गुरुवार, 23 नवंबर 2017

आतंकियों का सफाया

कश्मीर  की पहाडियों पर बर्फ पडने से पहले पाकिस्तान को घाटी में भाडे के आतंकियों को भेजने की जल्दी रहती है मगर इस बार सुरक्षा एजेसिंयां ऐसा होने नही दे रही है।  कश्मीर मैं  आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की सघन कार्रवाई के सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान के आतंकियों को भागने का मौका तक नहीं मिल रहा है। घाटी में घुसते ही आतंकियों को मार गिराया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां  कश्मीरी  अवाम का भरोसा जीतने को प्राथमिकता दे रही है। सेना की जनता में नकारात्मक छवि काफी हद तक सुधरी है। कश्मीर  में अलगाववादी और आतंकी संगठन अब तक युवकों को गुमराह कर भारत के खिलाफ भडकाते रहे हैं हालांकि इंटरनेट के जमाने में आतंकियों की राक्षसी मंशा  को पूरी दुनिया भली-भांति जानती है। इराक और सीरिया मे इस्लामिक स्टेट के आतंकियों की अमानवीय कृत्यों को भला कैसे भुलाया जा सकता है। इस आतंकी संगठन के लिए मानवता के कोई मायने नहीं है। इस्लाम के नाम पर निर्दोष  लोगों की नृशंस  ह्त्या करना , बहू-बेटियों को अगवा कर उनका बलात्कार करना और बच्चों को आतंकी बनाकर उनके भविष्य  को नष्ट  करना कहां की इंसानियत है? पाकिस्तान के आतंकी संगठन भी यही कर रहे हैं। क्या युवकों को यह सब नजर नहीं आता? माना बेरोजगारी और गरीबी जीवन का सबसे बडा अभिशाप है और इनसे त्रस्त युवक किसी भी हद तक जा सकता है। पर  यह इतनी भी अभिशप्त नहीं है कि   इंसानियत  को ही भुला दिया  जाए । गरीबी, बेरोजगारी और लोगों से बार-बार के धोखे की विवशता ने  कश्मीर  के युवकों को आतंक की अंधी गली में धकेला है। 1987 के चुनाव में बडे पैमाने पर धाधलियों ने अवाम के भरोसे को तार-तार क्रर  दिया था। नतीजतन, राष्ट्रीय   राजनीतिक दलों की  क्रेडिब्लिटी  जाती रही और अलगाववादी उन पर भारी पडते गए।  1990 आते-आते  कश्मीर  में अलगाववाद और आतंकवाद पनपने लग पडा।  कश्मीर  में अगर अलगाववाद और आतंक को पछाडना है तो केन्द्र और राज्य सरकार को सबसे पहले अलगाववाद को अलग-थलग कर राजनीतिक दलों को और सशक्त बनाना पडेगा। रोजगार के अवसर सृजित करने पडेंगें और भ्रष्टाचार  को मिटाना होगा।  कश्मीर को  केन्द्र से बराबर उदार वित्तीय सहायता मिलती रही है और विशेष  दर्जा  भी मिला हुआ है। मगर भ्रष्ट  व्यवस्था और दलाल अधिकांश  मदद को बीच में ही खा गए। इससे स्थानीय लोग नाराज हुए सो हुए, पाकिस्तान के पिठ्ठुओं को युवकों को भडकाने का पूरा मौका मिल गया। बहरहाल, स्थानीय लोगों का विश्वास  जीतने और भटके युवकों को फिर से  राष्ट्रीय  मुख्य  धारा में जोडने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष  अभियान चला रखा है। सीआरपीएफ ने आत्म समर्पण करने वाले भटके युवकों के लिए एक  विशेष  कक्ष और नंबर (1441) स्थापित किया है। केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर रोजगार परक योजनाएं चला रही हैं। युवाओं की विशेष  भर्ती की जा रही है। सेना ने आतंकिओं के प्रति अपनी रणनीति में विशेष  बदलाव किया है। आतंकियों को मार गिराने से पहले सुरक्षा एजेंसियों उन्हें आत्म समर्पण का अवसर देती है। युवकों के माता-पिता के माध्यम से भटके युवकों को  राष्ट्रीय  मुख्यधारा से जोडा जा रहा है। फुटबाल खिलाडी माजिद खान द्वारा आतंकी संगठन में  शामिल होने के बाद घर लौट आना इसकी ताजा मिसाल है। सुरक्षा एजेसिंयों की कार्रवाई में अब तक 132 आतंकी मारे जा चुके हैं। इससे आतंकियों के हौसले पस्त हो चुके हैं और उनमें भगदड मची हुई है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर  में सरकार के खिलाफ विरोध और प्रखर होता जा रहा है। आए दिन वहां जबरदस्त  प्रदर्शन  हो रहे हैं।  हताश पाकिस्तान भारत के खिलाफ ऐसी साजिश  रच रहा है, जिससे उसकी अपनी ही जगहंसाई हो रही है। कश्मीर  की अवाम भी अब पाकिस्तान की छिछौरी हरकतों को जान चुकी है। ताजा हालत भारत के पक्ष में है और इसका घाटी में  शांति  बहाली के लिए फायदा उठाया जा सकता है।