भारत और श्रीलंका के बीच तीसरे टेस्ट के दूसरे दिन रविवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में ऐसा कुछ हुआ, जो क्रिकेट के इतिहास में आज तक नहीं हुआ । श्रीलंका के खिलाडी मास्क लगाकर मैदान में फील्डिंग करते रहे और प्रदूषित हवा का हवाला देकर 58 मिनट में चार बार खेल को रुकवाया। श्रीलंकाई खिलाडियों का कहना था प्रदूषित हवा के कारण उनके एक गेंदबाज को चक्कर आ रहे थे और दूसरे का सांस फूल रहा था। बहरहाल, अंपायर ने श्री लंकाई टीम की बात नहीं मानी और खेल जारी रहा। सोमवार को श्रीलंका बैंटिग कर रही थी, इसलिए खिलडियों ने प्रदूषण की कोई शिकायत नहीं की। श्रीलंका के कप्तान दिनेश चंदीमल खेल शुरु होने से खत्म होने तक पिच पर डटे रहे। इस दौरान श्रीलंका के किसी भी बल्लेबाज को प्रदूषित त वायु ने जरा भी परेशान नहीं किया। इससे साफ है रविवार को श्री लंका की टीम भारतीय दबंग बल्लेबाजी से खौफ खाकर खेल रोकने के लिए बहाना ढूंढ रही थी। इसी कारण खराब एयर क्वालिटी का मुद्दा उठाकर तिहरे शतक की ओर बढ रहे भारतीय कप्तान विराट कोहली का ध्यान बंटाने के लिए खराब एयर क्वालिटी का मुद्दा उछाल गया। और इसमें वे काफी हद तक कामयाब भी हुए। कोहली न केवल तीसरे शतक लगाने से पहले ही आउट हो गए, अलबत्ता बार-बार की रुकावट से क्षुब्ध होकर उन्होंने भारत की पहली पारी 537 के स्कोर पर ही घोषित कर दी। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका के तीन विकेट झटके मगर भारतीय तेज गेंदबाजों की सांसे नहीं फूलीं। जाहिर है श्रीलंकाई टीम ने खास मकसद से यह सब कुछ किया । बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना ने भी माना है कि विराट कोहली का तिहरा शतक रोकने के लिए श्रीलंकाई खिलाडियों ने यह तमाशा खडा किया। स्टेडियम में मौजूद 20 हजार दर्षकों पर खराब एयर क्वालिटी का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडा। न ही मैदान में खडे अंपायरों पर प्रदूषित वायु का कोई असर पडा। क्रिकेट हो फुटबाल या कब्बडी, खेल को अगर खेल भावना से न खेला जाए तो यह खेल नहीं राजनीति का अखाडा बन जाता है। बहरहाल, भारत की राजधानी दिल्ली ही नहीं, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में भी प्रदषण का स्तर खतरनाक स्तर पर है़। 2017 में श्रीलंका में प्रदूषण की समस्या इतने खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है कि सरकार को इससे जूझने के लिए सेना की मदद लेनी पड रही है। 2016 में दिल्ली में पॉल्यूशन का स्तर 2.2 गुना ज्यादा था तो कोलंबो में यह 3.2 गुना ज्यादा था। भारतीय खिलाडियों ने श्रीलंका में हाल ही की सीरीज के दौरान खराब एयर क्वालिटी की कोई शिकायत नहीं की। बहरहाल, कहते हैं “ अपना ही सिक्का खोटा हो तो औरों का क्या दोष “। इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता है कि दिल्ली “ दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित महानगरों में शुमार है और यहां प्रदूषण का स्तर इतने खतरनाक स्तर पर है कि भारत की राजधानी को गैस का चेंबर कहा जाता है। दिल्ली के हर तीसरे बच्चे का फेफडा प्रदूषित हवा से संक्रमित हो चुका है। पिछले महीने ही दिल्ली में प्रदूषण का प्रकोप इतना बढ गया था कि राजधानी का जनजीवन ही ठप्प पड गया । स्कूल-कालेजिज बंद करने पडे थे और लोगों बाहर निकलने में भी परेशानी हो रही थी। दिल्ली में सर्दी के मौसम में पॉल्यूशन का स्तर विश्व स्वास्थय संगठन (डब्ल्यूएचओ) के निर्धारित मानक से 30 गुना ज्यादा बढ जाता है। दुखद स्थिति यह है कि दिल्ली ही नहीं, दुनिया के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों मंे 8 भारत में है़। मध्य प्रदेश का ग्वालियर और पंजाब का लुधियाना दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित है। प्रदूषण इस समय सबसे गंभीर समस्या है। और यह स्थिति लंबे समय से है मगर न तो केन्द्र और न ही संबंधित राज्य इसके निदान के लिए आज तक कुछ ठोस कर पाए हैं।
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