मोदी सरकार ने देश में सिंगल ब्रांड रिटेल कारोबार में सौ फीसदी विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देकर साहसिक कदम उठाया है। साहसिक इसलिए कि भाजपा स्वंय रिटेल कारोबार को विदेशीकरण के खिलाफ रही है। बुधवार को केन्द्र सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने के साथ-साथ विदेशी निवेश नीति में भी कुछ अहम बदलाव किए। इनमें रिटेल में कारोबार करने वाली विदेशी ब्रांडों को घरेलू बाजार से 30 फीसदी कंपोनेंट खरीद वाले प्रावधान में भी ढिलाई दी गई है। भारी घाटे में चल रही एयर इंडिया में 49 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है। सरकार के ताजा फैसले से देश में विदेशी निवेशी बढने से रोजगार के और ज्यादा अवसर सृजित हो सकते हैं। रोजगार के मामले में तीन साल के कर्यकाल में भी अपना चुनावी वायदा पूरा नहीं करने के लिए मोदी सरकार को विपक्ष के तीखे हमले झेलने पड रहे हैं। ताजा हमले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खाडी देश बहरीन में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए मोदी सरकार को माकूल राजगार नहीं देने पर फिर घेरा। राहुल गांधी ने रोजगार सृजन में चीन और भारत की तुलना की। काग्रेस अध्यक्ष के अनुसार चीन में जहां हर तोज 50,000 लोगों को रोजगार मिलता है, वहीं भारत में ”मेक इन इंडिया” और ”स्टार्ट अप/स्टैंड अप इंडिया” से मात्र रोजाना 450 लोगों को रोजगार मिल रहा है। गुजरात के विधानसभा चुनाव में भी राहुल ने रोजगार के मुद्दे को खूब भुनाया था। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में हर साल अढाई करोड रोजगार सृजित करने का वायदा कर रखा है। इस मामले में मोदी सरकार अब बचाव की मुद्रा में है। रिटेल बिजनेस को बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) के लिए खोलने से हर साल 50 लाख (5 मिलियन) लोगों को रोजगार मिल सकता है। मगर इसका नकारात्मक पहलू भी है। भारत में अधिकतर रिटेल कारोबार छोटे व्यापारियों के हाथ में है। नोटबंदी ने पहले ही छोटे व्यापारियों को खासा नुकसान पहुंचाया है और अब एमएनसी और बडे विदेशी घरानों के रिटेल में आने से छोटे व्यापारियों को कारोबार में बने रहना भी मुश्किल हो सकता है। कान्फेडेरषन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडरस (सीएआईटी) ने सरकार के ताजा फैसले का कडा विरोध किया है। सीएअईटी ने भाजपा पर वायदा खिलाफी का भी आरोप लगाया है। ट्रेडरस बॉडी का कहना है कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करने का वायदा कर रखा है। व्यापारियों को भाजपा का कट्टर समर्थक माना जाता है। 2012 में बतौर गुजरात मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद रिटेल में 100 फीसदी एपडीआई का कडा विरोध किया था। तब मोदी ने कहा था,“ रिटेल में एफडीआई से छोटे व्यापारियों की दुकानों में ताला लग जाएगा। रिटेल में ऐसा मार्केट शुरु होगा तो हिंदुस्तान के छोटे व्यापारियों के पास कौन खरीदारी करने आएगा“। मगर मार्केट एक्सपर्ट भी मानते हैं कि बडी दुकान खुलने से छोटी बंद नहीं होती और न ही ग्राहकी कम होती है। इसके विपरीत इससे प्रतिस्पर्धा बढती है और उपभोक्ताओं को और ज्यादा विकल्प मिलते हैं। रिटेल कारोबार में स्वदेशी बडे घरानों की एंट्री से छोटे दुकानदारों को कोई फर्क नहीं पडा है। भारत में रिटेल का बहुत बडा कारोबार है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दस फीसदी कारोबार रिटेल में किया जाता है। भारत में 600 अरब डॉलर से भी अधिक का रिटेल कारोबार किया जाता है। भारतीय रिटेल दुनिया में सबसे तेज गति से बढने वाला कारोबार है और मार्केट वैल्यू के लिहाज से दुनिया के शीर्ष पांच कारोबार में शुमार है। 2003 तक समस्त रिटेल कारोबार छोटे दुकानदारों के हाथ में था। 2010 तक इसमें मात्र 4 फीसदी कारोबार ही सुपरमार्केटस और बडे स्टोर्स के हाथ में था। इस कारोबार से लगभग चार करोड (40 मिलियन) लोगों की रोजी रोटी चलती है। सरकार के ताजा फैसले से यह स्थिति बदल सकती है।
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