर सरकारी कामकाज ठप्प रहा हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। इस साल ऐसा दूसरी बार हुआ। इससे पहले जनवरी में भी अमेरिकी सरकार का कामकाज तीन दिन तक ठप्प रहा था। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा समय पर बजट पारित नहीं करने के लिए यह स्थिति उत्पन्न हो रही है। अस्थायी संघीय बजट की मियाद वीरवार रात को पूरी हो रही थी और सरकार को अपना खर्चा चलाने के लिए देर रात् कांग्रेस की मंजूरी मिलनी जरुरी थी मगर ऐसा नहीं हो सका। कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिलने से वीरवार देर रात से ही शट डाउन  शुरु हो गया मगर शुक्रवार सुबह हाउस ऑफ रेप्रेरेजेंटेटिव  की मंजूरी मिलने से सरकार का कामकाज पटरी पर लौट आया।  राष्ट्रपति  के हस्ताक्षर होते ही सरकार को बजट मिल जाएगा। जनवरी में तीन दिन के शट डाउन के बाद कांग्रेस के दोनों सदनों ने अस्थाई बजट पारित किया था।  वीरवार को फिर से अस्थायी बजट को कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक  थी मगर यह  शुक्रवार सुबह मिली। ताजा अस्थायी बजट 23 मार्च तक मान्य रहेगा, इसके बाद फिर बजट को कांग्रेस की स्वीकृति की दरकार होगी।  संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार अमेरिका का बजट हर साल अक्टूबर से पहले-पहले पारित हो जाना चाहिए। अमेरिका में सरकार के वित्तीय  वर्ष  की शुरुआत पहली अक्टूबर से होती है और यह 30 सितंबर तक चलता है। बजट कांग्रेस के दोनों सदनो -  हाउस ऑफ रेप्रेरेजेंटेटिव  एवं सीनेट- द्वारा पारित किया जाना चाहिए। मगर इस बार कांग्रेस समय पर बजट पारित नहीं कर पाई। डेमोक्रेट और  रिपब्लिकन  के बीच कई मामलों पर सहमति नहीं होने से बजट में विलंब हो रहा है। ऐसा पहले भी हो चुका है कि कांग्रेस समय सीमा के भीतर बजट को पारित नहीं कर पाई और बजटीय प्रावधानों पर सौदेबाजी नए वित्तीय साल तक चलती रही। सरकार का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए संघीय एजेंसियों को अस्थाई बजट मुहैया कराया जाता है। लेकिन इस बार कांग्रेस में अस्थायी बजट पर भी सहमति नहीं बन पाई। सतारूढ दल रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों (सेनेटर्स) भारी राजकोषीय  घाटे का मुखर विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को अगर  डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद अस्थायी बजट का समर्थन नहीं करते, शट डाउन जारी रह सकता था।  रिपब्लिकन पार्टी  अब तक राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने की प्रबल पैरवीकार रही है। राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप ने इस सोच को बदल डाला है।  राष्ट्रपति   दिल खोलकर खर्च  कर रहे है और ट्रम्प का “मेक अमेरिका ग्रेट“ वाली सोच सर चढ कर बोल रही है।  अमेरिका का कर्ज बोझ  20 खरब डॉलर से ज्यादा पहुंच गया है । दिसंबर में पारित टेक्स बिल से अगले दस सालों में अमेरिका का कर्ज 1.5 खरब डालर और बढ जाएगा। वित्तीय  विशेषज्ञों  का आकलन है कि तीन-चार दिन के शट डाउन से भी अर्थव्यवस्था को खासा  नुकसान हो सकता है।  बढते कर्ज और राजकोषीय  घाटे के  दृष्टिगत  इसकी भरपाई आसान नही है। 2013 में भी अमेरिका में 16 दिन तक शट डाउन रहा था।  तब सकल घारेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.25 फीसदी की गिरावट आई थी। लगभग 2 अरब डालर की उत्पादकता प्रभावित हुई थी। नेशनल पार्कों को 500 मिलियन डालर की आय से हाथ धोना पडा था। दो सप्ताह के शट डाउान से 1 लाख, 20 हजार रोजगार अवसर डूब गए थे। 4 अरब डालर टैक्स रिफंड में विलंब हुआ था। शुक्र है शुक्रवार को शट डाउन जल्द खत्म हो गया वरना इसका असर बाजार पर बहुत बुरा पडता। समूचे  वैश्विक   बाजार में उथल-पुथल मची हुई   है। वीरवार को वॉल स्ट्रीट के एस एंड पी 500 में 3.8 फीसदी की गिरावट दर्ज  हुई थी। बहरहाल, अमेरिका को 23 मार्च तक राहत तो मिल गई है मगर यह अस्थायी व्यवस्था ज्यादा देर तक नहीं चल सकती। अब कल्पना कीजिए अगर इंडिया में यह स्थिति आती है तो क्या होगा?