लोकसभा चुनाव से पहले आखिरी नियमित बजट में मोदी सरकार का पूरा फोकस किसान, गरीब और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर रहा है। किसान और कमजोर तबके देश का सबसे बडा वोट बैंक हैं। इस बात की भी चर्चा है कि लोकसभा चुनाव मई 2019 के बजाए इस साल के अंत तक कराए जा सकते हैं। इस के दृष्टिगत बजट में किसानों को सुनहरी सपने दिखाए गए हैं। 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों की उपज के लिए लागत से डेढ गुना मूल्य देने का वायदा किया गया है। 2000 करोड की लागत से कृषि बाजार स्थापित किया जाएगा। 10 करोड गरीबों के लिए 10 लाख रु का सालाना बीमा, 50 करोड लोगों के लिए 5 लाख रु प्रति वर्ष का चिकित्सा बीमा, दुनिया की सबसे बडी स्वास्थय योजना है। 5 करोड गरीब परिवारों को मुफ्त में रसोई गैस कनेक्शन , गांव और कृषि सेक्टर के लिए 14 लाख करोड रु का रिकॉर्ड बजट आवंटन और अलग-अलग हिस्सों में खेती उत्पाद के लिए स्टोरेज, प्रोसेसिंग और विपणन की व्यवस्था और खेती उत्पाद संस्थाओं को टैक्स में छूट समेत तरह-तरह की रियायतें और सुविधाएं दी गई हैं। सीनियर सिटिजंस के लिए 50 हजार रु के ब्याज तक आयकर में छूट और 50 हजार रु तक की हैल्थ इंशोरेंस प्रीमियम की सीमा छूट दी गई है। 80डी के तहत छूट की सीमा 50,000 रु और 80डीडीबी के तहत छूट अब 60 हजार की जगह एक लाख रु कर दी गई है। 250 करोड रु सालाना टर्नओवर वाले उधोगों को कॉर्पोरेट आयकर को घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है। इससे सरकार को 7,000 करोड रु का नुकसान होगा। मोदी सरकार ने राष्ट्रपति , उप-राश्ट्रपति समेत सांसदों के वेतन-भत्ते भी बढा गए हैं। सांसदों का वेतन हर पांच साल बाद बढाए जाने का प्रावधान किया गया है। बजट में धनाढय और साधन सपन्न वर्ग को छोडकर हर तबके को कुछ-न-कुछ दिया गया है। आयकर की सीमा यथावत रखकर मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं पर पानी फेरा गया है। भाजपा ने अपने 2014 के इलेक्शन मेनिफेस्टो में आयकर सीमा को 5 लाख रु तक बढाए का वायदा कर रखा है। इसे आज तक पूरा नहीं किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2014 में खुद इसकी पैरवी करते हुए कहा था कि आयकर सीमा 5 लाख रु किए जाने से 3 करोड आयकरदाताओं को 25 करोड रु की बचत हो सकती है। मध्यम वर्ग के अलावा वित्तीय सेक्टर को भी बजट से झटका लगा है। सरकार का राजकोषीय घाटा बढने से बांड्स मार्किट में गिरावट आ सकती है। अगले साल (2019) में राजकोषीय घाटा साढे तीन फीसदी पहुँच सकता है। इससे बांडस मार्केट में और गिरावट आएगी। बजट में लांग-टर्म केपिटल गेंस टैक्स के प्रस्ताव से इक्विटी इन्वेस्टमेंट प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि वीरवार को शेयर बाजार में बिकवाली छाई रही और सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुआ। मगर कॉर्पोरेट जगत ने बजट की सराहना की है। बजट में इंफरास्ट्रक्चर को खासा बढावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रो में रोजगार के और ज्यादा अवसर सृजित होंगे। इससे लोगों की आय बढगी। आय बढने से मांग उठेगी और उपभोक्ता उत्पादों को फायदा होगा। बहरहाल, 2018 के बजट का ग्रोथ उन्मुख बजट है। गरीबों का खास ख्याल रखा गया है। किसान देश का अन्नदाता है और पूरे देश का पेट पालने के लिए कडी धूप-बारिश में पसीना बहाता है। देश का अन्नदाता खुश है तो देश भी तेजी से आगे बढ सकता है। वित्त मंत्री ने बजट की शुरुआत ही किसानों से की है। और पहली बार गरीबों के लिए महत्वाकांक्षी हैल्थकेयर योजना का आगाज किया गया है। कुल मिलाकर, मोदी सरकार ने अपने मौजूदा कार्यकाल के अंतिम नियमित् बजट में वोट के साथ ग्रोथ का भी पूरा ध्यान रखा है।
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