पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में फांसी की सजा पाने वाले कुल भूषण यादव से इस्लामाबाद में उनकी माता और पत्नी की भेंट करवाकर पाकिस्तान इस तरह से इतरा रहा है मानो उसने कोई किला फतेह कर लिया हो। सोमवार को जाधव की पत्नी और माता ने उनसे लगभग 45 मिनट तक मुलाकात तो की मगर बीच में शीशे की दीवार खडी किए जाने के कारण मां अपने बेटे को गले तक लगा नहीं पाई और पत्नी अपने सुहाग से मिलकर फूट-फूट कर रो नहीं पाई। ऐसी मुलाकात का क्या मतलब जिसमें मां अपने बेटे को गले तक न लगा पाए और पत्नी पति के कंधे पर सिर रख कर आंसू न बहा सके। अगर मुलाकात के बीच दीवार ही खडी करनी थी, तो दोनों का इस्लामाबाद जाने का क्याा फायदा? ऐसी मुलाकात तो भारत में ही वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए भी की जा सकती थी। पाकिस्तान मानवीय मूल्यों की रक्षा में अपनी धूर्त फितरत से बाज नहीं आया। मुलाकात का नाटक महज इंटरनेशनल समुदाय को यह दिखाने के लिए मंचित किया गया कि “ देखो दुनिया वालो, हम कितने मानवीय मूल्यों के सरोकारी हैं“। इस मुलाकात के फौरन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दुनिया को दिखाने के इस मुलाकात की तस्वीरों भी जारी की। इस वीडियो में जाधव को परिवार से मुलाकात करवाने के लिए बार-बार पाकिस्तान का आभार व्यक्त करते हुए भी दिखाया गया है। ्अगर इन तस्वीरों को गौर से देखा जाए तो यह बात एक बालक भी बता देगा कि कुल भूषण यादव को इस मुलाकात के लिए डरा-धमका कर तैयार किया गया था। मां और पत्नी से मुलाकात के दौरान जाधव ने अपना गुनाह कबूल किया। जाहिर ऐसा उन्होंने पाकिस्तान के दबाव में किया है। जो इंसान खुद को बार-बार बेगुनाह बता रहा है, वह अपने परिवार के समक्ष भला ऐसा गुनाह क्यों कबूलेगा जो उसने किया ही नहीं। मंगलवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात को लेकर और भी कई जानकारियां जारी की। मुलाकात के दौरान पाकिस्तान अधिकारियों ने जाधव की माता और पत्नी को अपनी मातृ भाषा मराठी ंमें बातचीत तक नहीं करने दी। मुलाकात से पहले जाधव की पत्नी और माता को कपडे बदलने के लिए मजबूर किया गया। जाधव की पत्नी को मंगलसूत्र और बिंदी को हटाने के लिए कहा गया। उनके जूते उतरवा लिए गए और बाद में वापस नहीं किए गए। पाकिस्तान मीडिया को जाधव की पत्नी और माता के पास आने की अनुमति दी गई और पत्रकारों को उंट-पटांग सवाल पूछने की खुली छूट दी गई। इस दौरान पाकिस्तान “जिदाबाद“ के नारे लगाए गए। दोनों देशों में इस बात पर सहमति थी कि पत्रकारों को उनसे सवाल पूछने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बीच में दीवार होने की वजह से बातचीत इंटरकॅाम के जरिए की गई। बहरहाल, पाकिस्तान, अब इस मुलाकात को खूब भुना रहा है। कुल भूषण यादव को आतंकी साबित करके पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह दिखाना चाहता है कि भारत भी पाकिस्तान में आतंकी और विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त है। कुल भूषण जाधव को 3 मार्च, 2016 को पाकिस्तान में अवैध तरीके से घुसने और जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस साल अप्रैल में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी करने और विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त होने के लिए फांसी की सजा सुनाई थी। मई में इंटरनेशनल कोर्ट ने जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी। इस बात पर हैरानी व्यक्त की जा रही है कि पाकिस्तान एक ओर तो जाधव को कॉन्सलुर एक्सेस देने के लिए राजी नहीं है मगर वह जाधव की माता और पत्नी को उनसे मिलवाने के लिए फौरन मान गया? जाहिर है यह सब किसी खास मकसद से किया गया और पाकिस्तान इसे हासिल करने में काफी हद तक सफल भी रहा है।
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