गणतंत्र के 69वें दिवस पर हार्दिक बधाई। भारत का डंका पूरी दुनिया में बोल रहा है और इस बार आसियान के 11 राष्ट्राध्यक्ष भारत के गौरवपूर्ण सफर के गवाह होंगे ।1947 में देश के विभाजन की पीडा और अवसाद को भूलकर दुनिया के विशालतम गणतंत्र भारत ने सात दशक में धरती से मंगल ग्रह तक सफलता और ठोस उपलब्धियों के अनेक पायदान तय किए हैं और कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। भारत मंगल ग्रह को भी फतेह कर चुका है। अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की तूती बोलती है। दुनिया का सबसे बडा सफलतम लोकतंत्र है और सार्वभौमिक मताधिकार की निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव प्रकिया से सरकार चुनने के लिए दुनिया का मार्गदर्शक बना हुआ है। विविधता में एकता का सबसे बडा प्रतीक है। दुनिया कि किसी भी देश में इतनी धार्मिक- जातीय (एथेनिक) विविधता नहीं है, जितनी भारत में है। हर त्यौहार, उत्सव और सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन को हम पूरे उल्लास से मिल-जुल कर मनाते हैं। भारत दुनिया की पांचवी बडी सैन्य शक्ति है। इस साल (2018) भारत दुनिया की पांचवी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। 2030 तक भारत दुनिया की तीन सबसे बडी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा और हम चीन की बराबरी पर आ जाएंगें। ग्रोथ के मामले में भारत ने अभी से चीन को पीछे छोड दिया है। विदेशी लुटेरों की भारी लूट-खसोट के बावजूद भारत पांच हजार साल से भी ज्यादा समय से अखंड और उन्नत बना हुआ है। पाकिस्तान की भारत को अस्थिर करने की “फितरती आतंकी“ हरकतों के बावजूद भारत की अखंडता पर जरा भी आंच नहीं आ पाई है। इसके विपरीत पाकिस्तान ं विभाजित हो चुका है और फिर विभाजन की कगार पर है। बांग्ला देश 1971 में उससे अलग हो गया था। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ एवं काठियावाड से काकीनाडा एवं असम के कामरुप तक फैले भारत ने अपने दमखम पर पाकिस्तान की तुलना में कहीं ज्यादा आर्थिक तरक्की की है। पाकिस्तान पहले अमेरिका का “उपनिवेशी “ मुल्क था और आज उसी तरह चीन की मदद का मोहताज है। अपने दम पर न तो पहले तरक्की कर पाया और न ही आज। भारत को आतंक की भठ्ठी में झोंकते-झोंकते खुद ही उसकी आग में झुलस रहा है। मगर इन सब उपलब्धियों के बावजूद मौजूद असहिष्णुता का माहौल न केवल देश की अखंडता के लिए खतरा बना हुआ है, अलबत्ता सात दशक पुराना गणतंत्र भी दबाव में है। स्कूली पढाई से लेकर उच्च शिक्षा तक देश के हर छात्र को पढाया और रटाया जाता है कि भारत एक सार्वभौमिक, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतात्रिक गणतंत्र है। भारत के संविधान प्रस्तावना में इस बात का साफ-साफ उल्लेख है। पद और सत्ता संभालने पर हर सांसद और विधायक इसी संविधान की रक्षा करने की शपथ लेता है। यानी भारतीय गणतंत्र की समाजवादी, धर्मनिरपेक्षता की भावना की रक्षा करना हर सांसद और विधायक की संवैधानिक जिम्मेदारी है मगर देश के मौजूदा सियासी माहौल से सियासी नेताओं से अवाम आश्वश्त नहीं है। जमीनी सच्चाई यह भी है कि भारत में बहुत पहले समाजवादी व्यवस्था को तहस-नहस करके उदारीकरण से इसे पूंजीवादी बनाया दिया गया था और इसमें कांग्रेस की सबसे बडी भूमिका रही है। इस मामले में संवैधानिक मूल भावना को नष्ट करने के लिए इतिहास कांग्रेस को कभी क्षमा नहीं करेगा। और अब वर्तमान सतारूढ दल भाजपा संविधान की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की भावना को नष्ट करने पर आमादा है। भारतीय गणतंत्र के लिए यही सबसे बडा खतरा है। अगर सियासी लोग ही संविधान की मूल भावना को नष्ट करने लग जाए, तो गणतंत्र का डगमगाना तय है। सुखद स्थिति यह है कि भारत “बनाना“ गणतंत्र नहीं है और इसकी पक्की बुनियादों को खोदना आसान नहीं है। तथापि, कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो इसे “बनाना“ गणतंत्र जैसा बना सकती है। अर्थशास्त्र में उत्पादन और वितरण पर सरकार और पूंजीपतियों के नियंत्रण वाले वाले देश को “बनाना गणतंत्र“ माना जाता है। भारत में 80 फीसदी संपत्ति पर 10 फीसदी अमीरों का कब्जा है और यह सरकार की मदद के बगैर मुमकिन नहीं है। ऐसा “बनाना गणतंत्र“ में ही हो सकता है।
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