मंगलवार, 30 जनवरी 2018

हरा-भरा आर्थिक सर्वेक्षण

आम बजट  से  पहले संसद में हर साल आर्थिक सर्वेक्षण (इकोनोॅमिक सर्वे) पेश  करने की रिवायत है। यह सर्वेक्षण देश  के आर्थिक विकास का लेखा-जोखा होता है और इससे देश  की आर्थिक सेहत का पता चलता है। अगला बजट कैसा होगा, सर्वेक्षण में इसकी भी कुछ झलक मिल जाती है। वीरवार (एक फरवरी)  को संसद में आम बजट पेश  होना है। सोमवार को वित्त मंत्री ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट पेश  की। सर्वेक्षण  में अर्थव्यवस्था की हरी-भरी तस्वीर पेश  की गई है। इसमें कहा गया है कि अगले वित्तीय साल में आर्थिक ग्रोथ 7 से 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है। इस साल यह 6.7 फीसदी के आस-पास रहेगी। जीएसटी में 12 फीसदी की वृद्धि के कारण सरकार का राजस्व बढा है। यह अन्य टैक्स के मुकाबले काफी बेहतर है। अप्रत्यक्ष करदाताओं में 50 फीसदी से ज्यादा की बढोतरी दर्ज  हुई है। इसे मोदी सरकार की बडी उपलब्धि माना जा रहा है। 2017-18 के दौरान मुद्रा-स्फीति (महंगाई) पिछले छह सालों में सबसे कम रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की महंगाई दर 3,3 फीसदी थी। पांच राज्यों- महाराष्ट्र , गुजरात, कर्नाटक, तमिल नाडु और तेलगांना- का कुल निर्यात में 70 फीसदी योगदान रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है और यह देश  की  तीव्र आर्थिक ग्रोथ के लिए शुभ संकेत है। कृषि  सेक्टर में 2.। फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है और कृषि   में मशीनीकरण का बढता उपयोग ग्रोथ के लिए अच्छा है । सर्विस सेक्टर में 8.3 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है। सरकार का बढता राजकोषीय  घाटा चिंता का विषय है। राजकोषीय घाटे को 2018-19 तक  जीडीपी का 3.2 से 3  फीसदी तक लाने का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। सर्वे के अनुसार अर्थव्यवस्था को गति देने और अगले साल के लोकसभा चुनाव के  मद्देनजर   सरकार का खर्चा बढने से राजकोषीय  घाटा बढ सकता है। सर्वे में अगले साल तेल की कीमतों में 12 फीसदी उछाल आने की संभावना जताई गई है। इस स्थिति में  राजकोषीय घाटा और  अधिक बढ सकता है। संप्रग सरकार की तुलना में मोदी सरकार के चार साल के दौरान  तेल की  कीमतों काफी स्थिर रही  हैं  मगर पिछले कुछ माह से कीमतें फिर बढ रही है। इससे सरकार की मुश्किलें  बढ सकती है। पूरी दुनिया में अब इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति रुझान बढा है। नीति आयोग का आकलन है कि  इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण भारत 2030 तक  60 अरब डॉलर की बचत कर सकता है। इसके अलावा एक गीगाटन कार्बन उत्सर्जन भी बच सकता है।  बजट में  इलेक्ट्रिक वाहनों को खासा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सरकार रोजगार सृजन, शिक्षा और कूषि  पर फोकस कर रही है। जाहिर है  इन क्षेत्रो को बजट में अच्छे-खासे आवंटन की उम्मीद की जा सकती है। वैसे भी प्रधानमंत्री ने पांच साल में किसानों की आय को दोगुना करने का वायदा कर रखा है। इतना ही नहीं उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान  हर साल दो करोड युवाओं को रोजगार देने का वायदा किया था। इसीलिए आर्थिक सर्वेक्षण में रोजगार पर विशेष  जोर दिया गया है।  बजट में कृषि , रोजगार और शिक्षा के लिए नई नीतियों की घोषणा की जा सकती है। आर्थिक सर्वेक्षण में संकेत दिए गए हैं कि निजी निवेश  और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ रियायतें दी जा सकती है। आर्थिक ग्रोथ को और तेज करने के लिए निवेश  को बढाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लिफ्ट करने की जरुरत है। नोटबंदी ने  ग्रामीण अर्थव्यवस्था  की कमर तोडी है। आर्थिक सर्वेक्षण से यह भी संकेत मिलते हैं कि बजट में “डिजिटल इंडिया“, “मेक इन ईंडिया“ एवं “स्टार्ट अप इंडिया“ को खासी तवज्जो मिल सकती है। मोदी सरकार का लोकसभा चुनाव से पहले यह आखिरी नियमित बजट होगा। इसलिए, इसमें लोक लुभावनी रियायतें भी दी जा सकती है हालांकि प्रधानमंत्री इस बात से इंकार कर चुके हैं। मगर राजनीतिक हितों के सामने आर्थिक यथार्थ और कुशल वित्तीय प्रबंध ज्यादा मायने नहीं रखते हैं।