जम्मू- कश्मीर में हालात दिन-ब-दिन और ज्यादा बिगडते जा रहे हैं। मंगलवार को राजधानी श्रीनगर के हाई सिक्युरिटी जोन स्थित महाराजा हरि सिंह अस्पताल से चरमपंथी लश्कर -ए-तैयबा के खूंखार आतंकी नवेद जट को सुरक्षाकर्मियों से छुडा कर फरार हो गए। इस आतंकी हमले में दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए। यह घटना कश्मीर में हालात की गंभीरता को बयां करती है। श्रीनगर सेंट्रल जेल से आतंकी समेत छह कैदियों को तीन पुलिसकर्मी बख्तरबंद वाहन में उपचार के लिए अस्पताल लाए थे। अस्पताल की पार्किंग में दो आतंकियों का मौजूद रहना, आतंकी नवेद को पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में पिस्तौल थमाया जाना और दो पुलिसकर्मियों को गोली मारकर हथकडी में आतंकी का दिन-दहाडे फरार हो जाना साफ बताता है कि कैदियों की सुरक्षा में भारी चूक हुई है। दो आतंकियों का अस्पताल में पहले से मौजूद रहना भी यही साबित करता है कि आतंकियों को पुलिस के हर कदम की पल-पल की जानकारी थी। सेंट्रल जेल से आतंकी नवेद समेत कैदियों को अस्पताल कब और कैसे लाया जाएगा, इसकी आतंकियों को पुख्ता जानकारी थी। इससे यही पता चलता है कि राज्य में आतंकियों का पुलिस और प्रषासन में भी पुख्ता नेटवर्क है। बहरहाल, कशमीर में स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और अब मोदी सरकार की कष्मीर नीति की प्रासंगिकता पर ही सवाल खडे किए जा रहे हैं। मोदी षासन के चार साल में जम्मू-कष्मीर में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार के बावजूद हालात सुधरने की बजाए और बिगडे है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि गठबंधन सरकार में शामिल पीडीपी और भाजपा में सत्ता की भूख के अलावा कुछ भी साझा नहीं है। पीडीपी अलगाववाद सोच भाजपा की खालिस राष्ट्रवादी सोच से एकदम भिन्न है। पीडीपी कश्मीर से अफ्सपा (आर्मड फोर्सिस स्पेषल पावर्स एक्ट) और सेना दोनों के हटाने की प्रबल समर्थक है। भाजपा जम्मू-कश्मीर में सेना और अफ्सपा दोनों को हर हाल में बनाए रखने के पक्ष में है। भाजपा अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की सबसे बडी पैरवीकार है, पीडीपी के लिए यह व्यवस्था जीवन-मरण का मुददा है। अनुच्छेद 370 को हटवाना भाजपा-आरएसएस का पुराना एजेंडा है और इसी कारण कष्मीर की अवाम भाजपा की अच्छी नीयत को भी संदेह की नजर से देखती है। पीडीपी का भाजपा से सत्ता के लिए हाथ मिलाना भी अवाम को रास नहीं आया है और इन घटनाक्रमों से कष्मीर में अलगाववाद और ज्यादा पनपा है। इतिहास इस बात का गवाह है कि सत्ता की भूख सिर्फ बर्बादी ही लाती है। एक-दूसरे से एकदम विपरीत राज्य की सत्ता के भागीदारों की खींचतान का जम्मू-कष्मीर में हालात बिगाडने में बडा योगदान रहा हैं। इससे सुरक्षा कर्मियों की षहदत भी जाया जा रही है। कष्मीर की सबसे बडी पीडा यह है कि लगभग सभी सरकारें घाटी में स्वायत्ता और आजादी की आवाज को पाकिस्तान प्रायोजित चष्मे से आकलन कर उसी अनुरुप नीति निर्धारण करती रही है। और मोदी सरकार तो पूरी षिद्दत से यह स्थापित करने में लगी है कि कष्मीर में जो कुछ भी हो रहा है, वह पूरी तरह से पाकिस्तान की षह पर हो रहा है। इस तरह की मानसिकता में कष्मीर समस्या के आंतरिक और ऐतिहासिक कारणों को पूरी तरह से नजरादंाज किया जा रहा है। इस स्थिति में कष्मीर को लेकर नीति निर्धारण में असंमजस और दुरुहता का समावेष स्वभाविक है। मोदी सरकार एक तरफ आतंकियों का जड से खात्मा करने के प्रति प्रतिबद्धता जताती है, तो दूसरी तरफ सभी पक्षों से बातचीत की बात करती है। मौजूदा वार्ताकार दिनेष्वर षर्मा भी इसी असमंजस से जूझ रहे हैं। कष्मीर के मौजूदा हालात के दृश्टिगत केन्द्र और राज्य सरकार को फौरन ठोस कदम उठाने की जरुरत है। सभी पक्षों से बातचीत से ही समस्या का हल सभंव है और अगर बातचीत उच्च से उच्चतम स्तर पर करनी पडे, तो इसे प्रतिश्ठा का प्रष्न नहीं बनाया जाना चाहिए। देष की अखंडता सर्वोपरि होती है।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






