बुधवार, 15 नवंबर 2017

आसियान और भारत

फिलीपींस की राजधानी मनीला में मंगलवार को सपन्न दक्षिण पूर्व एशियाई  देशों  के समूह “आसियान“ में भारत का दबदबा और बढा है। दस एशियाई   देशों  के  इस समूह में भारत भी अमेरिका  चीन और जापान की तरह पर्यवेक्षक है, सदस्य नहीं। ठीक पचास साल पूर्व 1967 में  इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और फिलीपींस ने जब “आसियान“ बनाया था, तब किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह समूह इतना लंबा सफर सफलतापूर्वक तय कर लेगा। 50 साल के सफर के दौरान  इस समूह में विएतनाम, बू्रनी, लाओस, कंबोडिया और म्यांमार भी  जुड़  चुके हैं और आज यह समूह एशिया प्रशांत  का ताकतवर संगठन  है। आसियान की सबसे बडी सफलता यह है कि समूह ने आपसी मसलों को मिल-बैठकर सुलझाया है और इससे समूह और मजबूत हुआ है। समूह की एकता भी काबिलेतारीफ है। आसियान भले ही विकासशील देशों  का समूह है मगर अमेरिका, जापान और चीन जैसे बडे  मुल्क  इसमें खासी रुचि रखते हैं। और हकीकत भी यही है कि अमेरिका और चीन की रुचि के कारण इस समूह का मह्त्व बडा है। भारत पिछले 25 सालों से आसियान  से लगातार बातचीत का क्रम जारी  रखे हुए  हैं । इससे भारत का आसियान देशों के साथ व्यापार बढा है। चीन के दबदबे को संतुलित करने के लिए आसियान में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। आासियान देश  भारत को अधिकाधिक जिम्मेदारी देना चाहते हैं। इसीलिए हर सम्मेलन में भारत को न्यौता दिया जाता है। अमेरीका भी आसियान में भारत की अहम भूमिका को स्वीकार करने लग पडा है और वह अब एशिया प्रशांत  को भारत  प्रशांत  कहने लग पडा है। एक जमाने में आसियान  में अमेरिका का दबदबा था और करीब-करीब हर देश  मे उसके सैन्य अड्डे हुआ करते थे। मगर अब स्थिति काफी बदल गई है और अमेरिका की जगह चीन का आसियान मे ज्यादा दबदबा है। आसियान देश  व्यापार के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका को यह गवारा नहीं है और वह भारत को आगे करके चीन को कमजोर करना चाहता है। दक्षिण चीन सागर (साउथ चाइना सी) में चीन का बढता प्रभाव और उसकी विस्तारवादी भूख आसियान देशों   के लिए सबसे बडा खतरा है। बीजिग दक्षिण चीन सागर को अपने प्रभाव में लाना चाहता है जबकि अमेरिका और आसियान देश  इसे मुक्त व्यापार क्षेत्र बना कर रखना चाहता है। इस क्षेत्र से लगभग पाच अरब डॉलर का वैश्विक  व्यापार किया जाता है। दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और कई आसियान देश  “ नेविगन ऑपरेशन“ भी चलाते हैं। चीन को इस पर ऐतराज है। अमेरिका ने कई बार आसियान सम्मेलन में  दक्षिण चीन सागर से जुडे मुद्दों को उठाने के प्रयास किए मगर चीन ने ऐसा नहीं होने दिया। भारत का भी काफी बडा व्यापार दक्षिण चीन सागर से होकर गुजरता है। इस स्थिति में भारत भी इस मामले में दखल देता रहता है। बहरहाल, मनीला के आसियान सम्मेलन में भारत को पहली बार खासी तवज्जो मिली है। इसकी प्रमुख वजह है: भारत प्रशांत  को मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के समूह को पुर्नजीवित करना। इसका प्रमुख मकसद दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की संभावित बडी कार्रवाई के लिए तैयार रहना है। आसियान देश  इस पहल को सकारात्मक मानते हैं। आसियान मुल्क   चीन को अजगर मानते हैं जो उन्हें कभी भी निगल सकता है। आसियान देश  चीन से कितना डरते है, इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि आज तक आसियान सम्मेलन में दक्षिण चीन सागर में चीन के अतिक्रमण के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला गया है। दक्षिण चीन सागर में चीन के घिरने से  ड्रेगन भारत के साथ सीमा पर तनाव उत्पन करने से भी बाज आएगा। चीन, भारत को घेरने के लिए खुलकर पाकिस्तान को आगे कर रहा है। भारत आसियान  के सहयोग से चीन पर बाजी पलट सकता है।