अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने रिफॉर्मस पर मोदी सरकार की पीठ थपथपा कर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। मूडीज ने पिछले शुक्रवार को जारी रेटिंग में 14 साल बाद भारत की रेटिंग बढाई है। ताजा रेटिंग में भारत को “पॉजीटिव“ से “स्टेबल“ का दर्जा दिया गया है। स्टेबल रेटिंग से भारत में विदेशी निवेश और बढ सकता है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है। मूडीज ने भारत की रेटिंग में सुधार के लिए चार कारण गिनाए हैं। मूडीज का आकलन है कि भारत में आर्थिक सुधार को गति मिलने से बिजनेस क्लाइमेट बेहतर हुआ है। विदेशी और घरेलू निवेश बढा है और उत्पादकता में तेजी आई है। इससे ग्रोथ और मजबूत हुई है। मूडीज ने अपने आकलन में नोटबंदी और जीएसटी के आलोचकों को भी माकूल जवाब दिया है। रेटिंग में कहा गया है कि नोटबंदी, जीएसटी, आधार और डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) जैसे कारगर उपायों से अर्थव्यवस्था को लांग टर्म में खासा फायदा होगा। इन उपायों से भले ही अल्पकाल में अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है मगर दीर्घकाल में इनसे ग्रोथ और तेज होगी। सरकार भी अब तक यही कह रही है। मूडीज ने सरकार के पक्ष को और मजबूत किया है। भारत की मजबूत सार्वजनिक ऋण व्यवस्था (स्टेबल पब्लिक इनडेटनेस) को मूडीज ने रेटिग बढाने का तीसरा कारण बताया है। नोटबंदी, जीएसटी, आधार और डीबीटी जैसे कारगर उपायों से भारत की सार्वजनिक ऋण व्यवस्था मजबूत हुई है। सरकार के घूसखोरी रोधी, काले धन के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावी सरकारी टैक्स कलेक्शन जैसे स्ट्रक्चरल रिफॉर्मस ने संस्थागत क्रेडिब्लिटी में खासा इजाफा हुआ है। खराब ऋण की समस्या से जूझ रहे सरकारी बैंकों के लिए 2,11 खरब रु पुनर्पंूजीकरण योजना ने भी भारत की छवि को निखारा है। यह रेटिंग बढाने के लिए पर्याप्त है। इससे निजी निवेश को खासा प्रोत्साहन मिला है। मूडीज की रेटिंग से मोदी सरकार का आत्मविश्वास बढा है और पिछले सप्ताह इसका असर देखने को भी मिला। वीरवार को सरकार अर्थव्यवस्था में और जान फूंकने के लिए अपने बजटीय घाटे के लक्ष्य में ढील देने के लिए तैयार थी। मोदी सरकार ने बजटीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है। अगर 2018 तक इस लक्ष्य को हासिल करना है तो सरकार को अपने खर्चों और सब्सिडी में अविलंब कटौती करनी पडेगी। 200 वस्तुओं पर से जीएसटी घटाकर मोदी सरकार को 20,000 करोड रु के राजस्व का नुकसान उठाना पड रहा है। वीरवार तक सरकार के समक्ष समस्या यह थी कि इस नुकसान की भरपाई करे तो कैसेे? मोदी सरकार के पास बजटीय घाटे से पूरा करने के अलावा फिलहाल कोई चारा नहीं था मगर बजटीय घाटा नियंत्रण लक्ष्य आडे आ रहा था। शुक्रवार के बाद से सरकार बजटीय घाटे को लेकर ज्यादा उदार नजर आ रही है। 2008 की वैश्विक मंदी का सही आकलन करने में विफल रहने के बाद हालांकि मूडीज अथवा अन्य अंतरराष्ट्रिय रेटिंग एजेंसियों की विश्वसनीयता घटी है मगर अभी भी अंतरराष्ट्रीय कर्ज लेने और विदेशी निवेश आकर्षित करने में रेटिंग की अहम भूमिका रहती है। बहरहाल, गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मूडीज की रेटिंग ने सतारूढ दल भाजपा को विपक्ष पर प्रहार करने का धारदार हथियार मिल गया है। काग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान नोटबंदी और जीएसटी को लेकर प्रधानमंत्री पर तीखे हमले कर रहे है़ं। जीएसटी को राहुल गांधी “गब्बर सिंह टैक्स“ बताकर इसे आम आदमी का दुश्मन बता रहे हैं। बहरहाल, एक जमीनी सच्चाई यह भी है कि ताजा रेटिंग से अगर सरकार की विष्वसनीयता बढी है तो जनता की अपेक्षाओं को 2019 से पहले पूरा करने का दबाव भी बढा है। विपक्ष में रहकर आरोप लगाना आसान है मगर जन अपेक्षाओं को समय रहते पूरा करने वाली सरकार चलाना बेहद कठिन ।
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