सोमवार, 25 दिसंबर 2017

घोटाला तो था ही नहीं?

जिस ।.76 लाख करोड रु घोटाले के लिए कांग्रेस नीत संप्रग सरकार को बहुत बडी कीमत चुकानी पडी थी, वह तो था ही नही्। बस अगर कुछ था तो आरोप, अफवाहें और अटकलों का दौर और पूरा घोटाला इन बातों पर खडा किया गया था। वीरवार को सुनाए गए सीबीअई की विषेश अदालत के फैसले का निचोड भी यही है। अदालत ने  इस घोटाले के सभी आरोपियों को तीनों मामलों में बरी कर दिया है। संप्रग सरकार में संचार मंत्री रहे और घोटाले के प्रमुख आरोपी ए राजा सभी आरोपों से बरी हो गए हैं। द्रमुक नेता और  पूर्व मुख्यमंत्री के करुणानिधि की सांसद पुत्री कनिमोडी और उन तीन कंपनियों, जिन्हें कथित घोटाले से फायदा हुआ था, को भी अदालत ने आरोप मुक्त कर दिया है। सभी 17 आरोपी छूट गए हैं। अपने फैसले में जज ने कहा है“ मैं सात साल तक इंतजार करता रहा। काम के प्रतिदिन और गर्मियों की छुट्टियों में भी, मैं हर दिन  सुबह 10 से षाम 5 बजे तक इस अदालत में बैठ्कर इंतजार करता रहा कि कोई कानून रुप से स्वीकार्य सबूत लेकर आए, लेकिन कोई भी नहीं आया“। जज की इस टिप्पणी से 2जी घोटाले की “गंभीरता “ का अंदाजा हो जाता है। दरअसल,  2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला 2010 में तत्कालीन महालेखाकार (सीएगी) विनोद राय की रिपोर्ट पर उजागर हुआ था। कैग की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि संप्रग सरकार द्वारा 2008 में आवंटित  2जी स्पेक्ट्रम से देष को  ।.76 लाख करोड रु का नुकसान हुआ है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही पूर देष में खलबली मच गई। 122 स्पेक्ट्रम लाइसेंस रदद कर दिए गए।  देष की सियासत में भूचाल आ गया। कई इस्तीफे हुए और फिर षुरु हुई मुकदमेबाजी। मामला सुप्रीम कोर्ट में चला और सीबीआई की जांच भी षीर्श  अदालत की निगरानी में की गई। मगर अदालत में सीबीआई द्वारा ठोस सबूत पेष नहीं किए जाने से सभी आरोपी छूट गए हैं। सच यह है कि इस घोटाले में साक्ष्य और सबूत जुटाने बेहद मुष्किल थे। महालेखाकार ने संप्रग सरकार की “पहले आओ, पहले पाओ” की नीति को गलत बताते हुए केवल अनुमान लगाया था कि अगर 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन खुली नीलामी से किया जाता तो देष को  ।.76 लाख करोड रु ज्यादा मिलते।  सीबीआई ने “पहले आओ, पहले पाओ“ के कारण हुए नुकसान को 30,000 करोड रु के करीब आंका था। महालेखाकार ने  ।.76 लाख करोड रु के नुकसान का आकलन अनुमान लगाकर किया था। अदालत में इसके साक्ष्य जुटाना वाकई मुष्किल था। अदालती फैसले से मोदी सरकार और भाजपा की खासी किरकिरी हुई है। भाजपा ने इस घोटाले को चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ प्रमुख मुद्दा  बनाया था। और अब जब अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है, सरकार और भाजपा के नेताओं को स्पश्टीकरण देते नहीं बन पा रहा है। अदालती फैसले से उत्साहित वीरवार को कांग्रेस ने संसद में खूब हंगामा किया और भारत रत्न और महान किक्रेटर सचिन तेंदुलकर तक को बोलने तक नहीं दिया। 2जी स्कैम के कारण भाजपा ने 2010 में लगातार 22 दिन तक संसद को चलने नहीं दिया था। उस साल संसद की 83 बैठकों मेंसे 38 2जी  घोटाले की भेंट चढी थी। और इससे देष को 240 करोड रु का नुकसान उठाना पडा था। अब जबकि सीबीआई अदालत ने भी माना है कि पूरा घोटाला अफवाहों और अटकलों पर खडा किया गया था, जनता इस बात का जवाब मंागेगी कि संसद की कार्यवाही को बाधित करके देष को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा? कांग्रेस का उत्साहित होना स्वभाविक है। इस घोटाले के कारण ही संप्रग सरकार को बडी फजीहत हुई थी। अदालत के फैसले से महालेखाकार की विष्वसनीयता पर भी सवाल खडा कर दिया है। भाजपा के सीनियर नेता डाक्टर सुब्रमनयम ने भी माना है कि अदालत के फैसले से भाजपा की छवि खराब हो सकती है।