बालीवुड की दिव्या श्रीदेवी नहीं रहीं। सुरमयी अंखियों वाली भारतीय फिल्म जगत की पहली फीमेल सुपरस्टार के शनिवार रात दुबई में आकस्मिक निधन से पूरा देश स्तब्ध रह गया। श्रीदेवी के न होने की खबर फैंस को इतना असहज कर रही है कि सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने वालों के शब्दों में “ दर्द और पीडा“ साफ-साफ पढी जा सकती है। अपने अदभुत अभिनय से करोडों दिलों पर राज करने वाली “रुप की रानी” , “ख्बाबों की षहजादी, चांदनी की “जुदाई“ अविस्मीय और अपूर्णीय है। श्रीदेवी जैसा कलाकार दूसरा हो नहीं सकता। फिल्मी हों या असली, उन्होंने जो भी किरदार निभाए हैं, वे सिर्फ श्रीदेवी ही कर सकती थीं। उनके अभिनय की शोहरत पाकिस्तान, जापान और सिंगापुर तक फैली हुई थी। नब्बे के दशक में भारत तो क्या पाकिस्तान में भी श्रीदेवी के अभिनय का जादू इस कद्र सिर चढ कर बोलता था कि यूनिवसर्टी के लौंडे अपने कमरों में सबसे पहले श्रीदेवी का पोस्टर चिपकाते हालांकि उस समय पाकिस्तान में भारतीय फिल्में देखने पर प्रतिबंध था और पकडे जाने पर छह माह तक की कैद की सजा दी जाती थी। मगर श्रीदेवी के सम्मोहन में लौंडे यह सजा भुगतने को भी तैयार रहते। यहां तक कि पुलिसकर्मी और सैनिक चुपके-चुपके वीसीआर उधार लेकर श्रीदेवी की फिल्में देखते। सिंगापुर मे एक रेस्तरां में श्रीदेवी जैसी डॉल रखने और उसका नाम उन पर रखने की वजह से मशहूर हो गया । यह वह जमाना था जब सिनेमा के सितारों को आसमान में चमकने वाले सितारों की तरह देखा जाता। तब श्रीदेवी आसमान में सबसे ज्यादा चमकने वाला सितारा थी। उनमें न केवल गजब के अभिनय की क्षमता थी, अलबता दर्शक उनके नृत्य के कायल थे। वैसे दक्षिण भारत की अभिनेत्रियों में नृत्य की अद्धितीय प्रतिभा रही है। पहले वैजयंती माला, फिर हेमा मालिनी। श्रीदेवी ने इस परंपरा का बखूबी निभाया। जब वे अपने कैरियर के शिखर पर थी, श्रीदेवी ने 15 साल का बेक्र लेकर घर-गृहस्थी जमाई। बतौर पत्नी, मां और बहू का असल किरदार भी बखूबी निभाई। 15 साल बाद जब फिल्मों में वापसी की तो अपने अभिनय का फिर डंका बजाया। उनकी “इंग्लिश- विंग्लिश “ और मॉम बॉक्स आफिस पर काफी हिट हुईं। दुबई में श्रीदेवी पति के भानजे की षादी में शरीक होने गईं थी और होटल में नहाते समय उन्हें दिल का दौरा पडा और वे वे हमेशा के लिए ओझल हो गई। मौत कब, कहां और कैसे आती है, कोई नहीं जानता मगर इसका आना निश्चित है, यह भी शास्तव सत्य है। मगर कम उमर में मृत्यु का आना परिजनों और चाहने वालों को ताउम्र सालता है। सितारे जीते-जी भी सुर्खियों में रहते हैं और मरणोपंरात भी। श्रीदेवी की आकस्मिक मौत भी पीछे कई सवाल छोड गई । पहले कहा जा रहा था कि उनकी मौत दिल का दौरा पडने से हुई थी। इस पर विश्वास नहीं हो रहा था। वे अपनी सेहत और छरहरी काया के प्रति बेहद सजग थी और योगा के साथ-साथ जिम भी जाती थी । ताजा सूचना के अनुसार उनकी बॉडी में शराब के अंश पाए गए हैं। यही मौत का प्रमुख कारण भी माना जा रहा है। वे टब में गिर गईं , खुद को संभाल नहीं पाई और डूबने से उनकी मौत हो गई। इसके यह अर्थ लगाए जा रहे हैं कि श्रीदेवी स्ट्रेस में थी। बहरहाल, बालीवुड की “चांदनी“ का एक लम्हें भर में खो जाना अविश्सनीय लगता है मगर सच यही है कि श्रीदेवी अब हमारी यादों में जीवित है। कहते हैं अभिनय अमर होता है। वह कभी नहीं मरता। शरीर नश्वर होता है, यादें नहीं। चुलबुली, जादुई वाणी वाली श्रीदेवी अपने फैंस की यादों में हमेशा जिंदा रहेगी।
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