भारत में इन दिनों " देश को लुटो और विदेश भाग जाओ " का खेल चल रहा है । पहले ललित मोदी, फिर विजय माल्या और अब नीरव मोदी । देश को लुटने वाले आराम से विदेश भाग जाते हैं और सरकार और कानून हाथ मलते रह जाते हैं । पंजाब नेशनल बैंक में 11,500 करोड रु का घोटाला इसी लूट की ताजा कड़ी है। देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक को सरकार की नाक के नीचे लूटा गया मगर किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लगी। 2011 से यह घोटाला चल रहा था। बैकों में बाकायदा चैक एंड बैलेंस सिस्टम होता है। ताजा घोटाले ने इस सिस्टम की भी कलई खोल दी है। इस घोटाले का न तो बैंक के इंटरनल ऑडिट को पता चला और न ही रिजर्व बैक की इंस्पेक्शन टीम को। बैंक में सात साल से घोटाला चलता रहे, मगर अधिकारियों की पकड में नहीं आए, इस पर कौन विश्वास करेगा। इस तरह की घोर लापरवाही से ग्राहकों को तो यही लगेगा कि “ बहती गंगा में सब हाथ धो रहे थे“। घोटाला पकड में भी आया तो बैक के एक कर्मचारी के रिटायरमेंट होने पर। अगर यह कर्मचारी रिटायर नहीं होता और उसकी जगह दूसरा कर्मचारी नहीं आता, तो घोटाला पकड में नहीं आता। घोटाले पंजाब नेशनल बैंक तक ही सीमित नहीं था। कुछ और बैंक भी इसमें भागीदार हैं। घोटाले को लैटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। बैकों में एलओयू एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत एक बैंक की गारंटी पर दूसरे बैंक अकांउटहोल्डर को क्रेडिट देते हैं। अकांउटहोल्डर के समय पर पैसा नहीं लौटाने की स्थिति में एलओयू जारी करने वाले बैंक को पैसा चुकाना पडता है। पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित ब्रीच कैंडी शाखा में यह घोटाला हुआ है। बुधवार को बैंक ने खुद इसका खुलासा किया। बैंक के अनुसार चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए खाताधारकों और कर्मचारियों की मिलीभगत से पीएनबी को 11,500 करोड रु का चूना लगाया गया। बैंक ने हालांकि धोखाधडी करने वाले लोगों के नाम का खुलासा नहीं किया है मगर इस घोटाले में गुजरात के बडे हीरा व्यापारी नीरव मोदी का नाम सामने आया है। पीएनबी की शिकायत पर पुलिस ने वीरवार को नीरव मोदी के ठिकानों पर छापेमारी भी की। मोदी के खिलाफ सीबीआई पहले ही 280 करोड रु की चपत लगाने की जांच की जा रही है। बैक ने नीरव मोदी, उनके परिजनो और मेहल चीनू भाई चौकसी पर अधिकारियों के साथ साजिश रचने के आरोप लगाए हैं। यह बात भी सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पिछले साल जुलाई में ही इस घोटाले की जानकारी दे दी गई थी। नीरव मोदी को हाल ही में दावोस में प्रधानमंत्री के साथ भी देखा गया था। पहली जनवरी को मोदी विदेश भाग गया । बहरहाल, कांग्रेस को 2जी स्पेक्ट्रम, कोयला और कॉमनवैल्थ गेम्स घोटाले के लिए गला फाड-फाड कर कोसने वाली भाजपा और मोदी सरकार पीएनबी में सबसे बडे बैंकिग घोटाले से बैकफुट पर आ गई है। पंजाब नेशनल बैंक के एमडी सुनील मेहता का यह स्पष्टीकरण काबिलेगौर और दिलचस्प है कि बैंक अधिकारियों ने तो 2011 में ही इस घोटाले को पकड लिया था और संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी भी दी गई थी। जाहिर है यह कहकर मेहता घोटाले का ठीकरा औरों के सिर पर फोड रहे है अगर बैंक अधिकारियों को 2011 में इस घोटाले का पता चल गया था, तो यह सात साल कैसे चलता रहा? इस बात पर कौन विश्वास करेगा। सच यह है कि ताजा घोटाला बैंकों में व्याप्त बेलगाम भ्रष्टाचार का नतीजा है। कर्जा देने के लिए बैंकों में बाकायदा हिस्सेदारी मागी जाती है और सारा काम “ दलालों“ के माध्यम से किया जाता है। यही कारण है कि बैंकों के बैड लोन 11 लाख करोड रु तक पहुंच गए हैं। देश के बैंको की लूट-खसोट को अविलंब रोकना होगा। सरकार ने अगर जल्द कारगर और सख्त कदम नहीं उठाए, तो वह दिन दूर नहीं अधिकतर सरकारी बैंक दिवालिया होने की कगार पर पहुंव जाएंगे।
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