गुरुवार, 18 जनवरी 2018

हज सब्सिडी पर राजनीति?

 हज सब्सिडी को खत्म करना मोदी सरकार का प्रषंनीय कदम है बशर्ते इसे मुसलमानों के खिलाफ राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल न किया जाए। सरकार के ताजा फैसले  से मुसलमान भी खुश  हैं। देश  में संभवतय पहली बार ऐसा हो रहा है कि सरकारी रियायत बंद किए जाने का हर तरफ स्वागत हो रहा है। मुस्लिम नेता खुद लंबे समय से लगातार हज सब्सिडी को बंद करने की मांग करते रहे हैं। हज सब्सिडी शुरु होने से आज तक यह विशुद्ध राजनीतिक मुददा बनकर रह गया है। दक्षिणपंथी विचारधारा वाले सियासी लोग अब तक हज सब्सिडी को मुसलमानों के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बनाकर पेश  करते रहे हैं। भारत के मुसलमानों ने हज के लिए सरकार से कभी सब्सिडी नहीं मांगी । हज मुसलमानों की अटूट धार्मिक आस्था का प्रतीक है। हज इबादत का पवित्र कार्य  है और  आर्थिक और शारीरिक रुप से सक्षम मुसलमान के लिए जीवन में एक बार अनिवार्य  है। हज करने वाले को सारा खर्चा अपनी खून-पसीने की कमाई से वहन करना पडता है।  इतना ही नहीं हज पर जाने वाले मुसलमान को यह सुनिष्चित करना पडता है कि यात्रा पर खर्च किया जा रहा  पैसा किसी से उधार लेकर अथवा ब्याज चुका कर नहीं  लिया गया है और पूरा खर्चा  अपनी गाढी कमाई का है।  2006 में जमाते उलेमा-ए- हिंद ने फतवा जारी किया था कि “हज करते हुए किसी की मदद लेना शरीयत के खिलाफ है“। कुरान के मुताबिक केवल वही मुसलमान हज की यात्रा पर जा सकते हैं जो आर्थिक रुप से सबल, स्वस्थ और व्यस्क हों।  इन सारी परिस्थितियों में हज के लिए किसी भी तरह की सरकारी या गैर-सरकारी मदद के लिए कोई गुंजाइश  नहीं रह जाती  है। इन बातों के मद्देनजर  असदुद्यीन औवेसी से लेकर मौलाना महमूद मदनी तक सभी मुस्लिम नेता और मौलवी लगातार हज सबसिडी को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि सरकार जबरदस्ती मुसलमानों को अब तक हज सब्सिडी क्यों दे रही है? सत्तर के दशक में इंदिरा गांधी की काग्रेस सरकार ने मुसलमानों को खुश  करने के लिए हज सब्सिडी  शुरु की थी। और यह सब्सिडी हज यात्रियों को सीधे तौर पर नहीं दी जाती। हज यात्रियों की एयर टिकट पर दस हजार की सरकारी सब्सिडी दी जाती है और यह रकम सीधे तौर पर एयर एंडिया के खाते में चली जाती है। व्यवहारिक तौर पर मुसलमानों को कोई सबसिडी नहीं मिलती है, अलबत्ता घाटे में चल रही एयर इंडिया की मदद के लिए अब तक इस सब्सिडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। तथापि,  आज तक हज सब्सिडी को इस तरह से पेश  किया जाता रहा है जैसे मुसलमानों पर सरकार ने बहुत बडी मेहरबानी की है और सरकारी खजाने को उन पर लुटाया जा रहा है। सच्चाई यह भी है कि हिंदू तीर्थ यात्रियों को भी सब्सिडी दी जाती है। कैलाश  मानसरोवर यात्रा के लिए हिंदू तीर्थ यात्रियों को केन्द्र और कई राज्यों से आर्थिक मदद मिलती है। कुंभ और अर्ध-कुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों पर भी खुलकर सरकारी पैसा खर्च  किया जाता है।  वामपंथी अक्सर इस बात को उठाते है कि दक्षिणपंथी अल्पसंख्यकों से जुडी रियायतों को तो खूब उछालते हैं और  राष्ट्रहित  के खिलाफ पेश  करते हैं मगर दूसरे समुदायों को मिल रही रियायतो पर कभी एक  शब्द नहीं बोला जाता। बहरहाल, मोदी सरकार ने हज सब्सिडी बंद करके सुप्रीम कोर्ट के आदेशों  का अनुपालन किया है। 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से हज सब्सिडी को 2022 तक पूरी तरह से बंद करने के आदेश  दिए थे। तब कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि साल-दर-साल हज सब्सिडी की रकम बढती जा रही है मगर इससे मुसलमानों का कोई भला नहीं हो रहा है। 1994 में सब्सिडी की रकम 10 करोड 51 लाख रु थी और अब यह बढकर 450 करोड रु हो गई है। इस रकम को गरीब मुसलमानों के आर्थिक उत्थान पर खर्च किया जा सकता है।