फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली और विवाद का “चोली-दामन“ का साथ है। मगर इस बार उनकी ऐतिहासिक कलाकृति “पद्मावती “ पर रिलीज होने से पहले उठा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। राजपूत वीरांगनाओं, करणी सेना से लेकर उत्तर प्रदेश और अन्य भाजपा शासित राज्य और भाजपाई नेता फिल्म को रिलीज होने से पहले ही बडे पर्दे पर से उतारने पर आमादा है। राजपूत संगठन अखंड राजपूताना सेवासंघ ने इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है । राजपूत आन-बान की रक्षा करने का दम भरने वाली ”करणी सेना” ने तो “पद्मावती “ की मुख्य किरदार मशहूर अभिनेत्री दीपिका पादुकोन का नाक काटने और भंसाली का सिर कलम करने की धमकी तक दे डाली है। मार्च में फिल्म की शूटिंग के दौरान भी राजपूत संगठनों ने अपना विरोध जताते हुए सेट को आग लगा दी थी और संजय लीला भंसाली को थप्पड तक जडे थे। बाद में जैसे-तैसे इस विरोध को शांत कर दिया गया लेकिन सितंबर में फिल्म का पहला लुक सामने आने के बाद विरोध फिर भडक उठा। और अब फिल्म को लेकर जिस तरह के उदगार व्यक्त किए जा रहे हैं, उससे भारतीय सभ्याचार भी शर्मसार हो गया है। उज्जैन के भाजपा सांसद चिंतामणी मालवीय ने फेसबुक पर पोस्ट में कहा है, “ जिनकी औरतें हर रोज शौहर बदलती हैं, वो जौहर को क्या जाने“। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज धर्म निभाने की बजाए “कानून एवं व्यवस्था“ का हवाला देकर फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। रोचक बात यह है कि अभी न तो फिल्म रिलीज हुई है और न ही यह फिल्म सेंसर बोर्ड ही पहुंची है। विरोध करने वाले किसी ने भी फिल्म नहीं देखी है और सुनी-सुनाई बातों पर फिल्म का विरोध किया जा रहा है। राजपूतों को फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी (फिल्म में यह यह किरदार रणबीर सिंह का है) के बीच कथित तौर पर दर्षाय प्रेम प्रसंगों पर सख्त ऐतराज हैं। खिलजी को आला दर्जे का ऐय्याश और लंपट माना जाता है। इसी ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में खिलजी और पद्मावती के प्रेम संबंधों को अपमानजनक माना जा रहा है। राजपूत संगठनों को फिल्म में ऐतिहासिक घटनाओं को तोड-मरोड कर पेश करने पर भी ऐतराज है। फिल्म में दीपिका के “घूमर“ डांस को राजपूत महिलाओं ने उनकी आन-बान के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि महारानियां दीपिका की तरह नाचती नहीं थी। और ऐतिहसिक सच्चाई भी यही है कि शाही घराने की महिलाएं पर्दे में रहती थीं और इस तरह नाचा नहीं करती थी। “घूमर“ में दीपिका के भडकीले वस्त्रों को भी राजपूताना महिलाओं का घोर अपमान बताया जा रहा है। फिल्म निर्माता संजय भंसाली ने वीडियो जारी करके राजपूतों की इन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है और स्पष्ट किया है कि फिल्म में खिलजी और पद्मावती के बीच कोई प्रेम प्रसंग नहीं है। फिल्म में पद्मावती का किरदार 15वीं शताब्दी के कवि मलिक मोहम्मद जायसी के काव्य संग्रह “पदमावत“ से प्रेरित है। रानी पदमावती का उल्लेख साहित्य में तो है मगर इतिहास में चितौडगढ की महारानी का कोई उल्लेख नहीं है। मगर भारतीय जनमानस में रानी पद्मावती अथवा पद्मिनी की छवि एक ऐसी वीरागंना की है जिन्होंने खिलजी जैसे कामुक शासक की बुरी नजर से बचने के लिए आत्म-दाह कर लिया था। भंसाली की फिल्म में इस तरह का चित्रण नहीं है। इसीलिए इसका मुखर विरोध किया जा रहा है। बहरहाल, विरोध जताने पर किसी को ऐतराज नहीं है मगर नाक काटने और सर कलम करने जैसी अमानवीय धमकियां भारतीय सभ्याचार का हिस्सा नहीं है। भगवा पार्टी के शासन में असहिषुणता चरम पर है। सरकार ने दो फिल्मों- “न्यूड“ और मलयालम फिल्म एस दुर्गा- को गोवा फिल्म उत्सव से ड्रॉप करके वही किया है जो पद्मावती का विरोध करने वाले कर रहे हैं। कलात्मक आजादी को दबाकर देश का कोई भला नही होने जा रहा है।
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