चीन की सैन्य शक्ति का तेजी से आधुनिकीकरण और पाकिस्तान से दिन-ब-दिन मजबूत होती दोस्ती भारत के लिए सबसे बडा खतरा है। चीनी सेना की तकनीकी दक्षता का भी कोई मुकाबला नहीं है। चीन के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ फिफ्थ जेनेरेशन के लडाकू विमान भी हैं। अंतरराष्ट्रीय रक्षा विषेशज्ञ भी मानते हैं कि चीनी सेना को हिलाना, पहाड हिलाने जैसा है। बहरहाल, जम्मू-कश्मीर सरकार के वरिष्ठ मंत्री नईम अख्तर ने यह कहकर देश को और चिंता में डाल दिया है कि चीन का कश्मीर में दखल लगातार बढ रहा है। चीन कश्मीर में अपने पैर जमाने की फ़िराक में है और इसी मकसद से आतंकी संगठन जैश -ए- मोहम्मद को भी संरक्षण दे रहा है। अख्तर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी हैं और सरकार के प्रवक्ता भी हैं। कश्मीर समस्या को अब तक कश्मीरी अवाम और सियासतदान भारत और पाकिस्तान के बीच की समस्या के रुप में देखते रहे हैं। पहली बार किसी सीनियर कश्मीरी नेता ने चीन का नाम लिया है। नईम अख्तर के इस बयान को हालांकि पीडीपी का “नया राजनीतिक पैंतरा“ बताया जा रहा है मगर पीडीपी के वरिष्ठ नेता की बात को हल्के में नहीं लिया जा सकता। वैसे कश्मीरी नेताओं को दोनों तरफ से बैंटिग करने की आदत है। नईम अख्तर की इस बात में वजन है कि हाल ही के आतंकी हमलों में बार-बार जैश -ए-मोहम्म्द का नाम आना भी यही संकेत दे रहा है। चीन आतंकी हाफिज सईद और मसूद अजहर को बचाता रहा है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों पर लगातार पानी फेर रहा है। इन आतंकियों से चीन का विशेष लगाव उसकी कूटनीति का हिस्सा है और ड्रेगन यह सब भारत को घेरने के लिए कर रहा है। इतना ही नहीं बीजिंग पाकिस्तान-चीन इक्नॉमिक कॉरिडर (सीपीईसी) में बाधा बने बलूची चरमपंथियों को भी मनाने में लगा हुआ है। बलूची न केवल इस इक्नॉमिक कॉरिडर का मुखर विरोध कर रहे हैं , अलबता पाकिस्तान से आजादी के लिए भी लड रहे हैं। हाल ही में बलूचिस्तान में चीनी नागरिकों पर खूनी हमले बढे हैं और इससे चीन काफी चिंतित है। 3000 किलोमीटर लंबे इक्नॉमिक कॉरिडर के तहत सडक, रेल, पाइपलाइन और ऑफ्टिक्ल केबल फाइबर नेटवर्क के जरिए चीन को पाकिस्तान से जोडने का लक्ष्य है। चीन ने अब तक पाकिस्तान में 300 से ज्यादा प्रोजेक्टस में निवेश किया है। इस कॉरिडर का भारत मुखर विरोध कर रहा है। सीपीईसी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजर रहा है। इससे कश्मीर में चीनी दखल बढने की आशंका है। चीन की अब तक संप्रभु राष्ट्रों के आतरिक मामलों में दखल नहीं देने की नीति रही है। लेकिन पिछले कुछ समय से चीन के विस्तारबादी मंसूबे पंख लगाकर उड रहे हैं। पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में चीन के दखल से भारत का चिंतित होना स्वभाविक है। पाकिस्तान के अलावा चीन नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मालदीव और बांग्लादेश की भी खुले हाथ से आर्थिक मदद दे रहा है। 2015 में आर्थिक नाकेबंदी से खफा नेपाल चीन की षरण में जा चुका है। म्यांमार पहले ही चीन के ज्यादा करीब है। श्रीलंका में चीनी अब बंदरगाह से लेकर पब और माल्स हर जगह काम करते नजर आते हैं। 2005 से 2017 तक चीन ने श्री लंका में 15 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। भारत अभी भी श्री लंका से “ सांस्कृतिक-ऐतिहासिक“ संबंधों की दुहाई दे रहा है। बांग्ला देश भी चीन के करीब जा रहा है और बांग्ला प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस मामले में मंगलवार को भारत को आंखें भी दिखाई हैं। हसीना ने कहा है कि भारत को चीन से बांग्ला देश के संबंधों पर चिंता करने की जरुरत नहीं है। चीन ने भारत को चौतरफा घेर लिया है । कश्मीर में चीन का दखल बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
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