सोमवार, 13 नवंबर 2017

घुट-घुट कर मरती दिल्ली?

राजधानी दिल्ली समेत उतर भारत (इंडो-गंगा का पूरा क्षेत्र) में बढते प्रदूषण के लिए कौन जिम्मेदार है? इस सवाल पर देश  के सियासी दल एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश  में खरीफ फसल की कटाई के बाद किसानों द्वारा पराली जलाने से हर साल दिल्ली समेत उत्तर भारत में प्रदूशष  खतरनाक स्तर को भी पार कर जाता है। नासा के ताजा डेटा के अनुसार 27, 29 और 31 अक्टूबर को पराली जलाने के काम में खासा इजाफा हुआ था और यह ज्यादातर पंजाब में केन्द्रित था। इसकी वजह से दिल्ली और उत्तर भारत की हवा में इस कद्र जहर घुल गया कि दिल्ली और पंजाब में स्कूलों को बंद करना पडा। बढते प्रदूषण के कारण राजधानी में लोगों का सुबह- शाम घुमना-फिरना तक बंद हो गया है।  पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश  में पराली जलाने की वजह से समूचे उत्तर भारत में इस सप्ताह प्रदूषण बढने से लोगों का सांस लेना भी दुर्भर हो गया है। मगर नासा की ताजा रिपोर्ट में  यह  खुलासा  भी किया गया है कि पराली का जलाया जाना ही दिल्ली और उत्तर भारत की हवा में जहर नही घोल रही है, अलबत्ता मध्य पूर्व के सउदी अरबिया, कतर और ईरान का भी दिल्ली में प्रदूषण बढाने में अहम योगदान है। भू-वैज्ञानियों के अनुसार हर साल इस समय वायुमंडल की ऊपरी परतों में तेज हवाएं भारत की ओर बहती हैं। उत्तर भारत तक पहुंचते-पहुंचते इन हवाओं में पाकिस्तान होते हुए रास्ते में  धूल, धुंध की परतों का समावेश  हो जाता है। इससे वायु के कण भारी हो जाते हैं और दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के वायुमंडल में जहरीली परतें जमा हो जाती हैं। प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर को पार कर जाता है। रात में तापमान गिरने से वायु में नमी की मात्रा बढ जाती है और इससे धुंध का प्रकोप बढ जाता है। दिल्ली की तुलना में चीन की राजधानी बीजिंग को भी प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझना पड रहा है मगर चीन ने इसका पूृरी शिद्दत से सामना किया है। इस सप्ताह अमेरिकी  राष्ट्रपति  चीन के दौरे पर थे। बुधवार को बीजिंग में नवंबर माह में पहली बर धुंध मुक्त साफ आसमान और सुहानी सुबह का नजारा देखा जबकि पर्यावरण मंत्रालय ने इस सप्ताह गहरी धुंध की चेतावनी दे रखी थी। चीन स्मॉग से निपटने के लिए चार स्तरीय चेतावनी  लागू करता है और स्थिति के मुताबिक प्रदूषण निरोधी उपाय किए जाते हैं। भारत में हर समस्या को राजनीतिक  चश्मे  से देखने की रिवायत है। दिल्ली सरकार बढते प्रदूषण का दोष   केन्द्र और पडोसी राज्यों के मथे मढ रही है और केन्द्र दिल्ली की आप सरकार पर दोषारोपण कर रही है। जबकि सच्चाई यह है कि लोगों के जीवन में जहर घोलने के लिए सभी जिम्मेवार है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2015 में ही पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद  पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश  में यह क्रिया आज तक बदस्तूर  जारी है। पराली जलाने की क्रिया को रोकने के लिए राज्यों ने गंभीरता से प्रयास नहीं किए हैं हालांकि इसके लिए पुख्ता तकनीक और विकल्प उपलब्ध है। दिल्ली सरकार ने बढते प्रदूषण को रोकने के लिए 13 से 17 नवंबर तक पांच दिनों के लिए ऑड-ईवन लागू करने का फैसला लिया है। दिल्ली में यह सिस्टम तीसरी बार लागू किया जाएगा। 2016 में इसे दो बार लागू किया था। विशेषज्ञों  का आकलन है कि इससे प्रदूषण में 20 फीसदी की गिरावट आएगी। इस साल 17 अक्टूबर से केन्द्र और दिल्ली सरकार ने कुछ ठोस कदम उठाए हैं। इनमें बदरपुर प्लांट बंद करना और डीजल जेनेरेटर के इस्तेमाल पर पाबंदी  शामिल है। मगर यह सब सुप्रीम कोर्ट  के आदेश  पर किया गया है। हट-फिर कर वही यक्ष  प्रश्न खड़ा  हो जाता है। आखिर सरकार स्वंय पहल क्यों नहीं करती़? दिल्ली घुट-घुट कर मर रही है और नेता लोग सैर-सपाटे पर हैं।