दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रम्होस का बुधवार को सुखोई लडाकू विमान से सफलतम परीक्षण करके भारत ने दुनिया में फिर अपना परचम लहराया है। एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल परीक्षण की सफलता से भारत की सामरिक क्षमता में खासी बढोतरी हुई है। इससे सीमा पर दूर से किसी भी लक्ष्य को निशाना बनाने की क्षमता में भी खासा इजाफा हुआ है। इस मिसाइल के जल और थल परीक्षण पहले ही हो चुके हैं। ब्रम्होस मिसाइल को भारत और रुस के साझा उपक्रम के तहत तैयार किया जा रहा है। सुखोई विमान आम तौर पर जमीन से तीन से साढे तीन किलोमीटर ऊपर उडता है। इस स्थिति मे अगर ब्रम्होस मिसाइल को सुखोई विमान से दागा जाता है तो इसकी रेंज, मारक क्षमता और ऊंचाई स्वभाविक तौर पर बढ जाती है। ब्रम्होस को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल माना जाता है। इसकी स्पीड 2.8 मैक है। मैक ध्वनि के बराबर की रफ्तार की इकाई है। ब्रम्होस की रेंज 290 किलोमीटर है और यह 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल तकनीक पाकिस्तान तो क्या, अभी चीन के पास भी नहीं है। सामान्य क्रूज मिसाइलें भारत, चीन और पाकिस्तान के पास पहले से है। मिसाइल क्षमता का ख्याल करते हुए इस बात की पूृरी संभावना है कि चीन भी भारत की देखा-देखी इस तकनीक को विकसित कर सकता है। भारत,चीन और पाकिस्तान तीनों ही परमाणू हथियार सपन्न देश हैं और यह स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बडा खतरा है। युद्ध की स्थिति में दुनिया में भारी तबाही हो सकती है। पाकिस्तान जिस तरह से आतंक को पाल-पोस कर भारत को अस्थिर करने में लगा हुआ है और चीन उसका भरपूर साथ दे रहा है, उससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढी है और तीनों पडोसी देश युद्ध के मुहाने पर खडे है। इन हालात में तीनों पडोसी देशों को आपस में बातचीत कर इस बात पर सहमत होना चाहिए कि क्रूज मिसाइलों पर परमाणू हथियार नहीं लगाए जाएंगें। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह स्थिति तीनो के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है। शीत युद्ध के जमाने में अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ में इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों देश क्रूज मिसाइलों पर परमाणू हथियार नहीं लगाएंगें। इस पर बाकायदा समझौता भी हुआ था। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच भी इस तरह के समझौते की जरुरत है। भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणू अप्रसार संधि से बाहर है हालांकि चीन ने इस पर हस्ताक्षर कर रखे हैं। परमाणू अप्रसार संधि से बाहर रहने के कारण ही भारत और पाकिस्तान दोनों नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह (न्यूुक्लियर सप्लाई गु्रप-एनएसजी) से भी बाहर हैं। बहरहाल, ब्रम्होस ने न केवल भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता बढाई है, अलबत्ता भारत के लिए इसे अन्य देशों को बेचने के द्वार भी खोल दिए हैं। भारत अब तक दुनिया में हथियारों का सबसे बडा खरीदार रहा है। ब्रम्होस जैसी मारक मिसाइल की दुनिया में भारी मांग है। इसकी क्षमताओं को देखते हुए कई देशों ने ब्रम्होस मिसाइल में रुचि दिखाई है। ब्रम्होस मूलतः भारत और रुस का साझा उपक्रम है। इसलिए इसका नाम पूर्वोतर की नदी ब्रह्मपुत्र और रुस की मोस्कवा नदी पर रखा गया है। इस मिसाइल की मारक क्षमता सौ फीसदी है। लंबी दूरी से दागने के बावजूद ब्रम्होस मिसाइल अपने निशाने से कभी नहीं चूकती । इसे तैयार करने वाला ब्रम्होस एरोस्पेस अब 800 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल बना रहा है। इतना ही नहीं ब्रम्होस एरोस्पेस हाइपरसोनिक 6 मैक (ध्वनि से 6 गुना तेज) स्पीड वाली मिसाइल विकसित कर रहा है। 6 मैक स्पीड वाली मिसाइल की मारक क्षमता सामान्य मिसाइल से 36 गुना अधिक होगा। इस मिसाइल के विकसित होने से भारत दुनिया का शहंशाह बन सकता है ।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






