गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

टीम इंडिया का जलवा

विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंदिया ने इतिहास रचा है। पहली बार भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को उसी की जमीन पर हराया है। आज तक कोई भी भारतीय टीम  यह  करिश्मा  कर पाई थी। मंगलवार को पोर्ट एलिजाबेथ में भारतीय फिरक्की गेंदबाज युजवेन्द्र चहल की गेंद पर दक्षिण अफ्रीका के अंतिम पुच्छले बल्लेबाज मॉर्न मोर्कल के आउट होते ही भारत ने पांचवा एक दिवसीय मैच 73 रनों से जीत कर 6 मैचों की सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली। इस सीरीज जीत के साथ ही टेस्ट और एक दिवसीय क्रिकेट दोनों  में भारत का ही जलवा हो गया  है। टेस्ट में तो पहले ही भारत दुनिया की नंबर एक टीम है मगर अब वह एक दिवसीय क्रिकेट में भी दक्षिण अफ्रीका को पछाडकर नंबर वन बन गई है।  भारत ने दक्षिण अफ्रीका के सामने जीत के लिए 275 रनों का लक्ष्य रखा था मगर मेजबान टीम 201 के स्कोर पर ही आउट हो गई। इस जीत में भारत के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा  और गेंदबाज युजवेन्द्र चहल, कुलदीप यादव और  हार्दिक पंडया का बडा योगदान रहा है। चार मैच में लगातार फ्लॉप रहने के बाद आखिरकार हिटमैन रोहित  शर्मा फॉर्मे में आ ही गए और 115 रनों की पारी खेलकर  “मैन ऑफ दी मैच“ भी बने। पडंया ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए दो विकेट झटके। इस जीत से भारत ने पोर्ट एलिजाबेथ में लगातार हारने का क्रम भी तोडा है। पांचवे एक दिवसीय मैच से पहले भारत ने आज तक  पोर्ट एलिजाबेथ में पांच मैच खेले थे और पांचों ही हारे थे। यहां तक कि 2001 में पोर्ट  एलिजाबेथ के सेंट जॉर्ज पार्क में भारत केन्या से भी हार गया था। मंगलवार को  पोर्ट  एलिजाबेथ के मैदान कें मैच जीतकर  विराट कोहली की टीम ने भारत को इस “कलंक“ से भी निजात दिलाई है। दक्षिण अफ्रीका के साथ खेली जा रही  मौजूदा 6-मैचो की एक दिवसीय सीरीज कई मायनों में भारत के लिए सुखद रही है। अब तक यह माना जाता था कि विदेशों  की तेज गेंदबाजों को मदद करने वाली पिचों पर फिरक्की गेंदबाजों का  जलवा नहीं चलता है मगर इस बार  एक दिवसीय मैचों में फिरक्की गेंदबाजों का दबदबा सिर चढ कर बोला है। भारतीय फिरक्की गेंदबाजों ने पांच एक दिवसीय मैचों में कुल मिलाकर 29 विकेट झटके हैं। कुलदीप यादव ने 16 तो  युजवेन्द्र चहल ने 13 विकेट लेकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। दोनों भारतीय फिरक्की गेंदबाजों ने मंगलवार को विदेशी   फिरक्की गेंदबाज द्वारा सबसे अधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड भी तोडा है। इससे पहले 1998-99 में दक्षिण अफ्रीका में 7-मैचों की एक दिवसीय सीरीज के दौरान वेस्ट इंडीज के हरफनमौला स्पिनर कीथ ऑथरटन ने 12 विकेट लेकर रिकार्ड बनाया था। 1993-94 की दक्षिण अफ्रीका- आस्ट्रेलिया की 8 ,मेंचों की एक दिवसीय श्रृंखला में शेन वार्न ने 11 विकेट और 1996-97 की 6-मैचों की  एक दिवसीय श्रृंखला में 10 विकेट लिए थे। लेकिन पांच एक दिवसीय मैचों में फिरक्की गेॅदबाजों का 29 विकेट का रिकार्ड अभूतपूर्व है। इसी स्थिति को सामने रखते हुए दक्षिण अफ्रीका ने पांचवे एक दिवसीय मैच में स्पिनर तबरेज शम्सी को खिलाया। शम्सी को विकेट तो नहीं मिली मगर उन्होंने किफायती गेंदबाजी की। इस सीरीज ने भारत की कमजोर फील्डिंग को फिर उजागर किया है़। कहते हैं“ कैचिच विन दी मैचिच“ और अगर बडे बल्लेबाजों के कैच छूट जाएं, तो हार पक्की  हो जाती  है। जोहन्सबर्ग  में खेले गए चौथे मैच में दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज मिलर का दो बार कैच छूटना भारत के लिए महंगा साबित हुआ। मिलर ने भारत के जबडे से मैच छीन लिया। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडन मार्क्राम ने चौथे और पांचवे में दो लगभग नामुमकिन कैच लपक कर अदभुत फील्डिंग का नमूना पेश  किया। 18 फरवरी से दक्षिण अफ्रीका के साथ तीन टी-20 सीरीज  शुरु होनी है। टी-20 में तो कैच छोडने का मतलब हार को न्यौता देना है। भारत को अगर टी-20 का बादशाह बनना है, तो  एडन मार्क्राम जैसे कैच लपकने होंगे।