गुरुवार, 30 नवंबर 2017

ग्लोबल आंत्रप्रेन्योर समिट

हैदराबाद में मंगलवार से शुरु हुई तीन दिवसीय  ग्लोबल आंत्रप्रेन्योर समिट में अमेरिकी  राष्ट्रपति  की पुत्री इवांका ट्रंप का शरीक होना और उनके द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ के कसीदें पढना भारत और वाशिंगटन के बीच मधुर संबंधों को उजागर करता है। इवांका न केवल युवा उधमी है और इंटरनेशनल मार्केट में उनका बहुत नाम है, अलबत्ता वे अपने पिता राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक सलाहकार  भी  हैं । इस समय व्हाइट हाउस में इवांका की तूती बोलती है। भारत ने इवांका के सत्कार में कोई कसर नहीं छोडी। अमूमन, गडढों से भरी  हैदराबाद की सडकों को  शीशे  की तरह चमकाया गया। इस पर हैदराबादियों ने टवीट किया “ काश  इवांका हमारी गली  में  भी आती“। एक अन्य ने टवीट किया,“ हैदराबाद में दो तरह की सडकेँ  हैं-एक इवांका ट्रंप रोड और दूसरी सामान्य रोड“।  भिखारियों की तो जैसे  शामत ही आ गई। पूरे शहर से भिखारियों को हटाया गया।  ग्लोबल आंत्रप्रेन्योर समिट में उनके संबोधन को देश -विदेश  में लाइव दिखाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हैदराबाद के मशहूर फलकनुमा पैलेस में इवांका के लिए रात्रिभोज की मेजबानी भी की। सम्मेलन में इवांका ट्रंप  ने भारत में लिंग असमानता का उल्लेख करके अप्रत्यक्ष तौर पर भारतीय समाज पर तंज  कसा है। इवांका का आकलन है कि अगर भारत में लिंग असमानता को कम किया जाता है, तो उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अगले तीन सालों में 150 अरब डॉलर का इजाफा हो सकता है। निसंदेह, भारत में अभी भी लिंग असमानता  है और महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कमजोर समझने की मानसिकता व्याप्त है। संविधान में लिंग समानता की व्यवस्था के बावजूद आजादी के सात दशक बाद भी पुरुषों   की तुलना में महिलाओं को समान अवसर मुहैया कराने से हाथ खींच लिए जाते हैं। इसका सबसे बडा प्रमाण दे श की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाना है। पंचायतों और स्थानीय निकाओं में महिलाओं को माकूल प्रतिनिधित्व देने के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हैं मगर संसद और विधानसभाओं में आज तक 33 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जा सका है। बहरहाल, अमेरिका और भारत की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में काफी अंतर है मगर भारत की तरह  अमेरिका में भी लिंग असमानता व्याप्त है। इवांका ने अपने संबोधन में यह कर इस बात को स्वीकार भी कि पुरुष  प्रधान कारोबार में उन्होंने खुद महसूस किया कि बतौर महिला उन्हें अपनी काबलियत को प्रखरता से सिद्ध करना पडा। रोचक पहलू यह है कि इवांका ट्रंप के कारोबार को लेकर आज भी रहस्य बरकरार है। उनके ब्रांड के सप्लायर्स कौन है, इसकी आज तक पुख्ता जानकारी नहीं है। इसी माह अमेरिका के 23 स्वंयसेवी संस्थाओं ने  राष्ट्रपति  और इवांका की कंपनी से सप्लायर्स  के नाम उजागर करने की मांग रखी थी। इस सितंबर को एक समाचार एजेंसी की खोजी खबर में बताया गया था कि इस साल व्हाइट हाउस में राजनीतिक सलाहकार बनने के बाद से इवांका का कारोबार और भी अपारदरर्शी  हो गया है। उनकी कंपनी किन लोगों से कार्रोबार कर रही है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। हैदराबाद के  ग्लोबल आंत्रप्रेन्योर समिट में इवांका ट्रंप की मौजूदगी से अन्य उधमी अप्रसन्न है। इवांका के सम्मेलन में  शामिल होने से पूरा आयोजन “इवांका मय“ हो गया है और इसमें राजनीति की “बू“ भी आ रही है। इस सम्मेलन का मूल मकसद “ महिला सबसे पहले, सभी के लिए स्मृद्धि“  है। और इस बात में दो राय नहीं हो सकती है कि महिलाओं की उधमशीलता को प्रोत्साहित करके ही समाज के हर तबके के लिए  स्मृद्धि सुनिश्चित  की जा सकती है।  इसके लिए लिंग में समानता लान बेहद जरुरी है। इस मामले में हरियाणा की उपलब्धि काबिलेगौर है। लिंग असमानता के लिए बदनाम इस राज्य “ बेटी बचाओ, बेटी पढाओ“ योजना को संजीदगी से लागू करके बेहतरीन काम किया है।