सोमवार, 4 दिसंबर 2017

भाजपा के अच्छे दिन

मोदी सरकार के  शासन में आम आदमी पार्टी के अच्छे दिन भले ही न आए हों मगर सत्तारूढ दल भारतीय जनता पार्टी के अच्छे दिन बराबर आते रहे हैं। हर मोर्चे पर मोदी सरकार को मुंहमांगी सफलता मिल रही है।  2014 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने पंजाब को छोडकर  विधानसभा चुनावों में भी बेहतरीन  प्रदर्शन  किया है। और अब गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश  के निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत दर्ज  करके भाजपा ने कांग्रेस को आइना दिखा दिया है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा को निकाय चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला है। कांग्रेस का  प्रदर्शन  इतना कमजोर रहा है कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लोकसभा हलके अमेठी में भी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई है। कांग्रेस अब यह सफाई  दे रही है कि उसने पार्टी चुनाव चिंह पर निकाय चुनाव लडे ही नहीं। बहरहाल, चुनावी राजनीति को छोड दिया जाए, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.3 फीसदी की बढोतरी ने मोदी सरकार के आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं। जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान जीडीपी ग्रोथ ने पाच तिमाहियों में लगातार गिरने का सिलसिला तोड दिया है। इससे पिछली तिमाही (अप्रैल जून) में जीडीपी की ग्रोथ  5.7 फीसदी थी।  पिछले साल इसी तिमाही में जीडीपी में ग्रोथ  साढे सात फीसदी थी। पिछली पांच तिमाही के दौरान जीडीपी की ग्रोथ रेट में लगातार गिरावट दर्ज हो रही थी। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश  की जीडीपी में यह सबसे खराब स्थिति थी। आलोचक इसके लिए नोटबंदी और आनन-फानन में लागू जीएसटी को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इससे पहले संप्रग सरकार के समय 2013-14 की आखिरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में सबसे कम 4.3 फीसदी ग्रोथ रेट दर्ज हुई थी। जीडीपी ग्रोथ के ताजा अंाकडे साफ बता रहे हैं कि नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था पर जो प्रतिकूल असर पडा था, वह अब काफूर हो गया है और भारतीय अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड ली है। इससे यह उम्मीद भी जगी है ग्रोथ  जल्द ही साढे सात फीसदी के स्तर को पार कर लेगी। जीडीपी देश  की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे पुख्ता पैमाना है। जीडीपी में ग्रोथ बढोतरी का मतलब है कि देश  आर्थिक रुप से  हृष्ट -पुष्ट  है। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले ग्रोथ का रफ्तार पकडना भाजपा के लिए काफी सुखद है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था पर हो रहे प्रतिकूल असर को गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाए हुए हैं। ताजा आंकडों ने सरकार के आलोचकों को  निरुतर कर दिया है। ग्रोथ के ताजा अंाकडों की सबसे अच्छी बात यह है कि अब तक सुस्त पडे निर्माण क्षेत्र में भी सात फीसदी ग्रोथ दर्ज हुई है। उर्जा और गैस सेक्टर  7.5 फीसदी की दर से आगे बढा है। ये तीनों सेक्टर अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र है और इनकी ग्रोथ अन्य सेक्टरों को भी प्रभावित करती है। होटल, व्यापार और ट्रांसपोर्ट में 9.9 फीसदी की ग्रोथ काबिलेगौर है। मगर कृषि  क्षेत्र में लगातार गिरावट चिंताजनक है। देश  में इस समय प्याज, टमाटर और मौसमी फल-सब्जियों के दाम आसमान को छू रहे हैं। कृषि  क्षेत्र में गिरावट जारी रहने से खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं। इसका असर मुद्रा-स्फीति पर पडेगा और कर्ज  महंगा हो सकता है। सरकार का बजटीय घाटा निरंतर बढ रहा है और दिंसबर आते-आते यह निर्धारित लक्ष्य का 96 फीसदी के स्तर को छू रहा है। अभी वित्तीय वर्ष   के चार माह बाकी है। सरकार को अपने खर्च  कम करने होंगे मगर इसका असर विकास पर नहीं पडना चाहिए।  मुद्रा स्फीति से बचने के लिए सरकार अपनी बजटीय घाटे पर लगाम लगा सकती है। बहरहाल, मोदी सरकार की हर तरफ से पौ-बारह हो रही है और कांग्रेस को चौतरफा मुंह की खानी पड रही है।