अर्थशास्त्र के रचनाकार, दार्शनिक और मार्गदर्शक कोटिल्य (चाणक्य) का एक प्रचलित उद्धरण है, “ शहद अथवा जहर का स्वाद न चखना जिस तरह लगभग नामुमकिन है, उसी तरह किसी मंत्री अथवा नौकरशाह का सरकारी खजाने पर हाथ साफ न करना भी अविश्नीय है“। कौटिल्य के ये उद्धरण आदि काल में भी प्रासंगिक थे और आज भी हैं। सच कहा जाए यो पहले से कहीं ज्यादा। घूसखोरी समकालीन भारत को दीमक तरह चाट रही है। लोकतंत्र की चुनावी राजनीति ने इस समस्या को और ज्यादा भयावह बना दिया है। चुनाव लडने के लिए अथाह पैसा चाहिए। खून-पसीना बहाकर कमाए गए धन से चुनाव नहीं जीता जा सकता। काली कमाई को ही पानी की तरह बहा जा सकता है। कानून में व्याप्त खामियों ने घूसखोरों को पूरी तरह से निडर बना डाला है। धडल्ले से जनता की गाढी खून-पसीने की कमाई हजम करने वालों पर मजाल है कानून भी हाथ डाल सके। राजनीति में अपराधी तत्वों की घुसपैठ ने इस सार्वजनिक लूट-खसोट को और बृहद बना दिया है। इससे चिंतित देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दागी नेताओं के मामलों की सुनवाई के लिए अलग से अदालतें बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने केन्द्र सरकार से कहा है कि फास्ट-ट्रेक कोर्ट की तरह दागी नेताओं के मामलों की सुनवाई के लिए इसी तरह की अदालतें स्थापित की जाएं। दागी नेताओं को ताउम्र चुनाव लडने से अयोग्य करार देने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश जारी किए। कोर्ट ने केन्द्र सरकार को इस मामले में ठोस प्रस्ताव पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। बहरहाल, देश में दागी और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं का सियासत की मुख्य धारा में बने रहना लोकतंत्र के लिए अन्तोगत्वा घातक सिद्ध हो सकता है। तथ्य और आंकडे इस बात के गवाह हैं कि दागी नेताओं की किस हद तक राजनीतिक दलों में घुसपैठ है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर)े द्वारा 2014 लोकसभा चुनाव के समय एकत्रित किए गए आंकडों के अनुसार मोदी मंत्रिमंडल के 20 मंत्रियों ने अपने-अपने हलफनामों में बताया था कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमेंसे 11 मंत्रियों पर हत्या के प्रयास और साम्प्रदायिक दुर्भावना जैसे संगीन मामले दर्ज थे। देश के एक तिहाई लॉमेकर्स-162 सांसदों और 1200 विधायकों- पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐडीआर और इलेक्शन वाच की साझा रिपोर्ट के अनुसार सतारूढ भारतीय जनता पार्टी के 31 फीसदी तो समाजवादी पार्टी के 48 फीसदी नेता दागी हैं। लालू प्रसाद यादव की राजद में 64 फीसदी नेताओं पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सबसे ज्यादा 82 फीसदी दागी नेता झारखंड मुक्ति मोर्चे में हैं। कांग्रेस में सबसे कम 21 फीसदी नेता दागी हैं। कांग्रेस नेता रसीद मसूद घूसखोरी के मामले में सजा मिलने पर अपनी राज्यसभा सीट गंवाने वाले पहले सांसद हैं। एडीआर के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव लडने वाले 5390 उम्मीदवारों मेंसे 17 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमेंसे 10 फीसदी पर हत्या और बलात्कार जैसे संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। तमिल नाडु में कन्याकुमारी लोकसभाई सीट के आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार पर रिकॉर्ड 382 मामले दर्ज थे और इनमें 19 मामले बेहद संगीन थे। दार्शनिक रुसो लोकतंत्र के कद्रदान तो थे मगर उन्हें इस बात की पूरी-पूरी आशंका थी कि भ्रष्ट और दागी नेता व्यवस्था पर हॉवी होकर इसे जनहित में नहीं चलने देंगे। सियासी नेताओं और नौकरशाही के गठजोड को राजनीति के अपराधीकरण के लिए प्रमुख रुप से जिम्मेदार माना जाता है। सियासी नेताओं को उनके इशारों पर चलने वाले अफसर चाहिए और नौकरशाहों को मनपंसद पोस्टिंग और जल्द से जल्द तरक्की। इससे भ्रष्टाचार पनपता है और यह अपराधियों को पालता है। दागी नेताओं और राजनीति का आपराधीकरण रोकना समय की मांग है। इसे जितनी जल्दी जड से उखाड कर फेंका जाए, देश के लिए उतना ही अच्छा है। बार-बार न्यायपालिका ही क्यों, सरकार स्वंय पहल क्यों नहीं करती?
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






