वीरवार (पहली फरवरी) को संसद में वित्तीय साल 2017-18 के लिए पेश होने वाले बजट से करोडों भारतवासियों की उम्मीदें बंधी हैं। बजट परिवार का हो या देश का, इसमें आय और व्यय को संतुलित रखना ही असली वित्तीय कौशल है। जिस तरह परिवार के मुखिया को अपने बजट में हर सदस्य की उम्मीदों और अपेक्षाओं को तसल्लीबख्श तरीके से पूरा करना पडता है, उसी तरह देश के वित मंत्री को भी हर वर्ग की उम्मीदों का ख्याल रखना पडता है। बडे-बुजर्ग कह गए हैं कि “जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारने चाहिए“। यानी जितनी आय हो, उसी में अपने खर्चे पूरे करने चाहिए। उधारी लेकर न तो परिवार को ज्यादा समय तक वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है और न ही देश को। एक सीमा से ज्यादा सरकारी राजकोषीय घाटा भी मुद्रा-स्फीति को बढावा देता है। बहरहाल, एक आम गृहणी से लेकर टॉप कंपनी के सीईओ, किसान से लेकर उद्यमी और उधोगपति , नौकरी-पशा लोगों से व्यापारियों तक, हर तबके को बजट से ढेर सारी अपेक्षाएं रहती हैं। गृहणी के लिए रसोई सबसे ज्यादा मायने रखती है। इसलिए हर गृहणी रसोई से जुडी हर वस्तु पर कर छूट की उम्मीद करती है। जो सरकार गृहणी को खुश रखे, उसका सत्ता में बना रहना तय है। जेटली अपने बजट में गृहणियों को खास तोहफा दे सकते हैं। नौकरी-पेशा मध्यम वर्गीय हर साल आयकर सीमा में और ज्यादा छूट और छोटी बचत के लिए प्रोत्साहन की उम्मीद करते हैं। भाजपा जब विपक्ष में थी, आयकर सीमा को 5 लाख तक बढाने की पैरवी करती थी। मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अप्रैल, 2014 में अमृतसर में आयकर सीमा को पांच लाख तक बढाने की वकालत की थी। 2014 का लोकसभा चुनाव जेटली ने अमृतसर से लडा था। जेटली के अनुसार आयकर सीमा 5 लाख तक बढाने से मध्यम वर्ग के 3 करोड आयकरदाता हर साल 24 करोड रु की बचत कर सकते हैं और इस रियायत से देश के प्रत्यक्ष कर में मुश्किल से 1 से 1.5 फीसदी की कमी आएगी। पिछले चार साल में जेटली अपनी ही कही बात का मान नहीं रख पाए हैं । और अब मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम नियमित बजट में देश के नौकरी-पेशा लोगों को उम्मीद है कि जेटली अपने वायदे को पूरा करेंगे। भाजपा ने किसानों की आय बढाने के लिए सिंगल नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट स्थापित करने का वायदा कर रखा है। अभी तक यह वायदा पूरा नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने किसानों की आय पांच साल में दोगुना करने का भी वायदा कर रखा है। किसानों को पटाने के लिए कुछ राज्यों ने उनके कर्जे माफ किए हैं मगर इससे आत्महत्याओं का सिलसिला थमा नहीं है। इस बार बजट में किसानों की आय बढाने के लिए विशेष प्रयास किए जा सकते हैं। कृषि पर और ज्यादा फोकस किया जा सकता है। पहले नोटबंदी, फिर जीएसटी और तत्पश्चात रिटेल कारोबार में सौ फीसदी विदेशी निवेश , इन सब कदमों ने मझोले, छोटे और सीमांत व्यापारियों-दुकानदारों की कमर तोड कर रख दी है। अब तक व्यापारी और दुकानदार भाजपा के कटटर समर्थक रहे हैं। मगर इस बार वे भाजपा से सख्त नाराज हैं। इस स्थिति के दृश्टिगत वित्त मंत्री अपने बजट में छोटे और सीमांत कारोबारियों को कुछ राहत दे सकते हैं। वैसे सालाना 20 लाख तक आय वाले व्यापारियों को पहले ही जीएसटी से बाहर रखा गया है। रोजगार सृजन मोदी सरकार की सबसे बडी चुनौती है। भाजपा ने हर साल दो करोड रोजगार के अवसर सृजित करने का वायदा किया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चीन का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर तंज भी कसा है। राहुल के मुताबिक चीन में हर रोज 59,000 लोगों को रोजगार दिया जाता है, भारत में बमुश्किल 450 लोगों को। बजट में रोजगार सृजन के लिए स्वदेशी और विदेशी निवेश बढाने के लिए खास रियायतें मिल सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले यह आखिरी नियमित बजट है, इसलिए बजट से लोक-लुभावनी रियायंतों की उम्मीद की जा सकती है।
बुधवार, 31 जनवरी 2018
कैसा हो बजट ?
