शनिवार, 20 जनवरी 2018

Learn From Israel

                   इसरायल से सीखें

इसरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की छह दिन की भारत यात्रा ने नई दिल्ली और यरूशलम के बीच  संबंध और मजबूत हुए है मगर दोनों देशों  के बीच कोई समानता नहीं है। भारत आकार और आबादी में इसरायल से कहीं ज्यादा विशाल है। आकार में इसरायल हिमाचल प्रदेश  से भी छोटा है। गोलन हाइट समेत इसरायल का भोगोलिक क्षेत्रफल मात्र 22,145 वर्ग किलोमीटर है। हिमाचल प्रदेश   55,673 वर्ग  किलोमीटर में फैला हुआ है। यानी इसराइल से दोगुने से भी ज्यदा। इसरायल की आबादी 85 लाख है और हिमाचल प्रदेश  की आबादी 70 लाख के करीब  है। इसराइल भी 1948 में अस्तित्व में आया और हिमाचल प्रदेश  का गठन भी इसी साल हुआ। मगर संपदा के मामले में इसरायल, भारत तो क्या हिमाचल प्रदेश  के सामने भी कहीं नहीं टिकता है। 1948 में इसरायल के पास न तो खनिज संपदा थी, न ही तेल और नही सिंचाई के साधन। और उसके पास भारत जैसा विशाल मार्केट भी नहीं है।  इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश  के पास विशाल खनिज संपदा थी। और आज सात दशक बाद इसरायल दुनिया में उच्च तकनीक संपन्न और सैन्य शक्ति के रुप में जाना जाता है और भारत भी उससे  उच्च तकनीक  हासिल करना  चाहता है । उपग्रह प्रक्षपेण में इसराइल की कोई सानी नहीं है और उसके जासूसी उपग्रह दुनिया में सर्वश्रेष्ठ  माने जाते हैं। आज की तारीख में इसरायल हाईटेक सुपर पावर है और वह हर साल 6.5 अरब डॉलर के हथियार बेचता है।1985 तक इसरायल ड्रोन का सबसे बडा निर्यातक था। ड्रोन की 60 फीसदी मार्केट पर उसका कब्जा था। इस छोटे से देश  का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 318 अरब डॉलर से भी ज्यादा है। हालांकि भारत की 2.2 खरब डॉलर के मुकाबले यह काफी कम है मगर हिमाचल प्रदेश  से कहीं ज्यादा। सात दशक बाद इसरायल उच्च तकनीक सपन्न और सुपरपावर बन  चुका है? पूरी दुनिया में इसरायल को हांगकांग और दक्षिण कोरिया के साथ सबसे स्थिर अर्थव्यवस्था माना जाता है। और सात दशक बाद इसरायल की तुलना में  हिमाचल प्रदेश  की  हालात इतनी खराब है कि राज्य सरकार को अपना रोज का खर्चा  भी उधार लेकर चुकाना पड रहा है। हिमाचल में पिछले माह की नई भाजपा सरकार ने सत्ता संभाली है और एक महीने में उसने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे वह पिछली सरकार से अलग नजर आए। नई सरकार वही कर रही है, जो पिछली सरकार करती थी। खर्चा  चलाने के लिए नई सरकार को भी 500 करोड रु का कर्जा लेना पड रहा है। और अगर यही सिलसिला जारी रहा तो साल के अंत तक सरकार को 5000 करोड रु से ज्यादा का कर्जा  लेना पड सकता है। लोकतंत्र में जनसेवा के लिए मिशनरी आचरण की दरकार होती है। हेलिकाप्टर से सैर-सपाटा करके अथवा सचिवालय के वातानुकूलित कमरों में बैठकर जनसेवा नही की जा सकती। जब तक यह नौटंकी बंद  नहीं होगी, जनसेवा नहीं की जा सकती। सत्ता में आकर पांच साल जनता को मूर्ख  बनाने एक बात है, जनसेवा करना दूसरी। यह सब ज्यादा देर तक नहीं चल सकता।