Posted on 10:36 am by mnfaindia.blogspot.com/
वीरवार (पहली फरवरी) को संसद में वित्तीय साल 2017-18 के लिए पेश होने वाले बजट से करोडों भारतवासियों की उम्मीदें बंधी हैं। बजट परिवार का हो या देश का, इसमें आय और व्यय को संतुलित रखना ही असली वित्तीय कौशल है। जिस तरह परिवार के मुखिया को अपने बजट में हर सदस्य की उम्मीदों और अपेक्षाओं को तसल्लीबख्श तरीके से पूरा करना पडता है, उसी तरह देश के वित मंत्री को भी हर वर्ग की उम्मीदों का ख्याल रखना पडता है। बडे-बुजर्ग कह गए हैं कि “जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारने चाहिए“। यानी जितनी आय हो, उसी में अपने खर्चे पूरे करने चाहिए। उधारी लेकर न तो परिवार को ज्यादा समय तक वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है और न ही देश को। एक सीमा से ज्यादा सरकारी राजकोषीय घाटा भी मुद्रा-स्फीति को बढावा देता है। बहरहाल, एक आम गृहणी से लेकर टॉप कंपनी के सीईओ, किसान से लेकर उद्यमी और उधोगपति , नौकरी-पशा लोगों से व्यापारियों तक, हर तबके को बजट से ढेर सारी अपेक्षाएं रहती हैं। गृहणी के लिए रसोई सबसे ज्यादा मायने रखती है। इसलिए हर गृहणी रसोई से जुडी हर वस्तु पर कर छूट की उम्मीद करती है। जो सरकार गृहणी को खुश रखे, उसका सत्ता में बना रहना तय है। जेटली अपने बजट में गृहणियों को खास तोहफा दे सकते हैं। नौकरी-पेशा मध्यम वर्गीय हर साल आयकर सीमा में और ज्यादा छूट और छोटी बचत के लिए प्रोत्साहन की उम्मीद करते हैं। भाजपा जब विपक्ष में थी, आयकर सीमा को 5 लाख तक बढाने की पैरवी करती थी। मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अप्रैल, 2014 में अमृतसर में आयकर सीमा को पांच लाख तक बढाने की वकालत की थी। 2014 का लोकसभा चुनाव जेटली ने अमृतसर से लडा था। जेटली के अनुसार आयकर सीमा 5 लाख तक बढाने से मध्यम वर्ग के 3 करोड आयकरदाता हर साल 24 करोड रु की बचत कर सकते हैं और इस रियायत से देश के प्रत्यक्ष कर में मुश्किल से 1 से 1.5 फीसदी की कमी आएगी। पिछले चार साल में जेटली अपनी ही कही बात का मान नहीं रख पाए हैं । और अब मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम नियमित बजट में देश के नौकरी-पेशा लोगों को उम्मीद है कि जेटली अपने वायदे को पूरा करेंगे। भाजपा ने किसानों की आय बढाने के लिए सिंगल नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट स्थापित करने का वायदा कर रखा है। अभी तक यह वायदा पूरा नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने किसानों की आय पांच साल में दोगुना करने का भी वायदा कर रखा है। किसानों को पटाने के लिए कुछ राज्यों ने उनके कर्जे माफ किए हैं मगर इससे आत्महत्याओं का सिलसिला थमा नहीं है। इस बार बजट में किसानों की आय बढाने के लिए विशेष प्रयास किए जा सकते हैं। कृषि पर और ज्यादा फोकस किया जा सकता है। पहले नोटबंदी, फिर जीएसटी और तत्पश्चात रिटेल कारोबार में सौ फीसदी विदेशी निवेश , इन सब कदमों ने मझोले, छोटे और सीमांत व्यापारियों-दुकानदारों की कमर तोड कर रख दी है। अब तक व्यापारी और दुकानदार भाजपा के कटटर समर्थक रहे हैं। मगर इस बार वे भाजपा से सख्त नाराज हैं। इस स्थिति के दृश्टिगत वित्त मंत्री अपने बजट में छोटे और सीमांत कारोबारियों को कुछ राहत दे सकते हैं। वैसे सालाना 20 लाख तक आय वाले व्यापारियों को पहले ही जीएसटी से बाहर रखा गया है। रोजगार सृजन मोदी सरकार की सबसे बडी चुनौती है। भाजपा ने हर साल दो करोड रोजगार के अवसर सृजित करने का वायदा किया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चीन का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर तंज भी कसा है। राहुल के मुताबिक चीन में हर रोज 59,000 लोगों को रोजगार दिया जाता है, भारत में बमुश्किल 450 लोगों को। बजट में रोजगार सृजन के लिए स्वदेशी और विदेशी निवेश बढाने के लिए खास रियायतें मिल सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले यह आखिरी नियमित बजट है, इसलिए बजट से लोक-लुभावनी रियायंतों की उम्मीद की जा सकती है।






